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दो माह में नियमावली को कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की तैयारी में शिक्षा विभाग रांची: अब राज्य के गैर-सरकारी सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक हाईस्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली के आधार पर ही हो सकेगी। शिक्षा विभाग इसके लिए नई नियमावली तैयार कर रहा है और अगले दो महीनों के भीतर इसे कैबिनेट से मंजूरी दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत सरकार नियुक्ति प्रक्रिया की निगरानी करेगी ताकि नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित हो सके। विभिन्न जिलों से प्राप्त फर्जी नियुक्तियों और भाई-भतीजावाद की शिकायतों के बाद पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग यह कदम उठा रहा है। अब प्रबंध समितियां मनमानी नियुक्तियां नहीं कर सकेंगी। नियुक्ति के सभी पहलुओं से संतुष्ट होने के बाद ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक चयन पर अपनी अंतिम मुहर लगाएंगे। उपायुक्त के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) इसकी निरंतर मॉनिटरिंग करेंगे। बदलाव का कारण: विधानसभा में उठा था मामला झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में विधायक राजेश कच्छप और नमन विक्सल कोनगाड़ी ने इस विषय को उठाया था। राजेश कच्छप ने आशंका जताई थी कि नई नियमावली के माध्यम से सरकार अल्पसंख्यक स्कूलों पर अंकुश लगाना चाहती है। इस पर प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश के आलोक में यह नियमावली बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति का अनुमोदन अभी लंबित है, उनके प्रति सरकार का रवैया सकारात्मक है। वर्तमान व्यवस्था: प्रबंध समिति करती है नियुक्ति, वेतन देती है सरकार वर्तमान में सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक स्कूलों में नियुक्तियां प्रबंध समिति द्वारा की जाती हैं, जबकि उनके वेतन और भत्तों का भुगतान सरकार करती है। अभी तक आंतरिक चयन प्रक्रिया में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। कुछ समितियां साक्षात्कार तो कुछ परीक्षाएं आयोजित करती हैं, जिसके लिए विज्ञापन प्रकाशन अनिवार्य होता है। अब विभाग इसी प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने की तैयारी में है। आगे क्या… इन मुख्य बिंदुओं पर रहेगी नजर शिक्षक नियुक्ति को पारदर्शी बनाने के लिए आगामी नियमावली में निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा: योग्यता और आयु सीमा: क्या निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा का पूर्णतः पालन किया गया है? विज्ञापन: क्या प्रबंध समिति ने नियुक्ति हेतु सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया था? समान अवसर: क्या सभी इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर मिला या किसी स्तर पर भेदभाव हुआ? (पारदर्शिता हेतु ऑनलाइन आवेदन का निर्देश भी दिया जा सकता है)। विभागीय अनुमति: क्या नियुक्ति प्रक्रिया के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से आवश्यक अनुमति ली गई? चयन का आधार: चयन का आधार केवल साक्षात्कार था या लिखित परीक्षा भी आयोजित की गई? आरक्षण और मेरिट: मेरिट लिस्ट तैयार करने में आरक्षण रोस्टर और नियमों का पालन हुआ या नहीं? जानिए… क्या है शिक्षकों के लिए निर्धारित योग्यता पदनाम: हाईस्कूल और प्लस-टू स्कूलों के शिक्षकों के लिए मानक अब एक समान होंगे। शैक्षणिक योग्यता: संबंधित विषय में न्यूनतम 50% अंकों के साथ स्नातकोत्तर (PG) और बीएड (B.Ed) अनिवार्य। चयन प्रक्रिया: परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होंगे। पेपर-1 (सामान्य ज्ञान) और पेपर-2 (विषय आधारित, 300 अंक)। आयु सीमा: 21 से 40 वर्ष (आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट)।
सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक स्कूलों में अब नियमावली से होगी शिक्षक भर्ती
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