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भारत के प्राचीनतम जिलों में शुमार पूर्णिया इस बार अपने स्थापना काल के 256 साल पूरे कर चुका है। आज के ही दिन 14 फरवरी 1770 को पूर्णिया अस्तित्व में आया था। एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मना रहा है। स्थापना दिवस समारोह पुरैनिया महोत्सव-2026 के रूप में मनाया जा रहा है। इसे लेकर जिले में उत्सव का जैसा माहौल है। समाहरणालय से लेकर प्रखंड कार्यालय तक दुल्हन की तरह सजाए गए हैं। इस खास मौके पर जिला प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं। समारोह को यादगार बनाने के लिए इस बार कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। कृषि मेला और पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन समारोह की शुरुआत शहर के आर्ट गैलरी से हुआ। मुख्य अतिथि खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री लेसी सिंह के अलावा बनमनखी विधायक कृष्ण कुमार ऋषि, सदर विधायक विजय खेमका, रुपौली विधायक कलाधर मंडल, कसबा विधायक नितेश कुमार सिंह, बायसी विधायक गुलाम सरवर, डीएम अंशुल कुमार, एसपी स्वीटी सहरावत ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। स्थापना दिवस के अवसर पर व्यंजन मेला, विकास मेला, कृषि मेला और पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। अलग-अलग विभागों की ओर से लगाए जाने वाले स्टॉलों के जरिए जिले में चल रही विकास योजनाओं और जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी आम लोगों को दी जा रही है। पुष्प प्रदर्शनी में बागवानी से जुड़े प्रतिभागी अपनी पुष्प वाटिकाओं के साथ हिस्सा लेने पहुंचे हैं। जबकि कृषि मेला में आधुनिक खेती और नवाचारों की झलक देखने को मिल रही है। लोकल कलाकारों को विशेष प्राथमिकता स्थानीय कलाकारों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जा रही है। इसकी शुरुआत दोपहर 12:30 बजे हुई। रात 8 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहेगा। कलाकार एक से बढ़कर एक डांस, संगीत और लोक कला की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। इसमें पूर्णिया और बिहार की सांस्कृतिक परंपराओं की छाप दिख रही है। जिला प्रशासन ने इस बार लोकल कलाकारों को विशेष प्राथमिकता दी है, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिल सके। खास अवसर पर खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया है। इसके तहत खेल भवन, व्यायामशाला, पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 का आयोजन किया गया। वहीं, 15 फरवरी को पुलिस लाइन पूर्णिया में सुबह 10 बजे से एडमिनिस्ट्रेशन बनाम मीडिया के बीच फैंसी क्रिकेट मैच खेला जाएगा, जो समारोह का एक विशेष आकर्षण रहेगा। हर क्षेत्र में विकास हुआ है मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि 14 फरवरी 1770 को पूर्णिया जिला अस्तित्व में आया था। उस वक्त यह बंगाल राज्य के अधीन था। जिले के पहले जिला सुपरवाइजर जॉर्ज डुकरैल नियुक्त हुए। 1912 में बंगाल के विभाजन के बाद पूर्णिया जिला बिहार राज्य का अंग बन गया। 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर पूर्णिया जिले के कुल 913 गांवों के 759 वर्गमील क्षेत्र पश्चिम बंगाल में चला गया। इसी प्रकार पूर्णिया जिला से अलग होकर कटिहार, किशनगंज व अररिया जिला अस्तित्व में आया। पर्यटन, कला, कृषि, खेल, व्यापार हर क्षेत्र में पूर्णिया समृद्ध और संपन्न हुआ है। मेडिकल कॉलेज, पूर्णिया यूनिवर्सिटी से पहचान डीएम अंशुल कुमार ने कहा कि पूर्णिया प्रमंडलीय हेडक्वार्टर भी है। तब से लेकर अब तक पूर्णिया ने समावेशी विकास के नित नए आयाम छुए हैं। समावेशी विकास के इए पूर्णिया जिले के तौर पर एक मानक है। ऑटो मोबाइल सेक्टर के अलावा मक्का-मखाना इंडस्ट्री हब के तौर पर पूर्णिया तेजी से उभरा है। मेडिकल कॉलेज, पूर्णिया यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, कृषि विश्वविद्यालय, आईटीआई प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना हुई। कई एक्सप्रेस वे तेजी से बनाए जा रहे हैं। वहीं, एसपी स्वीटी सहरावत ने कहा कि ये मेरे लिए बेहद गौरव की बात है। मैं देश के सबसे पुराने जिलों में से एक पूर्णिया की एसपी हूं।
256 साल का हुआ पूर्णिया, शहर में उत्सव का माहौल:व्यंजन, विकास और कृषि मेला समेत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
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