पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड स्थित दोरवा मठिया गांव में दस दिवसीय रामचरितमानस नवाह यज्ञ और अखंड कीर्तन का आयोजन जारी है। श्री श्री 1008 श्री फलाहारी खड़ेश्वरी एवं सुदर्शनाचार्य स्वामी जी महाराज के तत्वावधान में यह धार्मिक अनुष्ठान भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो रहा है। महायज्ञ के तीसरे दिन शुक्रवार को वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चारण के साथ जलाधिवास कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान यज्ञ मंडप और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में भक्तों ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर आचार्य दीक्षित जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि यज्ञ मानव जीवन के कल्याण का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने बताया कि “यज्ञ जैसा कोई संत नहीं और यज्ञ जैसा कोई मित्र नहीं होता।” उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। श्री श्री 1008 श्री फलाहारी खड़ेश्वरी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा और समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के लिए ऐसे धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है। उन्होंने जोर दिया कि यज्ञ, भजन और सत्संग से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है, जिससे समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव का वातावरण बनता है। आयोजन मंडली के सदस्य गुड्डू कुमार ने बताया कि महायज्ञ के आठवें दिन, 24 जून को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां देवी की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दूर-दराज से संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर परिसर में देवी माता के दरबार के लिए 55 किलोग्राम वजन का एक विशाल घंटा भी स्थापित किया गया है, जो मंदिर की भव्यता को बढ़ा रहा है। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल है।
दुल्हिन बाजार के दोरवा मठिया में दस दिवसीय महायज्ञ जारी:24 जून को मां देवी की प्राण-प्रतिष्ठा, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड स्थित दोरवा मठिया गांव में दस दिवसीय रामचरितमानस नवाह यज्ञ और अखंड कीर्तन का आयोजन जारी है। श्री श्री 1008 श्री फलाहारी खड़ेश्वरी एवं सुदर्शनाचार्य स्वामी जी महाराज के तत्वावधान में यह धार्मिक अनुष्ठान भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो रहा है। महायज्ञ के तीसरे दिन शुक्रवार को वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चारण के साथ जलाधिवास कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान यज्ञ मंडप और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में भक्तों ने इस कार्यक्रम में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर आचार्य दीक्षित जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि यज्ञ मानव जीवन के कल्याण का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने बताया कि “यज्ञ जैसा कोई संत नहीं और यज्ञ जैसा कोई मित्र नहीं होता।” उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। श्री श्री 1008 श्री फलाहारी खड़ेश्वरी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा और समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के लिए ऐसे धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है। उन्होंने जोर दिया कि यज्ञ, भजन और सत्संग से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है, जिससे समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव का वातावरण बनता है। आयोजन मंडली के सदस्य गुड्डू कुमार ने बताया कि महायज्ञ के आठवें दिन, 24 जून को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां देवी की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दूर-दराज से संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर परिसर में देवी माता के दरबार के लिए 55 किलोग्राम वजन का एक विशाल घंटा भी स्थापित किया गया है, जो मंदिर की भव्यता को बढ़ा रहा है। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल है।

