पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में मरीजों को बिहार सरकार की मुफ्त एंबुलेंस सेवा (102) की सही जानकारी नहीं मिलने से बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मजबूरी में निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है और उन्हें मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। यह समस्या लंबे समय से अस्पताल परिसर में बनी हुई है। मरीजों को नहीं मिल रही 102 एंबुलेंस की जानकारी परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में 102 एंबुलेंस सेवा के बारे में सही जानकारी नहीं दी जाती। न तो स्पष्ट साइन बोर्ड लगे हैं और न ही कर्मचारियों द्वारा मरीजों को इसकी जानकारी दी जाती है। कई जगह लगे पोस्टर और फ्लेक्स भी भ्रम पैदा करते हैं, जिससे मरीज और उनके परिजन समझ नहीं पाते कि सरकारी एंबुलेंस सेवा कैसे मिलेगी। निजी एंबुलेंस पर निर्भर हो रहे मरीज जानकारी के अभाव में अधिकतर मरीज निजी एंबुलेंस का सहारा लेने को मजबूर हैं। इसका फायदा उठाकर चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कई बार मरीजों को यह भी देर से पता चलता है कि सरकारी 102 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह मुफ्त है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप मृतक कविता देवी के परिजन गौरव गुप्ता ने बताया कि अस्पताल परिसर में 102 एंबुलेंस सेवा की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है और गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन ने दी सफाई और सुधार का आश्वासन इस मामले में सिविल सर्जन प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि एंबुलेंस सेवा एक निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित की जाती है। वहीं सुपरवाइजर लव कुमार ने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए जल्द ही इमरजेंसी वार्ड के पास टोल फ्री नंबर 102 के साथ बड़े सूचना बोर्ड और पोस्टर लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके और कोई परेशानी न हो।
पूर्णिया जीएमसीएच में 'फ्री एंबुलेंस' के नाम पर लूट:मरीजों को नहीं मिल रही 102 सेवा की जानकारी, निजी एंबुलेंस वसूल रहे मनमाना पैसा
पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में मरीजों को बिहार सरकार की मुफ्त एंबुलेंस सेवा (102) की सही जानकारी नहीं मिलने से बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मजबूरी में निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है और उन्हें मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। यह समस्या लंबे समय से अस्पताल परिसर में बनी हुई है। मरीजों को नहीं मिल रही 102 एंबुलेंस की जानकारी परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में 102 एंबुलेंस सेवा के बारे में सही जानकारी नहीं दी जाती। न तो स्पष्ट साइन बोर्ड लगे हैं और न ही कर्मचारियों द्वारा मरीजों को इसकी जानकारी दी जाती है। कई जगह लगे पोस्टर और फ्लेक्स भी भ्रम पैदा करते हैं, जिससे मरीज और उनके परिजन समझ नहीं पाते कि सरकारी एंबुलेंस सेवा कैसे मिलेगी। निजी एंबुलेंस पर निर्भर हो रहे मरीज जानकारी के अभाव में अधिकतर मरीज निजी एंबुलेंस का सहारा लेने को मजबूर हैं। इसका फायदा उठाकर चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कई बार मरीजों को यह भी देर से पता चलता है कि सरकारी 102 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह मुफ्त है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप मृतक कविता देवी के परिजन गौरव गुप्ता ने बताया कि अस्पताल परिसर में 102 एंबुलेंस सेवा की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है और गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन ने दी सफाई और सुधार का आश्वासन इस मामले में सिविल सर्जन प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि एंबुलेंस सेवा एक निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित की जाती है। वहीं सुपरवाइजर लव कुमार ने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए जल्द ही इमरजेंसी वार्ड के पास टोल फ्री नंबर 102 के साथ बड़े सूचना बोर्ड और पोस्टर लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके और कोई परेशानी न हो।


