कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट
Calcutta High Court: कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक व्यक्ति की बलात्कार मामले में सजा बरकरार रखते हुए कहा कि प्रारंभिक जबरन यौन संबंध के बाद किया गया शादी का वादा आरोपी को आपराधिक दायित्व से मुक्त नहीं कर सकता. अदालत ने कहा कि बाद में दिये गये झूठे आश्वासनों ने केवल पीड़िता के शोषण को लंबा किया. जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) ने आइपीसी की धारा 376 के तहत दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि जांच में खामियों के बावजूद पीड़िता की विश्वसनीय गवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
अपराध को अनदेखा करना न्याय का उपहास
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल त्रुटिपूर्ण जांच के आधार पर बलात्कार जैसे अपराध को अनदेखा करना न्याय का उपहास होगा.अभियोजन के अनुसार आरोपी, पीड़िता के बड़े भाई का मित्र था. उसने 1998 में पीड़िता के साथ बलात्कार किया और बाद में शादी का वादा कर उससे संबंध बनाये रखे. पीड़िता गर्भवती हुई और एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन आरोपी ने अंततः शादी करने और बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया.
पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पीड़ित मुआवजा योजना का हकदार
अदालत ने कहा कि आरोपी ने पीड़िता की कम उम्र और संवेदनशील स्थिति का फायदा उठाया तथा बाद का विवाह का वादा शुरुआती यौन उत्पीड़न की आपराधिक प्रकृति को समाप्त नहीं कर सकता. साथ ही अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मुआवजा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. बलात्कार जैसे मामले में ऐसा अधिकतर देखा जाता है कि आरोपित सजा से बचने के लिए पीड़िता से शादी का वादा करता है.
Also Read: बंगाल विधानसभा का विशेष आपात सत्र 29 को, भ्रष्टाचार विरोधी नया कानून ला रहे हैं शुभेंदु अधिकारी
The post अपराध को खत्म नहीं करता शादी का वादा, कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की दुष्कर्मी की अपील appeared first on Prabhat Khabar.


