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परिजनों ने निजी अस्पताल की रिपोर्ट छिपाई
राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में एचआईवी संक्रमित महिला का प्रसव कराने के मामले में सदर अस्पताल की बड़ी खामी उजागर हुई है। रिम्स ने जिस रिपोर्ट को देखकर बिना जांच किए महिला का प्रसव कराया, वह रिपोर्ट रांची सदर अस्पताल से सितंबर 2025 में जारी हुई थी। इसमें महिला को ‘नॉन-रिएक्टिव’ यानी एचआईवी निगेटिव बताया गया था। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि महिला तीन साल से एचआईवी पॉजिटिव थी और एआरटी के तहत उनका नियमित इलाज चल रहा था। बीएचटी रिकॉर्ड और बाद की जांच रिपोर्ट्स भी बताती है कि एक बार पॉजिटिव पाए गए मरीज का निगेटिव आना और फिर दोबारा पॉजिटिव आना संभव ही नहीं है। ऐसे में पूरी जांच प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा हो गया है। सदर अस्पताल में हो रही थी जांच, बिना बताए रिम्स ले गए : महिला के पति ने दैनिक भास्कर को बताया कि वह 30 मार्च को प|ी को लेकर सदर अस्पताल गया था। वहां डिलीवरी में दो-तीन दिन का समय बताया। तीन अप्रैल को दोबारा प|ी को लेकर सदर अस्पताल पहुंचा। वहां जांच के लिए खून के सैंपल लिए गए और इंतजार करने को कहा गया। लेकिन प्रसव पीड़ा हुई तो वह बिना सूचना दिए प|ी को लेकर रिम्स आ गया। वहां सदर अस्पताल के पुराने रिकॉर्ड को देखने के बाद डॉक्टरों ने उसे ऑपरेशन थियेटर में भेज दिया। प्रसव के कुछ घंटे बाद सदर अस्पताल में जांच रिपोर्ट आ गई। फिर डॉक्टरों ने रिम्स को फोन कर महिला के एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी दी। पूरे मामले की जांच होगी : सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह ने कहा कि एक बार अगर कोई एचआईवी संक्रमित हो जाए तो उसकी नॉन-रिएक्टिव रिपोर्ट आने का सवाल ही नहीं है। अगर इसके बाद भी सदर अस्पताल के लैब से संक्रमित को नॉन रिएक्टिव रिपोर्ट दी गई है तो यह गंभीर मामला है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। रिम्स आ गया। वहां सदर अस्पताल के पुराने रिकॉर्ड को देखने के बाद डॉक्टरों ने उसे ऑपरेशन थियेटर में भेज दिया। प्रसव के कुछ घंटे बाद सदर अस्पताल में जांच रिपोर्ट आ गई। फिर डॉक्टरों ने रिम्स को फोन कर महिला के एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी दी। सदर अस्पताल की लैब पर भी सवाल
रिम्स की स्त्री रोग विभाग की डॉक्टर के अनुसार, तीन साल से एचआईवी पॉजिटिव महिला का अचानक ‘नॉन-रिएक्टिव’ आना सामान्य चिकित्सा विज्ञान के विपरीत है। संदेह उठ रहा है कि कहीं टेस्ट किट एक्सपायर्ड तो नहीं थी, या लैब टेक्नीशियन द्वारा बिना सही जांच के रिपोर्ट तो तैयार नहीं कर दी गई थी? स्वास्थ्य विभाग को यह भी जांचना होगा कि उस दिन लैब में और कितने लोगों की जांच हुई थी और उनकी रिपोर्ट की गुणवत्ता क्या थी।
महिला के पति ने बताया कि निजी लैब की जांच में उनकी प|ी के एचआईवी पॉजिटिव होने की बात कही थी। चूंकि सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा था, इसलिए सरकारी रिपोर्ट लेकर गए। जिस रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि थी, उसे घर पर ही छोड़ दिया था। रिम्स को वहीं रिपोर्ट दिखाई, जिसमें महिला को नॉन-रिएक्टिव बताया गया था। हालांकि उन्होंने माना कि गलती हुई है। पूरी रिपोर्ट दिखानी चाहिए थी।

