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झारखंड में शराब दुकानदारों को संभावित राहत देने के लिए नई उत्पाद नियमावली में संशोधन की तैयारी की जा रही है। सरेंडर हुई खुदरा शराब दुकानों का राजस्व शेष दुकानों पर डालने के नियम में बदलाव किया जा रहा है। इससे संबंधित प्रस्ताव उत्पाद विभाग ने तैयार कर लिया है। यह प्रस्ताव विभागीय मंत्री को भेजा गया है। मंत्री की सहमति मिलने के बाद इसे कैबिनेट में रखा जाएगा। झारखंड में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से लगभग 41 शराब दुकानें सरेंडर मानी जाएंगी, क्योंकि तय समय सीमा के भीतर मार्जिन मनी या लाइसेंस फीस जमा नहीं की गई है। कुल 1343 स्वीकृत दुकानों में से 1302 ने ही लाइसेंस फीस जमा की है, जिनका रिन्यूअल किया जाएगा। शेष दुकानों के लिए फिर से लॉटरी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अगर इसके बाद भी दुकानों की बंदोबस्ती नहीं हुई तो झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड उनका संचालन करेगा। मालूम हो कि झारखंड में 1 सितंबर 2025 से नई उत्पाद नीति के तहत निजी हाथों से शराब की बिक्री हो रही है। मौजूदा नियमावली में यह प्रावधान है कि अगर किसी जिले में नए वित्तीय वर्ष में कुछ दुकानें सरेंडर हो जाती हैं तो उन दुकानों को बंद कर उनके निर्धारित राजस्व लक्ष्य को उसी जिले की बाकी दुकानों पर बांट दिया जाता है। इससे जिले के कुल राजस्व लक्ष्य में कोई कमी नहीं आती।
सरेंडर शराब दुकानों का राजस्व बोझ अब बाकी कारोबारियों पर नहीं डाला जाएगा
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