भास्कर न्यूज |गिरिडीह शहर के सिहोडीह स्थित कुशवाहा छात्रावास सभागार में बुधवार को कुशवाहा संघ का 43वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रनारायण प्रसाद और संचालन कार्यकारी अध्यक्ष दिगंबर प्रसाद दिवाकर ने की। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी, विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद सदस्य कुमारी प्रभा वर्मा तथा कोडरमा सांसद प्रतिनिधि (गिरिडीह सदर अनुमंडल क्षेत्र) मनीष कुमार उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत समाज के आदर्श पूर्वज लव-कुश के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों के बीच मिठाइयों का वितरण किया गया। समारोह में समाज की एकता, शिक्षा और सामाजिक सुधार के विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य अतिथि मुनिया देवी ने कहा कि 24 जून 1984 को समाज के अग्रणी लोगों ने कुशवाहा संघ की स्थापना की थी, उस समय बाल विवाह, दहेज प्रथा, बहु हत्या, तलाक और पत्नी के जीवित रहते एक से अधिक विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियां व्यापक रूप से प्रचलित थीं। डॉ. जगदीश प्रसाद कुशवाहा, तिलक महतो, अधिवक्ता पूरन महतो, जननायक रितलाल प्रसाद वर्मा सहित कई समाजसेवियों ने संघ की मजबूत नींव रखी थी।उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में लगातार जनसभाएं आयोजित कर लोगों को सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक किया गया।
कुशवाहा संघ ने मनाया 43वां स्थापना दिवस
भास्कर न्यूज |गिरिडीह शहर के सिहोडीह स्थित कुशवाहा छात्रावास सभागार में बुधवार को कुशवाहा संघ का 43वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रनारायण प्रसाद और संचालन कार्यकारी अध्यक्ष दिगंबर प्रसाद दिवाकर ने की। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी, विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद सदस्य कुमारी प्रभा वर्मा तथा कोडरमा सांसद प्रतिनिधि (गिरिडीह सदर अनुमंडल क्षेत्र) मनीष कुमार उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत समाज के आदर्श पूर्वज लव-कुश के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों के बीच मिठाइयों का वितरण किया गया। समारोह में समाज की एकता, शिक्षा और सामाजिक सुधार के विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य अतिथि मुनिया देवी ने कहा कि 24 जून 1984 को समाज के अग्रणी लोगों ने कुशवाहा संघ की स्थापना की थी, उस समय बाल विवाह, दहेज प्रथा, बहु हत्या, तलाक और पत्नी के जीवित रहते एक से अधिक विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियां व्यापक रूप से प्रचलित थीं। डॉ. जगदीश प्रसाद कुशवाहा, तिलक महतो, अधिवक्ता पूरन महतो, जननायक रितलाल प्रसाद वर्मा सहित कई समाजसेवियों ने संघ की मजबूत नींव रखी थी।उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में लगातार जनसभाएं आयोजित कर लोगों को सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक किया गया।
