17 जून को भोजपुरी के बिलौटी गांव में भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ। एनकाउंटर के बाद लगातार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरेंडर के बाद भी पुलिस वालों ने भरत को 4 गोली मारी। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले 5 पुलिसकर्मियों को संस्पेंड कर दिया गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भरत एनकाउंटर पर सवाल पूछा गया। पत्रकारों ने पूछा कि लोग इसे फेक एनकाउंटर बता रहे हैं। बीजेपी के नेता भी इस पर सवाल उठा रहे हैं। पत्रकार बार-बार सवाल पूछते रहे, लेकिन सीएम सम्राट चौधरी ने भरत एनकाउंटर पर कोई जवाब नहीं दिया। वो गाड़ी में बैठे और चले गए। दरअसल, सीएम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर बीजेपी दफ्तर पहुंचे थे।
भरत एनकाउंटर मामले में जानिए अब तक क्या क्या एक्शन हुआ है एनकाउंटर के 5 दिन बाद न्यायिक जांच के आदेश भरत के एनकाउंटर के 5 दिन बाद CM सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री के बयान के 2 दिन बाद भी ना तो जांच के लिए किसी को नियुक्त किया गया है और ना ही इसे लेकर कुछ क्लियर किया गया है। 5 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड किया गया है भरत एनकाउंटर मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में राजेश कुमार मालाकार, पुलिस अवर निरीक्षक अंकित आर्यन, पुलिस अवर निरीक्षक हरिश्चंद्र कुमार, सहायक अवर निरीक्षक रामाशंकर यादव और महिला सिपाही मीरा कुमारी को सस्पेंड कर दिया गया है। ADG ने मानी लापरवाही हुई है वहीं, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में ADG सुधांशु कुमार ने पुलिस की लापरवाही मानी है। उन्होंने सोमवार को कहा कि एनकाउंटर से पहले 16 जून जो पुलिस वाले उससे बात करने गए वो उसे ठीक से हैंडल नहीं कर पाए। लापरवाही पर हमने एक SHO, 2 SI, एक ASI और एक कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी को किया तलब एनकाउंटर मामले में अधिवक्ता एसके झा की याचिका पर बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर के एसपी को तलब किया है। साथ ही आयोग ने चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी हैं। 13 जुलाई को आयोग पूरे मामले की समीक्षा करेगा। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला इधर इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस नागरत्ना ने मामले में तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि आप रजिस्ट्रार के सामने मेंशन कीजिए। वो इस केस को सुनवाई के लिए लिस्ट करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर कर एनकाउंटर की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने जस्टिस नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामला रखा और जल्द सुनवाई की मांग की। विशाल तिवारी अपना पक्ष रखते हुए कहा- पुलिस अक्सर एनकाउंटर का एक जैसा कारण बताती है। आरोपी ने पुलिस की बंदूक छीन ली, भागने लगा और पुलिस पर हमला करने की कोशिश की, इसलिए आत्मरक्षा में चलानी पड़ी। ये फर्जी एनकाउंटर है। कोर्ट को इस केस में दखल देकर जांच का आदेश देना चाहिए। भरत एनकाउंटर एनकाउंटर की पूरी कहानी जानिए 16 जून भोजपुर में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें शाहपुर के रहने वाले 30 साल के भरत भूषण तिवारी ने पुलिस-प्रशासन को खुलेआम चुनौती दी और मांगों को पूरा न करने के संबंध में आरोप लगाए। दरअसल, शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले लोगों ने बताया कि पिछले 2 साल से शाहपुर प्रखंड के जवइनियां गांव और आसपास के लोग गंगा में आई बाढ़ के बाद कटाव से प्रभावित थे। पिछले साल यानी 2025 में जवइनियां गांव के 600 से ज्यादा घर गंगा में समा गए थे। तब से भरत पीड़ितों की आवाज उठा रहा था। गांव के लोगों का कहना है कि भरत लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से मिलता था और पीड़ितों की समस्याएं उठाता था। विस्थापित परिवारों को सरकारी सहायता दिलाने के लिए लगातार प्रयास करता था। सोशल मीडिया पर वीडियोज देखने के बाद 15 जून को शाहपुर थाना के SHO अपनी पूरी टीम के साथ भरत तिवारी के घर पहुंचे। भरत घर पर नहीं था। भरत की मां 55 साल की आशा देवी का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने धमकी दी, कहा कि पहले तुम लोगों का, फिर भरत का खेल खत्म करेंगे। थोड़ी देर बाद जब पुलिस कुछ दूर तक चली गई, तो भरत बाढ़ पीड़ितों को जहां रखा गया था, उस इलाके में पहुंच गया। जानकारी के बाद पुलिस भी वहां पहुंची और फिर एनकाउंटर के बाद भरत को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, पटना PMCH में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
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