24 मर्डर, 40 संगीन केस और 3 लाख का इनाम… ऐसे पुलिस के हत्थे चढ़ा बिहार का ये मोस्ट वॉन्टेड – bihar stf arrests manik singh father bengaluru interstate crime ntcpvz

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पटना का कुख्यात इंटर-स्टेट अपराधी मणिक सिंह और उसके पिता मनोज सिंह करीब पांच साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे. अब आखिरकार वे दोनों कानून के शिकंजे में आ ही गए. बिहार STF ने दोनों को बेंगलुरु से गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी कोडिगेहल्लि थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई, जहां दोनों छिपकर रह रहे थे. गिरफ्तारी की खबर मिलते ही बिहार से लेकर अन्य राज्यों की पुलिस में हलचल मच गई. लंबे समय से फरार इस पिता-पुत्र की तलाश कई एजेंसियां कर रही थीं. STF की यह कार्रवाई एक सुनियोजित और गुप्त ऑपरेशन का नतीजा बताई जा रही है.

नौबतपुर से अपराध की दुनिया तक
मणिक सिंह और उसके पिता मनोज सिंह मूल रूप से पटना जिले के नौबतपुर के रहने वाले हैं. गांव से निकलकर मणिक ने अपराध की दुनिया में ऐसा नाम बनाया कि उसका आतंक कई राज्यों तक फैल गया. पुलिस के मुताबिक, पिता और बेटे की जोड़ी मिलकर एक संगठित अपराध सिंडिकेट चला रहे थे. स्थानीय दबंगई से शुरू हुआ यह नेटवर्क बाद में रंगदारी, अपहरण और हत्या तक पहुंच गया. दोनों की पहचान एक खतरनाक क्रिमिनल जोड़ी के रूप में होने लगी थी. यही वजह रही कि पुलिस के लिए उन्हें पकड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया था.

24 से ज्यादा मर्डर, 40 से ज्यादा संगीन जुर्म
मणिक सिंह पर दर्ज मामलों की फेहरिस्त चौंकाने वाली है. उस पर 24 से ज्यादा हत्या के मामले दर्ज हैं. इसके अलावा अपहरण, लूट, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े 40 से अधिक गंभीर केस चल रहे हैं. पुलिस का दावा है कि वह बिल्डरों और कारोबारियों से जबरन वसूली करता था. जो विरोध करता, उसे जान से मारने की धमकी दी जाती थी. यही वजह है कि उसका नाम बिहार के सबसे खतरनाक अपराधियों में गिना जाने लगा था.

तीन राज्यों में फैला नेटवर्क
बिहार पुलिस के अनुसार, मणिक सिंह और मनोज सिंह के खिलाफ बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में केस दर्ज हैं. अकेले पटना जिले के कई थानों में इनके नाम से FIR मौजूद हैं. इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने ₹3 लाख का इनाम भी घोषित कर रखा था. STF कई सालों से इनकी लोकेशन ट्रैक कर रही थी. मोबाइल सर्विलांस और गुप्त सूत्रों के जरिए आखिरकार पुलिस इनके ठिकाने तक पहुंचने में सफल रही.

2015 में गिरफ्तारी फिर जमानत
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, दोनों आरोपियों को साल 2015 में भी गिरफ्तार किया गया था. लेकिन जमानत पर बाहर आते ही उन्होंने दोबारा अपराध की दुनिया में वापसी कर ली. गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले झारखंड में शरण ली और फिर वहां से बेंगलुरु पहुंच गए. माना जा रहा है कि महानगर में पहचान छिपाकर रहना उन्हें आसान लगा. इसी दौरान वे अपने नेटवर्क को भी ऑपरेट करते रहे.

बेंगलुरु में कैसे हुआ ऑपरेशन
बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर सीमंथ कुमार सिंह ने बताया कि बिहार पुलिस की STF टीम कल बेंगलुरु पहुंची थी. कोडिगेहल्लि थाना क्षेत्र में उत्तर-पूर्व डिवीजन के DCP के साथ समन्वय बनाकर ऑपरेशन किया गया. दोनों आरोपियों को ट्रांजिट वारंट के जरिए गिरफ्तार किया गया. स्थानीय पुलिस ने पूरे ऑपरेशन में पूरा सहयोग दिया. गिरफ्तारी बेहद शांत तरीके से की गई ताकि कोई हंगामा न हो.

कौन दे रहा था शरण?
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दोनों को बेंगलुरु में किसने शरण दी थी. कितने समय से वे यहां रह रहे थे और उनके संपर्क किन-किन लोगों से थे, इसकी पड़ताल की जा रही है. पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यहां से भी किसी आपराधिक गतिविधि को अंजाम दिया गया. STF और बेंगलुरु पुलिस संयुक्त रूप से इस नेटवर्क को खंगाल रही है.

STF की तैयारी
फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस कस्टडी में हैं और जल्द ही उन्हें बिहार लाया जाएगा. STF उनसे पूछताछ कर पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. माना जा रहा है कि इस गिरफ्तारी से कई अनसुलझे केसों का खुलासा हो सकता है. पुलिस के लिए यह सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि संगठित अपराध पर एक बड़ा प्रहार है. आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं.

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