शिक्षा विभाग के अफसर को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है। बिल पास करने के ऐवज में ये अधिकारी पैसे की डिमांड कर रहा था। 57 लाख रुपये की मरम्मत योजना के बिल भुगतान के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन की मांग का आरोप है। मामले में आगे की जांच जारी है।
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Crime News/3.3.26: होली के ठीक पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। शिक्षा विभाग के एक अफसर को घूस लेते गिरफ्तार किया गया है। बिल पास करने के एवज में ये अफसर 5,00,000 रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ा है। पूरा मामला बिहार के बेतिया जिले का है, जहां पटना से आई विशेष इकाई (SVU) की टीम ने बेतिया में तैनात शिक्षा विभाग के सहायक अभियंता रोशन कुमार को 5,00,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
अभियंता जिला शिक्षा परियोजना, बेतिया में पदस्थ हैं और उन पर स्कूलों के मरम्मत कार्य के बिल पास करने के बदले कमीशन मांगने का आरोप है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, रहीमपुर नौतन निवासी शम्स तबरेज ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने 57 लाख रुपये की रिपेयरिंग योजना के तहत कार्य कराया था। बिल भुगतान के लिए सहायक अभियंता द्वारा 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की जा रही थी।
आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एवज में 5 लाख रुपये तत्काल देने का दबाव बनाया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि अभियंता रिश्वत के रूप में एक स्मार्ट वॉच लेने को भी तैयार थे। शिकायत की प्राथमिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद निगरानी विभाग ने जाल बिछाया। तय योजना के तहत जब अभियंता ने 5 लाख रुपये स्वीकार किए, तभी टीम ने उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया।
एसयूवी ने यह कार्रवाई निगरानी के पुलिस उपाधीक्षक सुधीर कुमार की देखरेख में की गई। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, 57 लाख रुपये की मरम्मत योजना में विभिन्न स्कूलों के भवनों की मरम्मत और रखरखाव से जुड़े कार्य शामिल थे।
भुगतान में देरी और कथित कमीशन की मांग से संवेदक पक्ष परेशान था, जिसके बाद शिकायत की गई। जांच एजेंसियां अब संबंधित दस्तावेजों, फाइलों और बैंक लेन-देन की भी जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल तो नहीं हैं।कार्रवाई के बाद विभागीय हलकों में हड़कंप मच गया है।
शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी और की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।निगरानी विभाग ने दोहराया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल, अभियंता को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है ।




