गिरिडीह के बक्सीडीह स्थित एनके सिन्हा क्लिनिक में इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान पचम्बा थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 28 निवासी राज कुमार पासवान के रूप में हुई है। घटना के बाद मंगलवार को परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही और अवैध क्लिनिक संचालन का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मृतक के परिजन धर्म कुमार पासवान ने बताया कि राज कुमार पासवान को केवल हाथ में दर्द की शिकायत थी। उन्हें इलाज के लिए एनके सिन्हा क्लिनिक लाया गया, जहां डॉक्टर ने दवा और इंजेक्शन दिया। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, मुआवजे के रूप में 30 लाख रुपए देने की बात हुई थी। उन्हें फिलहाल 50 हजार रुपए नकद और 50 हजार रुपए का अन्य भुगतान मिला है। परिजनों ने कहा है कि जब तक अतिरिक्त 5 लाख रुपए नहीं दिए जाएंगे, वे शव को अपने साथ नहीं ले जाएंगे। सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है। वहीं, डॉ. एनके सिन्हा ने बताया कि मरीज हाथ में दर्द की शिकायत लेकर आया था। उसे प्राथमिक उपचार के तहत इंजेक्शन दिया गया था। इंजेक्शन के बाद मरीज क्लिनिक के बाहर बैठा था, तभी उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। क्लिनिक के लाइसेंस संबंधी सवाल पर उन्होंने स्वीकार किया कि वह स्वयं को एमबीबीएस बताते हैं, लेकिन उनके पास क्लिनिक का लाइसेंस नहीं है। वहीं इस मामले में गिरिडीह सिविल सर्जन डॉ. बच्चा सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एनके सिन्हा पंजीकृत डॉक्टर नहीं हैं और उनके द्वारा अवैध रूप से क्लिनिक संचालित किए जाने की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हाथ दर्द के इलाज के दौरान मरीज की मौत:गिरिडीह सिविल सर्जन बोले- डॉक्टर पंजीकृत नहीं, अवैध क्लिनिक पर होगी कार्रवाई
गिरिडीह के बक्सीडीह स्थित एनके सिन्हा क्लिनिक में इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान पचम्बा थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 28 निवासी राज कुमार पासवान के रूप में हुई है। घटना के बाद मंगलवार को परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही और अवैध क्लिनिक संचालन का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मृतक के परिजन धर्म कुमार पासवान ने बताया कि राज कुमार पासवान को केवल हाथ में दर्द की शिकायत थी। उन्हें इलाज के लिए एनके सिन्हा क्लिनिक लाया गया, जहां डॉक्टर ने दवा और इंजेक्शन दिया। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, मुआवजे के रूप में 30 लाख रुपए देने की बात हुई थी। उन्हें फिलहाल 50 हजार रुपए नकद और 50 हजार रुपए का अन्य भुगतान मिला है। परिजनों ने कहा है कि जब तक अतिरिक्त 5 लाख रुपए नहीं दिए जाएंगे, वे शव को अपने साथ नहीं ले जाएंगे। सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है। वहीं, डॉ. एनके सिन्हा ने बताया कि मरीज हाथ में दर्द की शिकायत लेकर आया था। उसे प्राथमिक उपचार के तहत इंजेक्शन दिया गया था। इंजेक्शन के बाद मरीज क्लिनिक के बाहर बैठा था, तभी उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। क्लिनिक के लाइसेंस संबंधी सवाल पर उन्होंने स्वीकार किया कि वह स्वयं को एमबीबीएस बताते हैं, लेकिन उनके पास क्लिनिक का लाइसेंस नहीं है। वहीं इस मामले में गिरिडीह सिविल सर्जन डॉ. बच्चा सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एनके सिन्हा पंजीकृत डॉक्टर नहीं हैं और उनके द्वारा अवैध रूप से क्लिनिक संचालित किए जाने की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


