मधुबनी जिले के भैरवस्थान थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में जिला अपर सत्र न्यायाधीश सात सह विशेष न्यायाधीश नीरज कुमार त्यागी के न्यायालय ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपी कमलेश मुखिया को 10 वर्ष के कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह घटना करीब चार वर्ष पूर्व हुई थी। आरोपी कमलेश मुखिया को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दोषी ठहराया गया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि यदि आरोपी जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक कुमारी मधुरानी ने आरोपी के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता लोकेश नाथ मिश्रा ने बहस करते हुए कम से कम सजा देने का अनुरोध किया था। विशेष लोक अभियोजक कुमारी मधुरानी ने शुक्रवार संध्या 5:00 बजे बताया कि आरोपी ने नाबालिग बच्ची को शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसी दौरान नाबालिग गर्भवती हो गई। जब पीड़िता ने शादी के लिए दबाव डाला, तो आरोपी ने उसे धोखे से झंझारपुर स्थित एक अस्पताल में ले जाकर गर्भपात करवा दिया। इसके बाद, जब पीड़िता के परिजनों ने आरोपी से शादी करने को कहा, तो उसने उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज की। इस घटना को लेकर पीड़िता ने झंझारपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। न्यायालय ने पीड़िता को हुई मानसिक पीड़ा और क्षतिपूर्ति के लिए 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि इस राशि का भुगतान जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को हुई सजा:मधुबनी कोर्ट ने 10 साल कैद और 5000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई
मधुबनी जिले के भैरवस्थान थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में जिला अपर सत्र न्यायाधीश सात सह विशेष न्यायाधीश नीरज कुमार त्यागी के न्यायालय ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपी कमलेश मुखिया को 10 वर्ष के कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह घटना करीब चार वर्ष पूर्व हुई थी। आरोपी कमलेश मुखिया को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दोषी ठहराया गया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि यदि आरोपी जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक कुमारी मधुरानी ने आरोपी के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता लोकेश नाथ मिश्रा ने बहस करते हुए कम से कम सजा देने का अनुरोध किया था। विशेष लोक अभियोजक कुमारी मधुरानी ने शुक्रवार संध्या 5:00 बजे बताया कि आरोपी ने नाबालिग बच्ची को शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसी दौरान नाबालिग गर्भवती हो गई। जब पीड़िता ने शादी के लिए दबाव डाला, तो आरोपी ने उसे धोखे से झंझारपुर स्थित एक अस्पताल में ले जाकर गर्भपात करवा दिया। इसके बाद, जब पीड़िता के परिजनों ने आरोपी से शादी करने को कहा, तो उसने उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज की। इस घटना को लेकर पीड़िता ने झंझारपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। न्यायालय ने पीड़िता को हुई मानसिक पीड़ा और क्षतिपूर्ति के लिए 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि इस राशि का भुगतान जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।

