“विकसित भारत-समृद्ध बिहार” के संकल्प के साथ राज्यभर में आयोजित सहयोग-सह-जन कल्याण शिविरों के दूसरे दिन भी कई प्रखंडों से सरकारी दावों की पोल खोलने वाली तस्वीरें सामने आईं। कहीं अधिकारी पूरे दिन आवेदकों का इंतजार करते रहे लेकिन ग्रामीण नहीं पहुंचे, तो कहीं फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे लेकिन संबंधित अधिकारी और कर्मचारी ही गायब मिले। कई जगहों पर प्रचार-प्रसार की कमी, खाली स्टॉल, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि कुछ प्रखंडों में लोगों ने बड़ी संख्या में आवेदन देकर समस्याओं के समाधान की उम्मीद भी जताई। लेकिन कुल मिलाकर दूसरे दिन भी शिविरों की व्यवस्था कई सवाल छोड़ गई। शंकरपुर में खाली रहीं सैकड़ों कुर्सियां, अधिकारी करते रहे इंतजार मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित पीएचसी परिसर में आयोजित शिविर का दूसरा दिन भी फीका रहा। सैकड़ों कुर्सियां खाली पड़ी रहीं और विभिन्न विभागों के काउंटरों पर अधिकारी एवं कर्मचारी आवेदकों का इंतजार करते दिखाई दिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिविर का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, जिसके कारण लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं मिल सकी। बीडीओ तेज प्रताप त्यागी ने कम उपस्थिति की बात स्वीकार करते हुए कहा कि अंतिम दिन ग्रामीणों को जोड़ने के लिए माइकिंग और प्रचार अभियान तेज किया गया है। मंसूरचक में जनप्रतिनिधियों ने बनाई दूरी, कर्मचारी रहे भूखे-प्यासे बेगूसराय जिले के मंसूरचक प्रखंड परिसर में आयोजित शिविर में कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन आम जनता और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति ने कार्यक्रम की तस्वीर बदल दी। प्रखंड प्रमुख, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधि शिविर से दूर रहे। वहीं कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सुबह से उन्हें न तो पानी मिला और न ही नाश्ते की कोई व्यवस्था की गई। कांग्रेस नेता रामकुमार चौधरी ने इसे “अधिकारियों का मनोरंजन शिविर” करार देते हुए कहा कि जनता के बिना ऐसा आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह गया। नारायणपुर में फरियादी पहुंचे, लेकिन खाली मिले विभागीय स्टॉल भागलपुर जिले के नारायणपुर प्रखंड में स्थिति बिल्कुल उलट रही। यहां बड़ी संख्या में लोग पेंशन, राशन और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे, लेकिन कई विभागों के स्टॉल खाली मिले। भीषण गर्मी के बीच घंटों इंतजार करने के बाद कई फरियादी बिना काम कराए लौट गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण सहयोग शिविर अपने उद्देश्य से भटक गया है। लोगों का कहना था कि यदि विभागीय कर्मी मौजूद ही नहीं रहेंगे तो शिविर लगाने का क्या औचित्य है। बोचहां में दोपहर होते ही गायब मिले अधिकारी-कर्मी मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड मुख्यालय में दूसरे दिन दोपहर बाद अधिकांश विभागों के पदाधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। शिविर स्थल पर फरियादियों की जगह खाली टेबल-कुर्सियां दिखाई दीं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई लोग आवेदन लेकर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों को नहीं पाकर वापस लौट गए। कुछ महिलाओं ने इसे “सिर्फ दिखावा” करार दिया। हालांकि राजस्व मामलों के निस्तारण के लिए अंचलाधिकारी अपने कार्यालय में मौजूद रहे और भूमि विवाद संबंधी शिकायतों का निष्पादन करते रहे। बिहारीगंज में दो दिनों में केवल 67 आवेदन मधेपुरा के बिहारीगंज प्रखंड परिसर में आयोजित तीन दिवसीय सहयोग सह जनकल्याण शिविर के दूसरे दिन बुधवार को विभिन्न विभागों से संबंधित 34 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 10 मामलों का मौके पर ही निष्पादन किया गया। वहीं पहले दिन मंगलवार को 33 आवेदन मिले थे, जिनमें 9 मामलों का निपटारा किया गया था। इस प्रकार, दो दिनों में कुल 67 आवेदन प्राप्त हुए और 19 मामलों का मौके पर समाधान किया जा चुका है। कई प्रखंडों में सहयोग शिविर का लोगों ने लिया लाभ जहां एक ओर राज्य के कई प्रखंडों में सहयोग-सह-जन कल्याण शिविरों की अव्यवस्थाएं चर्चा में रहीं, वहीं कई जिलों से सकारात्मक तस्वीरें भी सामने आईं। दूसरे दिन कई प्रखंडों में बड़ी संख्या में लोगों ने शिविरों का लाभ उठाया और मौके पर ही सैकड़ों मामलों का निपटारा किया गया। सुपौल सदर अंचल ने सहयोग शिविर के निष्पादन में जिले में प्रथम स्थान पर रहा। अंचल के सभी 17 पंचायतों में आयोजित शिविरों में कुल 372 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 331 मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। 89 प्रतिशत निष्पादन दर के साथ सदर अंचल पूरे जिले में अव्वल रहा। वहीं नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड में आयोजित जन कल्याण शिविर में कुल 318 मामलों का मौके पर ही निपटारा किया गया। समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर प्रखंड में आयोजित महाशिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित 221 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 159 मामलों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को अग्रसारित किया गया। मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड में आयोजित सहयोग-सह-जन कल्याण शिविर में दूसरे दिन 31 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 19 मामलों का तत्काल निष्पादन किया गया। दोपहर में आई तेज आंधी और बारिश से पंडाल क्षतिग्रस्त हो गया और करीब दो घंटे तक काम प्रभावित रहा। हालांकि मौसम सामान्य होने के बाद अधिकारियों ने फिर से कार्य शुरू कर लोगों की समस्याएं सुनीं। वही सिकटी में त्रि-दिवसीय ‘सहयोग-सह-जनकल्याण शिविर’ के दूसरे दिन कुल 29 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 20 मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। 18 तारीख को जनकल्याण शिविर का होगा समापन आपको बता दें कि बिहार के 39 जिलों के 534 ब्लॉक में 16 तारीख से तीन दिवसीय सहयोग सह जनकल्याण शिविर की शुरूआत की गई थी। इसके दो दिन बीत चुके हैं और कुल मिलाकर सहयोग-सह-जन कल्याण शिविरों में दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। एक ओर कई प्रखंडों में खाली कुर्सियां, नदारद अधिकारी, खाली स्टॉल और अव्यवस्थाएं सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती रहीं, तो दूसरी ओर कुछ स्थानों पर सैकड़ों आवेदनों का मौके पर निष्पादन कर लोगों को राहत भी मिली हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि इस महत्वाकांक्षी अभियान की सफलता केवल शिविर लगाने से नहीं, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही, जनभागीदारी और शिकायतों के वास्तविक समाधान से तय होगी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि तीसरे और अंतिम दिन प्रशासन कमियों को दूर कर इन शिविरों को जनसमस्याओं के समाधान का प्रभावी मंच बना पाता है या यह पहल केवल औपचारिकताओं तक ही सीमित रहेगी।
जनता खोजती रही समाधान, अधिकारी ढूंढते रहे आवेदक:जानिए कैसा रहा सहयोग सह जनकल्याण शिविरों के दूसरे दिन का हाल, सुपौल सदर में 89% मामले निपटाए गए
“विकसित भारत-समृद्ध बिहार” के संकल्प के साथ राज्यभर में आयोजित सहयोग-सह-जन कल्याण शिविरों के दूसरे दिन भी कई प्रखंडों से सरकारी दावों की पोल खोलने वाली तस्वीरें सामने आईं। कहीं अधिकारी पूरे दिन आवेदकों का इंतजार करते रहे लेकिन ग्रामीण नहीं पहुंचे, तो कहीं फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे लेकिन संबंधित अधिकारी और कर्मचारी ही गायब मिले। कई जगहों पर प्रचार-प्रसार की कमी, खाली स्टॉल, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि कुछ प्रखंडों में लोगों ने बड़ी संख्या में आवेदन देकर समस्याओं के समाधान की उम्मीद भी जताई। लेकिन कुल मिलाकर दूसरे दिन भी शिविरों की व्यवस्था कई सवाल छोड़ गई। शंकरपुर में खाली रहीं सैकड़ों कुर्सियां, अधिकारी करते रहे इंतजार मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित पीएचसी परिसर में आयोजित शिविर का दूसरा दिन भी फीका रहा। सैकड़ों कुर्सियां खाली पड़ी रहीं और विभिन्न विभागों के काउंटरों पर अधिकारी एवं कर्मचारी आवेदकों का इंतजार करते दिखाई दिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिविर का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, जिसके कारण लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं मिल सकी। बीडीओ तेज प्रताप त्यागी ने कम उपस्थिति की बात स्वीकार करते हुए कहा कि अंतिम दिन ग्रामीणों को जोड़ने के लिए माइकिंग और प्रचार अभियान तेज किया गया है। मंसूरचक में जनप्रतिनिधियों ने बनाई दूरी, कर्मचारी रहे भूखे-प्यासे बेगूसराय जिले के मंसूरचक प्रखंड परिसर में आयोजित शिविर में कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन आम जनता और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति ने कार्यक्रम की तस्वीर बदल दी। प्रखंड प्रमुख, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधि शिविर से दूर रहे। वहीं कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सुबह से उन्हें न तो पानी मिला और न ही नाश्ते की कोई व्यवस्था की गई। कांग्रेस नेता रामकुमार चौधरी ने इसे “अधिकारियों का मनोरंजन शिविर” करार देते हुए कहा कि जनता के बिना ऐसा आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह गया। नारायणपुर में फरियादी पहुंचे, लेकिन खाली मिले विभागीय स्टॉल भागलपुर जिले के नारायणपुर प्रखंड में स्थिति बिल्कुल उलट रही। यहां बड़ी संख्या में लोग पेंशन, राशन और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे, लेकिन कई विभागों के स्टॉल खाली मिले। भीषण गर्मी के बीच घंटों इंतजार करने के बाद कई फरियादी बिना काम कराए लौट गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण सहयोग शिविर अपने उद्देश्य से भटक गया है। लोगों का कहना था कि यदि विभागीय कर्मी मौजूद ही नहीं रहेंगे तो शिविर लगाने का क्या औचित्य है। बोचहां में दोपहर होते ही गायब मिले अधिकारी-कर्मी मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड मुख्यालय में दूसरे दिन दोपहर बाद अधिकांश विभागों के पदाधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। शिविर स्थल पर फरियादियों की जगह खाली टेबल-कुर्सियां दिखाई दीं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई लोग आवेदन लेकर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों को नहीं पाकर वापस लौट गए। कुछ महिलाओं ने इसे “सिर्फ दिखावा” करार दिया। हालांकि राजस्व मामलों के निस्तारण के लिए अंचलाधिकारी अपने कार्यालय में मौजूद रहे और भूमि विवाद संबंधी शिकायतों का निष्पादन करते रहे। बिहारीगंज में दो दिनों में केवल 67 आवेदन मधेपुरा के बिहारीगंज प्रखंड परिसर में आयोजित तीन दिवसीय सहयोग सह जनकल्याण शिविर के दूसरे दिन बुधवार को विभिन्न विभागों से संबंधित 34 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 10 मामलों का मौके पर ही निष्पादन किया गया। वहीं पहले दिन मंगलवार को 33 आवेदन मिले थे, जिनमें 9 मामलों का निपटारा किया गया था। इस प्रकार, दो दिनों में कुल 67 आवेदन प्राप्त हुए और 19 मामलों का मौके पर समाधान किया जा चुका है। कई प्रखंडों में सहयोग शिविर का लोगों ने लिया लाभ जहां एक ओर राज्य के कई प्रखंडों में सहयोग-सह-जन कल्याण शिविरों की अव्यवस्थाएं चर्चा में रहीं, वहीं कई जिलों से सकारात्मक तस्वीरें भी सामने आईं। दूसरे दिन कई प्रखंडों में बड़ी संख्या में लोगों ने शिविरों का लाभ उठाया और मौके पर ही सैकड़ों मामलों का निपटारा किया गया। सुपौल सदर अंचल ने सहयोग शिविर के निष्पादन में जिले में प्रथम स्थान पर रहा। अंचल के सभी 17 पंचायतों में आयोजित शिविरों में कुल 372 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 331 मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। 89 प्रतिशत निष्पादन दर के साथ सदर अंचल पूरे जिले में अव्वल रहा। वहीं नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड में आयोजित जन कल्याण शिविर में कुल 318 मामलों का मौके पर ही निपटारा किया गया। समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर प्रखंड में आयोजित महाशिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित 221 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 159 मामलों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को अग्रसारित किया गया। मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड में आयोजित सहयोग-सह-जन कल्याण शिविर में दूसरे दिन 31 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 19 मामलों का तत्काल निष्पादन किया गया। दोपहर में आई तेज आंधी और बारिश से पंडाल क्षतिग्रस्त हो गया और करीब दो घंटे तक काम प्रभावित रहा। हालांकि मौसम सामान्य होने के बाद अधिकारियों ने फिर से कार्य शुरू कर लोगों की समस्याएं सुनीं। वही सिकटी में त्रि-दिवसीय ‘सहयोग-सह-जनकल्याण शिविर’ के दूसरे दिन कुल 29 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 20 मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। 18 तारीख को जनकल्याण शिविर का होगा समापन आपको बता दें कि बिहार के 39 जिलों के 534 ब्लॉक में 16 तारीख से तीन दिवसीय सहयोग सह जनकल्याण शिविर की शुरूआत की गई थी। इसके दो दिन बीत चुके हैं और कुल मिलाकर सहयोग-सह-जन कल्याण शिविरों में दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। एक ओर कई प्रखंडों में खाली कुर्सियां, नदारद अधिकारी, खाली स्टॉल और अव्यवस्थाएं सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती रहीं, तो दूसरी ओर कुछ स्थानों पर सैकड़ों आवेदनों का मौके पर निष्पादन कर लोगों को राहत भी मिली हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि इस महत्वाकांक्षी अभियान की सफलता केवल शिविर लगाने से नहीं, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही, जनभागीदारी और शिकायतों के वास्तविक समाधान से तय होगी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि तीसरे और अंतिम दिन प्रशासन कमियों को दूर कर इन शिविरों को जनसमस्याओं के समाधान का प्रभावी मंच बना पाता है या यह पहल केवल औपचारिकताओं तक ही सीमित रहेगी।

