सीवान में 8.0 तीव्रता के आर्टिफीसियल भूकंप का प्रैक्टिस:टीमों ने 7 स्थानों पर किया रेस्क्यू ड्रिल, DM और सेंट्रल ऑब्जर्वर ने देखि तैयारी

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सीवान में गुरुवार की सुबह 8:20 बजे सायरन की तेज आवाज के साथ 8.0 तीव्रता के भूकंप का कृत्रिम परिदृश्य तैयार किया गया और इसके साथ ही शुरू हो गया राज्य स्तरीय ‘मेगा मॉक ड्रिल’। जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के नेतृत्व में आयोजित इस व्यापक पूर्वाभ्यास का उद्देश्य भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना और जन-धन की क्षति को न्यूनतम करना रहा। यह मॉक ड्रिल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के दिशा-निर्देशों के आलोक में आयोजित की गई। जिला प्रशासन ने ‘इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम’ (IRS) को सक्रिय करते हुए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की वास्तविक परीक्षा ली। 7 स्थानों पर ‘लाइव’ रेस्क्यू ऑपरेशन भूकंप से हुए संभावित नुकसान को वास्तविक रूप देने के लिए जिले के सात प्रमुख स्थानों को सिमुलेशन साइट बनाया गया। शैक्षणिक संस्थान के रूप में राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, सीवान में भवन ढहने और छात्रों को मलबे से निकालने का अभ्यास किया गया। सदर अस्पताल, सीवान में क्षतिग्रस्त हिस्से से मरीजों के सुरक्षित निकासी तथा ‘मास कैजुअल्टी मैनेजमेंट’ की क्षमता परखी गई। ऑफिसर्स कॉलोनी में ऊंची इमारतों से रेस्क्यू का प्रदर्शन किया कमर्शियल क्षेत्र के तौर पर बियाडा परिसर, हरदिया मोड़ में फंसे लोगों के बचाव का अभ्यास हुआ, जबकि डीआरसीसी परिसर में आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया को दोहराया गया। ऑफिसर्स कॉलोनी में ऊंची इमारतों से रेस्क्यू का प्रदर्शन किया गया। अनुमंडल स्तर पर महाराजगंज में अनुमंडल कार्यालय और प्रकाश पेट्रोल पंप पर आग बुझाने एवं भीड़ नियंत्रण का अभ्यास हुआ। रणनीतिक कमांड सेंटर की सक्रियता गांधी मैदान को स्टेजिंग एरिया बनाया गया, जहां SDRF, फायर ब्रिगेड और अन्य बचाव दलों को तैनात किया गया। अंबेडकर भवन/टाउन हॉल में राहत शिविर स्थापित कर भोजन, पानी और अस्थायी शेल्टर की व्यवस्था का परीक्षण किया गया। पुलिस लाइन मैदान में हेलीबेस बनाकर गंभीर घायलों के एयर इवैक्यूएशन का सिमुलेशन किया गया। समाहरणालय स्थित जिला आपात संचालन केंद्र (DEOC) से ड्रोन के माध्यम से निगरानी एवं समग्र कमान का संचालन किया गया। जिलाधिकारी-सह-इंसीडेंट कमांडर ने नागरिकों से अपील की कि सुबह 8:20 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक बजने वाले सायरन एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की आवाजाही से घबराएं नहीं। यह केवल पूर्वाभ्यास है और किसी भी नागरिक या छात्र को कोई वास्तविक खतरा नहीं है। एंबुलेंस के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाकर यातायात प्रबंधन का भी अभ्यास किया गया।

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