जहानाबाद के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिजनों ने राज्य सरकार द्वारा दी गई 21 लाख रुपये की सहायता राशि को लेकर अपना रुख बदल लिया है। हाल ही में लेफ्टिनेंट शुभम कुमार विमान हादसे में शहीद हो गए थे। हुलासगंज प्रखंड के बनवरिया गांव निवासी शुभम के पिता और भाई ने अब श्रेया राय को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया है। सहायता राशि को लेकर था शुरुआती विवाद दो दिन पहले, शुभम के पिता ने हुलासगंज के अंचलाधिकारी (सीओ) और श्रेया राय पर उन्हें गुमराह कर सहायता राशि लेने का आरोप लगाया था। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा श्रेया राय को 21 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दिए जाने पर आपत्ति जताई थी। शहीद लेफ्टिनेंट के पिता ने कहा सहायता राशि उनके लिए मायने नहीं रखती। उनके अनुसार, श्रेया राय उनके शहीद बेटे की अंतिम निशानी हैं। पिता ने बताया कि उन्हें शुभम की कोर्ट मैरिज की जानकारी पहले नहीं थी, जिसके कारण सहायता राशि श्रेया राय को मिलने पर उन्होंने सवाल उठाया था। उन्होंने आगे बताया कि श्रेया से बातचीत के बाद उन्हें स्थिति की पूरी जानकारी मिली। परिवार को एहसास हुआ कि श्रेया उनके बेटे के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। शुभम की शादी नवंबर में आजमगढ़ निवासी श्रेया राय के साथ तय थी, लेकिन असम के जोरहाट में विमान हादसे में उनका निधन हो गया था। शुभम के पिता ने कहा कि अब वे अपनी बहू के घर आने का इंतजार कर रहे हैं और उसे पूरे सम्मान के साथ परिवार का हिस्सा बनाना चाहते हैं।
शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिवार ने बदला बयान:21 लाख सहायता विवाद के बाद श्रेया राय को बहू मानने का फैसला, पिता बोले- अब वह हमारे बेटे की अंतिम निशानी हैं
जहानाबाद के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिजनों ने राज्य सरकार द्वारा दी गई 21 लाख रुपये की सहायता राशि को लेकर अपना रुख बदल लिया है। हाल ही में लेफ्टिनेंट शुभम कुमार विमान हादसे में शहीद हो गए थे। हुलासगंज प्रखंड के बनवरिया गांव निवासी शुभम के पिता और भाई ने अब श्रेया राय को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया है। सहायता राशि को लेकर था शुरुआती विवाद दो दिन पहले, शुभम के पिता ने हुलासगंज के अंचलाधिकारी (सीओ) और श्रेया राय पर उन्हें गुमराह कर सहायता राशि लेने का आरोप लगाया था। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा श्रेया राय को 21 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दिए जाने पर आपत्ति जताई थी। शहीद लेफ्टिनेंट के पिता ने कहा सहायता राशि उनके लिए मायने नहीं रखती। उनके अनुसार, श्रेया राय उनके शहीद बेटे की अंतिम निशानी हैं। पिता ने बताया कि उन्हें शुभम की कोर्ट मैरिज की जानकारी पहले नहीं थी, जिसके कारण सहायता राशि श्रेया राय को मिलने पर उन्होंने सवाल उठाया था। उन्होंने आगे बताया कि श्रेया से बातचीत के बाद उन्हें स्थिति की पूरी जानकारी मिली। परिवार को एहसास हुआ कि श्रेया उनके बेटे के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। शुभम की शादी नवंबर में आजमगढ़ निवासी श्रेया राय के साथ तय थी, लेकिन असम के जोरहाट में विमान हादसे में उनका निधन हो गया था। शुभम के पिता ने कहा कि अब वे अपनी बहू के घर आने का इंतजार कर रहे हैं और उसे पूरे सम्मान के साथ परिवार का हिस्सा बनाना चाहते हैं।
