‘मेरे बेटे ललन, मनीष और रजनीश बहुत अच्छे थे। रजनीश को बैंक में नौकरी नहीं मिली तो रजनीश उदास हो गया था। इसके बाद ललन ने भाइयों के साथ अपराध की दुनिया में जाने का फैसला लिया और ब्रदर्स गैंग शुरू किया। रजनीश टीचर भी था, उसकी मैथ अच्छी थी। कोचिंग खोली थी, पर नौकरी नहीं मिली तो ललन के कहने पर बंद कर दिया।’ ये बातें यूपी के सहारनपुर में एनकाउंटर में मारे गए ललन के पिता शिवशंकर ने कही हैं। वे कहते हैं कि मनीष-रजनीश तो एनकाउंटर में पहले ही मारे गए। जब ललन मारा गया तो मुझे जानकारी नहीं थी। थाने से कुछ लोग आए, उन्होंने सूचना दी। हमें अब कोई देखने नहीं आता। हमारा जीवन भगवान भरोसे है। बेटों के एनकाउंटर के बाद दिव्यांग मां-पिता के कैसे हालात हैं? उनकी जिंदगी किस तरह कट रही है? इनके बेटे अपराध के दलदल में कैसे फंसते चले गए? पढ़िए रिपोर्ट… पहले देखें लाचार माता-पिता और घर की तस्वीरें… लाचार पिता के 5 में से 2 बेटों का एनकाउंटर 4 साल पहले हुआ था एनकाउंटर में ढेर ललन के पिता शिवशंकर समस्तीपुर के मोहिउद्ददीन नगर थाने के आनंदगोलवा गांव में रहते हैं। पहले वे किसानी का काम करते थे। उनके 5 बेटे ललन, मनीष, रजनीश, बबुआ सिंह और पत्थरु सिंह है। इनमें सबसे बड़ा बबुआ, उसके बाद पत्थरु, फिर ललन है। ललन से छोटा मनीष और सबसे छोटा भाई रजनीश। मनीष और रजनीश का एनकाउंटर 2022 में यूपी के वाराणसी में हुआ था। ललन रविवार रात यूपी के सराहनपुर में मारा गया। वहीं, बबुआ अभी हत्या-लूट मामले में हाजीपुर जेल में बंद है। इसके अलावा पत्थरु परिवार के साथ पंजाब में रहता है। वहां वह निजी कंपनी में काम करता है। बाकी 3 बहनों की शादी हो चुकी है। सत्तू-चूड़ा खाकर रह रहे दिव्यांग शिवशंकर और उनकी पत्नी रेशमी देवी दिव्यांग हैं। शिवशंकर को वृद्धा पेंशन मिलती है। उसी पैसे से गुजारा करते हैं। शिवशंकर बताते हैं कि चूड़ा-सत्तू खाकर रहना पड़ता है। कोई हमारी मदद नहीं करता है। समाज के लोग हमसे बात नहीं करते हैं। हम दोनों पति-पत्नी आपस में एक-दूसरे का सहारा हैं। सालों हो गए न बेटा हमें देखने आया और ना ही बेटियां देखने आई हैं। समाज के लोग नफरत करते हैं शिवशंकर बताते हैं कि हमारे बेटों की वजह से गांव-समाज के लोग हमसे नफरत करते हैं। हमें कोई पानी देने वाला भी नहीं है। गांव का खेत बटाई पर दे रखा है। वहां से भी थोड़े पैसे आ जाते हैं। घर को पता नहीं किसकी हाई लग गई है। कभी बीमार हो जाते हैं को तकलीफ और ज्यादा बढ़ जाती है। किसी तरह हम दोनों खुद का ध्यान रखते हैं। कई बार कोई दवा तक देने वाला नहीं रहता। ललन ने 10 साल पहले की थी लव मैरिज आसपास के ग्रामीण बताते हैं ललन ने 10 साल पहले लव मैरिज की थी। वह अपराध की दुनिया में आया तो उसकी पत्नी अपने मायके पटना के बाढ़ चली गई। ललन की एक बेटी और एक बेटा है। बाकी भाइयों की शादी नहीं हुई। शिवशंकर बताते हैं कि सबसे छोटा भाई रजनीश अपनी कोचिंग से अच्छी कमाई कर रहा था। उसी पैसे उसने घर भी बनाया था। रजनीश का सपना था कि बैंक में काम करे। अब जानिए तीनों भाइयों कैसे कमाए लाखों रुपए, कैसे बढ़ती गई उनकी लालच… पहले देखें ललन के एनकाउंटर की कुछ तस्वीरें… पुलिस वालों को मारकर उनका हथियार लूटते रहे गांव के लोग बताते हैं कि इन भाइयों ने जब गैंग शुरू किया था तब इनके पास हथियार नहीं थे और न इतने पैसे थे कि हथियार खरीद सके। इसी दौरान ललन के ससुराल के एक व्यक्ति ने एक कट्टा खरीदवाया। 2016 के मार्च में नालंदा में तीनों भाइयों ने पहला मर्डर किया। जमादार का मर्डर करने के बाद उसकी सरकारी रिवॉल्वर लूट ली थी। इस वारदात के बाद भाइयों को हिम्मत मिली। एक महीने बाद अप्रैल में पटना में दूसरे जमादार को गोली मारकर उसका पिस्टल लूट लिया। फिर इसी तरह सितंबर में पटना के ही एक अन्य पुलिस पदाधिकारी को गोली मार पिस्टल लूट लिया। इसी तरह से वे लोग हथियार इकट्ठा करते गए। कम समय में ज्यादा रुपए कमाने की लालच हथियार हाथ में आने के बाद तीनों भाइयों को कम समय में ज्यादा रुपए कमाने की लालच आ गई। उन्हें लगता था कि हथियार पास में है तो कुछ भी कर सकते हैं। तीनों ने कैश वैन लूटने की प्लानिंग की। जैसे सोचा वैसा ही तीनों ने किया और 2017 में नालंदा में कैश वैन से 20 लाख रुपए लूट लिए। उस दिन 2 लोगों की हत्या भी की। गांव के लोगों का कहना है कि लूट के पैसे से ही घर बनाना शुरू किया। गिरोह नया था इसलिए पुलिस पकड़ नहीं पा रही थी। घर में जमीन के नीचे 45 लाख छिपाकर रखा था इन भाइयों ने 6 मार्च 2017 को पटना में बैंक कैश लेकर जा रहे कर्मियों में से तीन लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी और 60 लाख रुपए लूट लिए थे। घटना के 20 दिनों बाद पुलिस ने ललन के आनंद गोलवा गांव में छापा मारा। जहां से पुलिस घर में जमीन के अंदर छिपाकर रखे 45 लाख रुपए बरामद किए थे। पहली बार पुलिस ने ललन के साथ ही उसके भाई मनीष, रजनीश, बबुआ सिंह और उनके पिता शिवशंकर सिंह को गिरफ्तार किया। जेल में रहते हुए शिवशंकर सिंह को लकवा का अटैक हुआ था। इसके बाद कोर्ट से उन्हें बेल मिल गया। चारो भाई जेल में थे। तीन भाईयों को बाढ कोर्ट में पेशी के लिए 9 सितंबर 2017 को लाया गया। जहां हाजत के शौचालय की खिड़की तोड़कर तीनों फरार हो गए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश को अपना ठिकाना बनाया था। वहां भी अपराध किया। एनकाउंटर की जानकारी मिली है- एसपी एसपी अरविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यूपी पुलिस ने एनकाउंटर की जानकारी दी है। ललन ने बाढ़ कोर्ट से फरार होने के बाद उत्तर प्रदेश में ठीकाना बनाया था। बिहार में उसने कई हत्या की थी जिस कारण बिहार पुलिस ने उस पर एक लाख का इनाम रखा था। यूपी पुलिस ने भी 25 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। बद्रर्श गैंग के नाम से जाने जाते थे।
भाई की कोचिंग बंद कराकर ललन ने बनाया था गैंग:पटना में पढ़ाई करने गए 3 भाई बन गए गैंगस्टर, एनकाउंटर के बाद अकेले हुए दिव्यांग मां-पिता
‘मेरे बेटे ललन, मनीष और रजनीश बहुत अच्छे थे। रजनीश को बैंक में नौकरी नहीं मिली तो रजनीश उदास हो गया था। इसके बाद ललन ने भाइयों के साथ अपराध की दुनिया में जाने का फैसला लिया और ब्रदर्स गैंग शुरू किया। रजनीश टीचर भी था, उसकी मैथ अच्छी थी। कोचिंग खोली थी, पर नौकरी नहीं मिली तो ललन के कहने पर बंद कर दिया।’ ये बातें यूपी के सहारनपुर में एनकाउंटर में मारे गए ललन के पिता शिवशंकर ने कही हैं। वे कहते हैं कि मनीष-रजनीश तो एनकाउंटर में पहले ही मारे गए। जब ललन मारा गया तो मुझे जानकारी नहीं थी। थाने से कुछ लोग आए, उन्होंने सूचना दी। हमें अब कोई देखने नहीं आता। हमारा जीवन भगवान भरोसे है। बेटों के एनकाउंटर के बाद दिव्यांग मां-पिता के कैसे हालात हैं? उनकी जिंदगी किस तरह कट रही है? इनके बेटे अपराध के दलदल में कैसे फंसते चले गए? पढ़िए रिपोर्ट… पहले देखें लाचार माता-पिता और घर की तस्वीरें… लाचार पिता के 5 में से 2 बेटों का एनकाउंटर 4 साल पहले हुआ था एनकाउंटर में ढेर ललन के पिता शिवशंकर समस्तीपुर के मोहिउद्ददीन नगर थाने के आनंदगोलवा गांव में रहते हैं। पहले वे किसानी का काम करते थे। उनके 5 बेटे ललन, मनीष, रजनीश, बबुआ सिंह और पत्थरु सिंह है। इनमें सबसे बड़ा बबुआ, उसके बाद पत्थरु, फिर ललन है। ललन से छोटा मनीष और सबसे छोटा भाई रजनीश। मनीष और रजनीश का एनकाउंटर 2022 में यूपी के वाराणसी में हुआ था। ललन रविवार रात यूपी के सराहनपुर में मारा गया। वहीं, बबुआ अभी हत्या-लूट मामले में हाजीपुर जेल में बंद है। इसके अलावा पत्थरु परिवार के साथ पंजाब में रहता है। वहां वह निजी कंपनी में काम करता है। बाकी 3 बहनों की शादी हो चुकी है। सत्तू-चूड़ा खाकर रह रहे दिव्यांग शिवशंकर और उनकी पत्नी रेशमी देवी दिव्यांग हैं। शिवशंकर को वृद्धा पेंशन मिलती है। उसी पैसे से गुजारा करते हैं। शिवशंकर बताते हैं कि चूड़ा-सत्तू खाकर रहना पड़ता है। कोई हमारी मदद नहीं करता है। समाज के लोग हमसे बात नहीं करते हैं। हम दोनों पति-पत्नी आपस में एक-दूसरे का सहारा हैं। सालों हो गए न बेटा हमें देखने आया और ना ही बेटियां देखने आई हैं। समाज के लोग नफरत करते हैं शिवशंकर बताते हैं कि हमारे बेटों की वजह से गांव-समाज के लोग हमसे नफरत करते हैं। हमें कोई पानी देने वाला भी नहीं है। गांव का खेत बटाई पर दे रखा है। वहां से भी थोड़े पैसे आ जाते हैं। घर को पता नहीं किसकी हाई लग गई है। कभी बीमार हो जाते हैं को तकलीफ और ज्यादा बढ़ जाती है। किसी तरह हम दोनों खुद का ध्यान रखते हैं। कई बार कोई दवा तक देने वाला नहीं रहता। ललन ने 10 साल पहले की थी लव मैरिज आसपास के ग्रामीण बताते हैं ललन ने 10 साल पहले लव मैरिज की थी। वह अपराध की दुनिया में आया तो उसकी पत्नी अपने मायके पटना के बाढ़ चली गई। ललन की एक बेटी और एक बेटा है। बाकी भाइयों की शादी नहीं हुई। शिवशंकर बताते हैं कि सबसे छोटा भाई रजनीश अपनी कोचिंग से अच्छी कमाई कर रहा था। उसी पैसे उसने घर भी बनाया था। रजनीश का सपना था कि बैंक में काम करे। अब जानिए तीनों भाइयों कैसे कमाए लाखों रुपए, कैसे बढ़ती गई उनकी लालच… पहले देखें ललन के एनकाउंटर की कुछ तस्वीरें… पुलिस वालों को मारकर उनका हथियार लूटते रहे गांव के लोग बताते हैं कि इन भाइयों ने जब गैंग शुरू किया था तब इनके पास हथियार नहीं थे और न इतने पैसे थे कि हथियार खरीद सके। इसी दौरान ललन के ससुराल के एक व्यक्ति ने एक कट्टा खरीदवाया। 2016 के मार्च में नालंदा में तीनों भाइयों ने पहला मर्डर किया। जमादार का मर्डर करने के बाद उसकी सरकारी रिवॉल्वर लूट ली थी। इस वारदात के बाद भाइयों को हिम्मत मिली। एक महीने बाद अप्रैल में पटना में दूसरे जमादार को गोली मारकर उसका पिस्टल लूट लिया। फिर इसी तरह सितंबर में पटना के ही एक अन्य पुलिस पदाधिकारी को गोली मार पिस्टल लूट लिया। इसी तरह से वे लोग हथियार इकट्ठा करते गए। कम समय में ज्यादा रुपए कमाने की लालच हथियार हाथ में आने के बाद तीनों भाइयों को कम समय में ज्यादा रुपए कमाने की लालच आ गई। उन्हें लगता था कि हथियार पास में है तो कुछ भी कर सकते हैं। तीनों ने कैश वैन लूटने की प्लानिंग की। जैसे सोचा वैसा ही तीनों ने किया और 2017 में नालंदा में कैश वैन से 20 लाख रुपए लूट लिए। उस दिन 2 लोगों की हत्या भी की। गांव के लोगों का कहना है कि लूट के पैसे से ही घर बनाना शुरू किया। गिरोह नया था इसलिए पुलिस पकड़ नहीं पा रही थी। घर में जमीन के नीचे 45 लाख छिपाकर रखा था इन भाइयों ने 6 मार्च 2017 को पटना में बैंक कैश लेकर जा रहे कर्मियों में से तीन लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी और 60 लाख रुपए लूट लिए थे। घटना के 20 दिनों बाद पुलिस ने ललन के आनंद गोलवा गांव में छापा मारा। जहां से पुलिस घर में जमीन के अंदर छिपाकर रखे 45 लाख रुपए बरामद किए थे। पहली बार पुलिस ने ललन के साथ ही उसके भाई मनीष, रजनीश, बबुआ सिंह और उनके पिता शिवशंकर सिंह को गिरफ्तार किया। जेल में रहते हुए शिवशंकर सिंह को लकवा का अटैक हुआ था। इसके बाद कोर्ट से उन्हें बेल मिल गया। चारो भाई जेल में थे। तीन भाईयों को बाढ कोर्ट में पेशी के लिए 9 सितंबर 2017 को लाया गया। जहां हाजत के शौचालय की खिड़की तोड़कर तीनों फरार हो गए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश को अपना ठिकाना बनाया था। वहां भी अपराध किया। एनकाउंटर की जानकारी मिली है- एसपी एसपी अरविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यूपी पुलिस ने एनकाउंटर की जानकारी दी है। ललन ने बाढ़ कोर्ट से फरार होने के बाद उत्तर प्रदेश में ठीकाना बनाया था। बिहार में उसने कई हत्या की थी जिस कारण बिहार पुलिस ने उस पर एक लाख का इनाम रखा था। यूपी पुलिस ने भी 25 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। बद्रर्श गैंग के नाम से जाने जाते थे।

