सीएम की समृद्धि यात्रा से पहले पूर्णिया में प्रदर्शन:कपड़े पर मांग पत्र छपवाकर शहर में घूमे एक्टिविस्ट; अवैध पैथोलॉजी पर कार्रवाई की मांग

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सीएम नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण में 12 मार्च को पूर्णिया पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री 500 करोड़ से अधिक के 200 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। वहीं इससे पहले शहर के चर्चित सोशल एक्टिविस्ट और विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. आलोक राज ने मुख्यमंत्री नीतीश को खुला मांग पत्र भेजकर जिले में चल रहे फर्जी डॉक्टरों, अवैध पैथोलॉजी लैब और दलालों के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मांग को अनोखे अंदाज में उठाया। मांग पत्र को कपड़े पर छपवाकर उसे पहनकर विरोध दर्ज कराया। आलोक राज ने कहा कि पूर्णिया में स्वास्थ्य व्यवस्था पर स्वास्थ्य माफिया का कब्जा होता जा रहा है और इसका खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। जिले में बड़ी संख्या में फर्जी डॉक्टर क्लीनिक चला रहे हैं। कई पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सेंटर बिना मानक और लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर काम करने का आरोप कई नर्सिंग होम और निजी अस्पताल भी नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं। इन संस्थानों में सक्रिय दलाल मरीजों को गुमराह कर निजी अस्पतालों तक पहुंचाते हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों का आर्थिक शोषण हो रहा है। डॉ. आलोक राज ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जिले में चल रहे सभी अवैध क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सेंटर की व्यापक जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही अस्पतालों में सक्रिय दलालों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। पूर्णिया की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए GMCH में पर्याप्त डॉक्टरों की नियुक्ति, आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था और जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य नीति लागू करने की भी मांग उन्होंने राज्य में सख्त स्वास्थ्य नीति लागू करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी सजा और जेल का प्रावधान होना चाहिए। डॉ. आलोक राज ने कहा कि फर्जी डॉक्टरों और अवैध मेडिकल सेंटरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। उन्होंने साफ कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो स्वास्थ्य के नाम पर लोगों का शोषण ऐसे ही जारी रहेगा। स्वास्थ्य व्यवस्था किसी भी समाज की सबसे अहम बुनियाद होती है, इसलिए इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

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