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होली आने में कुछ ही दिन शेष हैं और ऐसे में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ी दीदियों द्वारा हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से दीदियां इको-फ्रेंडली होली का संदेश भी देना चाहती हैं। पाकुड़ सदर में, जेएसएलपीएस द्वारा प्रमोटेड चास फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ी महिलाएं गुलाल बनाने में पूरी तरह से जुटी हुई हैं। वे लाल, हरा और गुलाबी गुलाल तैयार कर उसकी पैकेजिंग कर रही हैं। चुकंदर और पलाश के फूलों का इस्तेमाल हो रहा गुलाल बनाने में बिल्कुल प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें शुद्ध अरारोट, फूड कलर के अलावा चुकंदर और पलाश के फूलों का इस्तेमाल हो रहा है। गुलाल बनाने में जुटी जेएसएलपीएस से जुड़ी सिलवंती हांसदा, प्रेमिका टुडू, अंशिल्मा टुडू, प्रतिमा देवी और बलके हेंब्रम ने बताया कि वे अपने हाथों से गुलाल तैयार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि हर्बल गुलाल तैयार करने के लिए वे जंगल और खेतों से प्राकृतिक सामग्री इकट्ठा करती हैं और इसके बाद गुलाल तैयार किया जाता है। गुलाल तैयार करने के बाद इसकी पैकेजिंग की जाती है और फिर इसे बाजार में बेचा जाता है, जिससे अच्छी आमदनी होती है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं। इस संबंध में उपायुक्त (डीसी) मनीष कुमार ने बताया कि पिछले साल भी जेएसएलपीएस से जुड़ी दीदियों द्वारा हर्बल गुलाल तैयार किया गया था। उन्होंने इसे एक बहुत अच्छी पहल बताया, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी। डीसी ने कहा कि आजकल होली के समय जो केमिकल रंगों का प्रयोग होता है, उससे भी लोग बचेंगे और होली पूरी तरह से इको-फ्रेंडली होगी। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन भी इन दीदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में हर संभव मदद दे रहा है।
जेएसएलपीएस की दीदियां बना रहीं हर्बल गुलाल:इको-फ्रेंडली होली के लिए प्राकृतिक रंगों का उत्पादन, फल-फूल का कर रहीं उपयोग
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