2000 watt solar power generation in High Court premises, electricity bill reduced by half

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रांची19 घंटे पहले

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झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (ज्रेडा) ने कोल आधारित थर्मल पावर से इतर ग्रीन इनर्जी के तहत सोलर से 60 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने लगी है। ज्रेडा झारखंड ऊर्जा विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई है, जिसके जिम्मे ग्रीन इनर्जी को बढ़ावा देने का काम है।

ज्रेडा ने झारखंड हाईकोर्ट परिसर में पार्किंग शेड की छत पर कोर्ट की सहमति से सोलर प्लेट लगाया। यह न केवल गाड़ियों की बारिश से रक्षा करती है, बल्कि सोलर प्लेट लगाने के लिए जरूरी जमीन की कमी को भी पूरा करती है। नया झारखंड हाईकोर्ट भवन बनने के बाद ज्रेडा ने हाईकोर्ट में करीब दो मेगावाट का सोलर प्लांट लगाया। इसका फायदा अब दिखने लगा है। इससे हाईकोर्ट में कुल बिजली खपत के बाद आने वाला बिल भी घट गया है। पहले जहां हाईकोर्ट का बिजली बिल औसतन हर माह 4.5 से पांच लाख रुपए तक आता था, वह अब दो लाख के करीब आ रहा है। यानि बिजली बिल का खर्च आधे से भी कम हो गया है। विधानसभा में भी ज्रेडा इसी तरह का प्रयोग कर रहा है। कई अन्य स्थानों पर भी सोलर प्लेट लगाए जा चुके हैं और कई जगह लगाया जा रहा है।

60 मेगावाट सोलर बिजली उत्पादन का लक्ष्य ज्रेडा ने ऐसे हासिल किया

ज्रेडा ने रांची सहित राज्य के तमाम सरकारी भवनों, कोर्ट, सरकारी स्कूलों, डीसी ऑफिस, सदर अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सोलर प्लेट लगाकर रिन्युएबल एनर्जी से 60 मेगावाट उत्पादन करने का लक्ष्य हासिल कर लिया। ज्रेडा का उद्देश्य आने वाले वर्षों में सोलर पावर उत्पादन बढ़ा कर ग्रीन इनर्जी को बढ़ावा देना है।

कहां कितना हो रहा है सोलर से बिजली उत्पादन

राज्य के कुल 2900 परिसर में सोलर प्लेट लगाए गए हैं राज्य के सभी सिविल कोर्ट व अन्य कोर्ट: 3.5 मेगावाट राज्य के सभी डीसी ऑफिस : 02 मेगावाट {सरकारी अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र : 7 मेगावाट 700 सरकारी स्कूल : 12 मेगावाट 300 थाना : 4 मेगावाट, 41 विभिन्न विश्वविद्यालय-कॉलेज : 25 किलोवाट, हाईकोर्ट : 2 मेगावाट, विधानसभा : 600 किलोवाट

हाईकोर्ट

नेट मीटरिंग से सोलर से बनी बिजली एडजस्ट हो जाती है

सोलर प्लेट से उत्पादित बिजली नेट मीटरिंग के जरिए परिसर में लगे बिजली मीटर से जुड़ी रहती है। दिन में सोलर प्लेट से धूप में जितना बिजली उत्पादन होता है। वह नेट मीटरिंग के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। यानि जितनी बिजली सोलर के द्वारा उत्पादित की जा रही है, उसका बिल, मूल बिल में एडजस्ट हो जाता है। इससे परिसर या उपभोक्ताओं द्वारा कंज्यूम की जाने वाली बिजली में कमी आती है।

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