3654 invalid votes spoiled the candidates’ calculations, lack of awareness proved costly.

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गुमला नगर परिषद का इस बार का चुनाव परिणामों से कहीं अधिक अमान्य मतों की वजह से चर्चा में है। चूंकि अध्यक्ष पद और 22 वार्ड पार्षदों के भाग्य का फैसला करने में मतदाताओं की एक बड़ी चूक भारी पड़ गई। इस चुनाव में कुल 3654 मतों को अमान्य घोषित किया गया, जो कई हारने वाले प्रत्याशियों के जीत के अंतर से भी कहीं अधिक है। अध्यक्ष पद के लिए 1925 मत अमान्य पाए गए। वहीं सभी 22 वार्डों को मिलाकर पार्षद पदों के लिए 1729 मत निरस्त किए गए। इतनी बड़ी संख्या में मतों का बेकार जाना यह दर्शाता है कि मतदान केंद्र के भीतर मतदाता प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे। मतगणना के दौरान यह देखा गया कि मतों के अमान्य होने के पीछे कई तकनीकी कारण थे। बड़ी संख्या में मतपत्र खाली छोड़ दिए गए थे। कई मतदाताओं ने निर्धारित बॉक्स के बजाय मतपत्र में गलत जगह मुहर लगा दी थी, तो कई मतपत्रों पर एक से अधिक प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगी मिली। नियमों के अनुसार, ऐसे सभी मतपत्रों को अमान्य घोषित कर दिया गया वार्डवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वार्ड संख्या 16 के मतदाताओं ने सबसे अधिक गलतियां कीं। जहां सर्वाधिक 162 मत अमान्य हुए। इसके विपरीत वार्ड संख्या 11 के मतदाता सबसे जागरूक रहे। यहां कम मात्र 29 मत निरस्त हुए। अन्य वार्डों की स्थिति इस प्रकार रही। वार्ड 4 (138), वार्ड 9 (134), वार्ड 2 (130) और वार्ड 13 (124) में भी अमान्य मतों की संख्या काफी अधिक रही। वार्ड 14 में 43, वार्ड 15 में 52, वार्ड 16 में 162, वार्ड 17 में 105, वार्ड 18 में 38, वार्ड 19 में 66, वार्ड 20 में 77, वार्ड 21 में 51 व वार्ड 22 में 77 मत प्रतिक्षेपित हुआ। वहीं अध्यक्ष पद में 1925 मत प्रतिक्षेपित हुआ।

निर्णायक साबित हो सकते थे ये वोट: लोगों का मानना है कि यदि ये 3654 मत सही तरीके से डाले जाते, तो न केवल हार-जीत का अंतर बदलता। बल्कि कई वार्डों में परिणाम पूरी तरह उलट सकते थे। विशेषकर उन वार्डों में जहां जीत का अंतर महज 10 से 50 वोटों का रहा। वहां अमान्य मतों ने उपविजेता प्रत्याशियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कुल मिलाकर, गुमला नगर परिषद के इन परिणामों ने निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन के मतदाता जागरूकता अभियानों की सीमाओं को उजागर किया है।

इनकी जीत ने सबको चौंकाया: शहरी क्षेत्र के वार्ड दो के प्रत्याशी केके मिश्रा अपने निकटतम प्रतिद्वंदी अशोक साहू से 920 मतों के अंतर से जीते। लगातार चौथी बार जीतने वाले मिश्रा को 1027, तो अशोक को महज 107 वोट मिलें। इसी प्रकार वार्ड 15 से चेंबर के उपाध्यक्ष बबलू वर्मा की मां उमा देवी विजेता बनीं। उमा को 661, तो रेनु साबू को 211 वोट मिलें। इस प्रकार उमा अपने निकटतम प्रतिद्वंदी से 450 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। जबकि वार्ड 20 के प्रत्याशी रमेश चीनी सबसे कम वोटों के अंतर से जीते। उन्होंने दो बार की पार्षद ललिता गुप्ता को चार मतों से हराया। रमेश को 452 और ललिता को 448 वोट िमले।

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