रांची21 घंटे पहले
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झारखंड में ट्रेजरी घोटाला उजागर होने के बाद सरकार अब फूंक-फूंककर कदम रख रही है। अब राज्य के 1.87 लाख सरकारी अधिकारियों-कर्मियों को स्वप्रमाणित घोषणा पत्र देना होगा। इसके बाद ही वेतन का भुगतान होगा। इस घोषणा पत्र में नाम, पदनाम, जीपीएफ/प्राण नंबर, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, नियुक्ति की तिथि, आधार, पैन नंबर, ईमेल आईडी, बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड की जानकारी देनी होगी।
यह भी लिखना होगा कि वे खुद प्रमाणित कर रहे हैं कि सभी जानकारी सही है और किसी भी त्रुटि की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। दरअसल जांच में खुलासा हुआ है कि ट्रेजरी से अवैध निकासी के लिए फर्जी बैंक खातों और गलत प्रोफाइल का इस्तेमाल किया गया है। इसीलिए झारनेट पर सभी का डेटा दोबारा सत्यापित किया जा रहा है।
जानिए…क्यों पड़ी इसकी जरूरत
घोषणा पत्र का फॉर्मेट
फर्जीवाड़े पर लगाम: झारनेट प्रोफाइल को अपडेट कर यह सुनिश्चित करना है कि पैसा केवल वास्तविक कर्मचारी के पास ही जाए।
क्रॉस वेरिफिकेशन: जीपीएफ/प्राण नंबर, आधार और पैन कार्ड के डेटा का मिलान करना, ताकि कर्मचारियों की पहचान सत्यापित हो और फर्जी कर्मचारियों को सिस्टम से बाहर किया जा सके।
जवाबदेही तय करना: स्व-घोषणा पत्र के माध्यम से भविष्य में कानूनी कार्रवाई के लिए आधार तैयार किया जा सके।
पारदर्शिता: बैंक पासबुक की फिजिकल कॉपी मांगकर डेटाबेस की विसंगतियों को दूर किया जा सके।
सुरक्षित भुगतान प्रणाली: झारनेट प्रोफाइल अपडेट होने से भविष्य में पैसा ट्रांसफर करना और सुरक्षित हो सके।


