मोरहाबादी मैदान में पारंपरिक कला, शिल्प और संस्कृति का महाकुंभ ‘राजकीय हथकरघा एवं सरस मेला-2026’ शुरू हो गया है। झारक्राफ्ट, ग्रामीण विकास विभाग और वस्त्र मंत्रालय (भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मेले का औपचारिक उद्घाटन सोमवार को उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह द्वारा किया गया। यह मेला 7 मार्च से 20 मार्च, 2026 तक चलेगा, जिसमें देश भर के कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के लगभग 650 स्टॉल लगाए गए हैं। मेले का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को हटाकर कारीगरों को सीधे बाजार और ग्राहकों से जोड़ना है। प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो रहे हैं। सोमवार को खूंटी से आए दल ने मुंडारी गीत और नृत्य प्रस्तुत कर सबका दिल जीता। हस्तशिल्प व पारंपरिक खाद्य उत्पाद प्रदर्शित कश्मीर के पश्मीना उत्पाद, बनारस की प्रसिद्ध साड़ियां व गुजरात-राजस्थान की पारंपरिक कढ़ाई के साथ अफगानिस्तान के पारंपरिक शॉल मेले को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। स्टॉलों पर झारक्राफ्ट की सिल्क साड़ियां, डिजाइनर कुर्तियां, लेदर बैग, लाह की चूड़ियां और खादी के हर्बल प्रोडक्ट्स ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। JSLPS के माध्यम से 100 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तशिल्प व पारंपरिक खाद्य उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। उद्घाटन के अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्य के 11 जिलों को सम्मानित किया गया, जिनमें दुमका की ‘दीदी की दुकान’ और गुमला का ‘रागी मिशन’ प्रमुख हैं। इसके अलावा, बुनकरों को चेक और मशीनों का वितरण भी किया गया।
650 स्टॉलों पर दिखी मिनी इंडिया की झलक, रोज होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
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