Monday, June 22, 2026

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झारखंड में 3 महीने बंद रहेगा इको-टूरिज्म:1 जुलाई से जंगल पर्यटन पर रोक, वन्यजीव सुरक्षा, संरक्षण और पौधरोपण पर फोकस


झारखंड के वन क्षेत्रों में मानसून के दौरान तीन महीने तक सन्नाटा पसरा रहेगा। वन एवं पर्यावरण विभाग ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नए लगाए जाने वाले पौधों को बेहतर वातावरण देना है। इस अवधि में पर्यटन, जंगल सफारी, सड़क निर्माण, बिजली टावर लगाने जैसे सभी कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे। पलामू टाइगर रिजर्व और दलमा समेत सभी प्रमुख वन क्षेत्रों में यह नियम सख्ती से लागू किया जाएगा। विभाग का मानना है कि बारिश के समय मानव गतिविधियों में कमी से वन्यजीवों को प्राकृतिक रूप से विचरण करने का अवसर मिलता है और नए पौधों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इको टूरिज्म से जुड़ी कुछ तस्वीरें देखें…. 10 लाख पौधे लगाने का टारगेट, जल संचयन पर जोर मानसून के इन तीन महीनों में राज्य भर में दस लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना तैयार की गई है। विभाग ने इसके लिए विशेष रणनीति बनाई है। जिसमें कच्ची संरचनाओं के जरिए पानी का संचयन प्रमुख भूमिका निभाएगा। पलामू क्षेत्र में जून तक औसत से कम बारिश होने के कारण पौधों की सिंचाई एक चुनौती बन गई है। ऐसे में टैंकर और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। कृषि वानिकी विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई से सितंबर के बीच अधिक बारिश होती है। लेकिन जून में लगाए गए पौधों को बचाने के लिए अतिरिक्त प्रयास जरूरी हैं। यही कारण है कि इस बार पौधरोपण के साथ-साथ संरक्षण पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। मानसून के बाद इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा वन विभाग मानसून के बाद पर्यटन गतिविधियों को नए स्वरूप में शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इको टूरिज्म का दायरा बढ़ाने के साथ जंगल सफारी के लिए बैट्री चालित वाहनों की संख्या 25 तक करने की योजना है। इसके अलावा वन क्षेत्रों में स्थित आवासीय परिसरों में सोलर आधारित बिजली व्यवस्था लागू की जाएगी। पलामू टाइगर रिजर्व और लातेहार में प्रस्तावित सफारी परियोजनाओं को भी मानसून के बाद तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को संतुलित तरीके से विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिले और जंगल का प्राकृतिक संतुलन भी बना रहे।

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