भास्कर न्यूज | लातेहार जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस की हालत दयनीय है। जिले में उपलब्ध 14 एंबुलेंसों में तीन पूरी तरह खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी है, जबकि शेष 11 में भी अधिकांश वाहनों की स्थिति दयनीय है। हालात यह हैं कि जिले में केवल पांच एंबुलेंस ही ऐसी बची हैं जिनसे गंभीर मरीजों को रिम्स या अन्य बड़े अस्पतालों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। बाकी छह एंबुलेंसों का उपयोग केवल स्थानीय स्तर पर मरीजों को अस्पताल लाने-ले जाने के लिए किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कई एंबुलेंसों के टायर घिस चुके हैं, तो कई के गियर बॉक्स, ब्रेक और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जे खराब हैं। तकनीकी खामियों के बावजूद वाहनों का किसी तरह संचालन किया जा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। सदर अस्पताल की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यहां पांच 108 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से केवल एक एंबुलेंस ही रांची तक जाने योग्य है। बाकी चार एंबुलेंसों का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने पर अस्पताल की अन्य एंबुलेंस या निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है, जिससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। कई प्रखंडों में एंबुलेंस की भारी कमी : जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी एंबुलेंस की भारी कमी देखने को मिल रही है। महुआडांड़ में दो एंबुलेंस हैं, जिनमें से एक लगभग पांच लाख किलोमीटर चलने के बाद पूरी तरह खराब हो चुकी है। बरवाडीह, मनिका और गारू में एक-एक एंबुलेंस संचालित है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए मनिका की एक एंबुलेंस को चंदवा भेज दिया गया है। चंदवा में पहले से एक एंबुलेंस खराब पड़ी है, जबकि वर्तमान में दो एंबुलेंस सेवा में हैं। बालूमाथ में चार एंबुलेंस हैं, जिनमें दो रांची जाने योग्य हैं और दो स्थानीय सेवा में लगी हुई हैं। हेरहंज और बरियातू प्रखंड में फिलहाल एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि 108 नंबर पर कॉल करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती। कई बार कॉल रिस्पॉन्स में देरी होती है, जिससे दुर्घटना और गंभीर बीमारी के मामलों में मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। ^जिले में संचालित 14 में से तीन एंबुलेंस जर्जर अवस्था में है। जो रांची के मां अम्बे मोटर गैरेज में लगी है। 11 एम्बुलेंस चल रहे हैं। लेकिन पांच ही रांची भेजने लायक है। छह की स्थिति भी खराब है। जिसे इमरजेंसी केस में लोकल स्तर पर चलाया जा रहा है। ^ अमरोज अंसारी, एसीओ, लातेहार
जिले की 14 में तीन एंबुलेंस खराब, सिर्फ पांच ही मरीजों को पहुंचा सकती है रांची
भास्कर न्यूज | लातेहार जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस की हालत दयनीय है। जिले में उपलब्ध 14 एंबुलेंसों में तीन पूरी तरह खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी है, जबकि शेष 11 में भी अधिकांश वाहनों की स्थिति दयनीय है। हालात यह हैं कि जिले में केवल पांच एंबुलेंस ही ऐसी बची हैं जिनसे गंभीर मरीजों को रिम्स या अन्य बड़े अस्पतालों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। बाकी छह एंबुलेंसों का उपयोग केवल स्थानीय स्तर पर मरीजों को अस्पताल लाने-ले जाने के लिए किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कई एंबुलेंसों के टायर घिस चुके हैं, तो कई के गियर बॉक्स, ब्रेक और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जे खराब हैं। तकनीकी खामियों के बावजूद वाहनों का किसी तरह संचालन किया जा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। सदर अस्पताल की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यहां पांच 108 एंबुलेंस उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से केवल एक एंबुलेंस ही रांची तक जाने योग्य है। बाकी चार एंबुलेंसों का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने पर अस्पताल की अन्य एंबुलेंस या निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है, जिससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। कई प्रखंडों में एंबुलेंस की भारी कमी : जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी एंबुलेंस की भारी कमी देखने को मिल रही है। महुआडांड़ में दो एंबुलेंस हैं, जिनमें से एक लगभग पांच लाख किलोमीटर चलने के बाद पूरी तरह खराब हो चुकी है। बरवाडीह, मनिका और गारू में एक-एक एंबुलेंस संचालित है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए मनिका की एक एंबुलेंस को चंदवा भेज दिया गया है। चंदवा में पहले से एक एंबुलेंस खराब पड़ी है, जबकि वर्तमान में दो एंबुलेंस सेवा में हैं। बालूमाथ में चार एंबुलेंस हैं, जिनमें दो रांची जाने योग्य हैं और दो स्थानीय सेवा में लगी हुई हैं। हेरहंज और बरियातू प्रखंड में फिलहाल एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि 108 नंबर पर कॉल करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती। कई बार कॉल रिस्पॉन्स में देरी होती है, जिससे दुर्घटना और गंभीर बीमारी के मामलों में मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। ^जिले में संचालित 14 में से तीन एंबुलेंस जर्जर अवस्था में है। जो रांची के मां अम्बे मोटर गैरेज में लगी है। 11 एम्बुलेंस चल रहे हैं। लेकिन पांच ही रांची भेजने लायक है। छह की स्थिति भी खराब है। जिसे इमरजेंसी केस में लोकल स्तर पर चलाया जा रहा है। ^ अमरोज अंसारी, एसीओ, लातेहार
