बिहार सरकार ने 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सूबे के चिह्नित 24 हजार 471 बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार प्रशिक्षण देने के लिए विशेष केंद्र खोले जाएंगे, जिनमें अकेले नालंदा जिले के 311 और शेखपुरा के 640 बच्चे शामिल हैं। शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार के अनुसार, इन सभी बच्चों को उम्र सापेक्ष प्रशिक्षण देने के बाद नजदीकी स्कूलों से जोड़ दिया जाएगा। ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आगामी 10 जुलाई तक हर हाल में विशेष केंद्र चालू करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है, जहां छह से नौ महीने के भीतर बच्चों को नई और रोचक विधियों से उनकी उम्र के अनुसार कक्षा के स्तर तक लाया जाएगा। मैपिंग का काम 30 जून को पूरा करना होगा नालंदा के डीईओ आनंद विजय ने बताया कि इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए विद्यालय से बाहर के बच्चों के उपलब्ध आंकड़ों का सत्यापन कर उसे प्रबंध पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। बच्चों की संख्या के आधार पर केंद्रों की मैपिंग का कार्य 30 जून तक हर हाल में पूरा कर लिया जाना है। इसके बाद प्रत्येक केंद्र के लिए एक नोडल शिक्षक का चयन होगा, जिन्हें कम समय में बच्चों को उम्र के अनुसार दक्ष बनाने के लिए एक से छह जुलाई तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिन स्थानों पर ये केंद्र खुलेंगे, वहां केंद्र का नाम, नामांकित शिक्षक का नाम, संचालन की अवधि और बच्चों की सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। केंद्र शुरू होने से तीन दिन पहले बच्चों की दक्षता का बेसलाइन सर्वे होगा और उनके शैक्षणिक स्तर की प्रोफाइल केंद्र खुलने के सात दिनों के भीतर तैयार कर ली जाएगी। इसके साथ ही, यदि संबंधित क्षेत्र में इस श्रेणी का कोई अन्य बच्चा मिलता है, तो उसे भी इस केंद्र में शामिल कर लाभ दिया जाएगा। समस्तीपुर में सबसे अधिक बच्चे बिहार के विभिन्न जिलों में स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में काफी अंतर है। सूबे में सबसे अधिक समस्तीपुर में 1560, कटिहार में 1454, जहानाबाद में 1296, सारण में 1279, पटना में 1275, वैशाली में 1083, सुपौल में 1082 और सीतामढ़ी में 1281 बच्चे स्कूल से बाहर हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर में सबसे कम 68, पूर्णिया में 70 और पूर्वी चंपारण में केवल 74 बच्चे इस श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर बात की जाए तो पूरे देश में ऐसे बच्चों की संख्या 11 लाख 70 हजार 182 है, जिसमें सबसे बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश की है, जहां सर्वाधिक 7 लाख 73 हजार 835 बच्चे स्कूल से बाहर हैं। इसके विपरीत, देश में केरल, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप जैसे राज्य व केंद्र शासित प्रदेश भी हैं, जहां का एक भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं है।
बिहार में शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ेंगे 24 हजार बच्चे:नालंदा में 311 बच्चों के लिए विशेष सेंटर, 30 जून तक मैपिंग का कार्य पूरा करने के निर्देश
बिहार सरकार ने 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सूबे के चिह्नित 24 हजार 471 बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार प्रशिक्षण देने के लिए विशेष केंद्र खोले जाएंगे, जिनमें अकेले नालंदा जिले के 311 और शेखपुरा के 640 बच्चे शामिल हैं। शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार के अनुसार, इन सभी बच्चों को उम्र सापेक्ष प्रशिक्षण देने के बाद नजदीकी स्कूलों से जोड़ दिया जाएगा। ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आगामी 10 जुलाई तक हर हाल में विशेष केंद्र चालू करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है, जहां छह से नौ महीने के भीतर बच्चों को नई और रोचक विधियों से उनकी उम्र के अनुसार कक्षा के स्तर तक लाया जाएगा। मैपिंग का काम 30 जून को पूरा करना होगा नालंदा के डीईओ आनंद विजय ने बताया कि इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए विद्यालय से बाहर के बच्चों के उपलब्ध आंकड़ों का सत्यापन कर उसे प्रबंध पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। बच्चों की संख्या के आधार पर केंद्रों की मैपिंग का कार्य 30 जून तक हर हाल में पूरा कर लिया जाना है। इसके बाद प्रत्येक केंद्र के लिए एक नोडल शिक्षक का चयन होगा, जिन्हें कम समय में बच्चों को उम्र के अनुसार दक्ष बनाने के लिए एक से छह जुलाई तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिन स्थानों पर ये केंद्र खुलेंगे, वहां केंद्र का नाम, नामांकित शिक्षक का नाम, संचालन की अवधि और बच्चों की सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। केंद्र शुरू होने से तीन दिन पहले बच्चों की दक्षता का बेसलाइन सर्वे होगा और उनके शैक्षणिक स्तर की प्रोफाइल केंद्र खुलने के सात दिनों के भीतर तैयार कर ली जाएगी। इसके साथ ही, यदि संबंधित क्षेत्र में इस श्रेणी का कोई अन्य बच्चा मिलता है, तो उसे भी इस केंद्र में शामिल कर लाभ दिया जाएगा। समस्तीपुर में सबसे अधिक बच्चे बिहार के विभिन्न जिलों में स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में काफी अंतर है। सूबे में सबसे अधिक समस्तीपुर में 1560, कटिहार में 1454, जहानाबाद में 1296, सारण में 1279, पटना में 1275, वैशाली में 1083, सुपौल में 1082 और सीतामढ़ी में 1281 बच्चे स्कूल से बाहर हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर में सबसे कम 68, पूर्णिया में 70 और पूर्वी चंपारण में केवल 74 बच्चे इस श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर बात की जाए तो पूरे देश में ऐसे बच्चों की संख्या 11 लाख 70 हजार 182 है, जिसमें सबसे बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश की है, जहां सर्वाधिक 7 लाख 73 हजार 835 बच्चे स्कूल से बाहर हैं। इसके विपरीत, देश में केरल, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप जैसे राज्य व केंद्र शासित प्रदेश भी हैं, जहां का एक भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं है।

