जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (DPRO), जो सरकार और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है, इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार है। कार्यालय के मुख्य अधिकारी लंबे समय से अपनी कुर्सी से अनुपस्थित हैं, जिसके कारण पूरा विभाग अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहा है। अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण यह कार्यालय अब दफ्तर कम और किसी कबाड़खाने जैसा अधिक नजर आने लगा है। परिसर की हालत दयनीय है, जहां चारों तरफ अव्यवस्था का अंबार लगा हुआ है। कुर्सियों और मेजों पर धूल की मोटी परतें जमी कार्यालय की फर्श जगह-जगह से टूटी हुई है। कुर्सियों और मेजों पर धूल की मोटी परतें जमी हैं, और महत्वपूर्ण दस्तावेज धूल फांक रहे हैं। यह स्थिति सिस्टम की घोर उदासीनता को दर्शाती है। इस प्रशासनिक उपेक्षा के चलते यहां आने वाले पत्रकारों और आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जनहित और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी संभालने वाला यह कार्यालय आज खुद वीरान पड़ा हुआ है। अतिरिक्त प्रभार पर चलने के कारण परेशानी यह पूरा संकट लंबे समय से कार्यालय के ‘प्रभार’ (अतिरिक्त प्रभार) पर चलने के कारण पैदा हुआ है। स्थाई पदाधिकारी के न होने से पूरा दफ्तर केवल कर्मचारियों के रहमोकरम पर सिमट गया है। जब भी पत्रकार या अन्य लोग अपने विभागीय कार्यों या सूचनाओं के सिलसिले में पहुंचते हैं, तो अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। विभाग की यह उदासीनता साफ दर्शाती है कि सूचना तंत्र को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है।
पब्लिक रिलेशन ऑफिस प्रभार के भरोसे, अधिकारी मौजूद नहीं:कैमूर में फाइल पर धूल जमी, जनता और पत्रकार परेशान
जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (DPRO), जो सरकार और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है, इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार है। कार्यालय के मुख्य अधिकारी लंबे समय से अपनी कुर्सी से अनुपस्थित हैं, जिसके कारण पूरा विभाग अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहा है। अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण यह कार्यालय अब दफ्तर कम और किसी कबाड़खाने जैसा अधिक नजर आने लगा है। परिसर की हालत दयनीय है, जहां चारों तरफ अव्यवस्था का अंबार लगा हुआ है। कुर्सियों और मेजों पर धूल की मोटी परतें जमी कार्यालय की फर्श जगह-जगह से टूटी हुई है। कुर्सियों और मेजों पर धूल की मोटी परतें जमी हैं, और महत्वपूर्ण दस्तावेज धूल फांक रहे हैं। यह स्थिति सिस्टम की घोर उदासीनता को दर्शाती है। इस प्रशासनिक उपेक्षा के चलते यहां आने वाले पत्रकारों और आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जनहित और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी संभालने वाला यह कार्यालय आज खुद वीरान पड़ा हुआ है। अतिरिक्त प्रभार पर चलने के कारण परेशानी यह पूरा संकट लंबे समय से कार्यालय के ‘प्रभार’ (अतिरिक्त प्रभार) पर चलने के कारण पैदा हुआ है। स्थाई पदाधिकारी के न होने से पूरा दफ्तर केवल कर्मचारियों के रहमोकरम पर सिमट गया है। जब भी पत्रकार या अन्य लोग अपने विभागीय कार्यों या सूचनाओं के सिलसिले में पहुंचते हैं, तो अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। विभाग की यह उदासीनता साफ दर्शाती है कि सूचना तंत्र को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है।

