
कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट
Mahua Moitra in High Court : कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा पर अंडे, कीचड़ और बैंगन फेंके जाने की घटना के बाद मामला अब अदालत तक पहुंच गया है. हमले के तुरंत बाद मोइत्रा ने कलकत्ता हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सुरक्षा कवच यानी कानूनी संरक्षण की मांग की. शुक्रवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में महुआ की ओर से याचिका दायर करने की अनुमति मांगी गयी. उनकी तरफ से अदालत को बताया गया कि उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर पर पुलिस तेजी से कार्रवाई कर रही है, लेकिन मोइत्रा द्वारा दर्ज करायी गयी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा. इसी आधार पर उन्होंने अदालत से संरक्षण की मांग की. अदालत ने मामले में याचिका दायर करने की अनुमति दे दी.
सोशल मीडिया पर कई वीडियो हुए थे साझा
पूरा विवाद एक जुलाई को नदिया जिले के कालींगज में हुई तृणमूल की एक कार्यकर्ता सभा से जुड़ा है. इस सभा में महुआ मोइत्रा मौजूद थीं. सभा के दौरान पार्टी कार्यालय के बाहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर काले झंडे लेकर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गये. प्रदर्शनकारियों ने महुआ के खिलाफ “हाय-हाय” और “गो बैक” के नारे लगाने शुरू कर दिये. आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पार्टी कार्यालय की खिड़की से मोइत्रा को देखते ही सड़क से उन पर एक के बाद एक अंडे फेंकने शुरू कर दिये. अंडों के साथ कीचड़ और बैंगन भी फेंके गये. इतना ही नहीं, मोइत्रा और तृणमूल कार्यकर्ताओं को घेरकर बाहर निकलने से रोकने का भी आरोप लगाया गया. घटना के बाद मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा किये. इन वीडियो में उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी भाजपा समर्थक थे और पुलिस पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बनी रही.
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कानून-व्यवस्था की बतायी असली तस्वीर
वीडियो संदेश में मोइत्रा ने कहा, “यह राज्य की कानून-व्यवस्था की असली तस्वीर है. भाजपा के लोग जमा होकर हमें घेरकर खड़े हैं. खिड़की से मेरे ऊपर हमला किया गया. पुलिस सब कुछ देख रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर रही. भीड़ को हटाने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया गया.” बाद में जब मोइत्रा पार्टी कार्यालय से निकलकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ीं, तब भी उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित थी. अब हाइकोर्ट पहुंचकर मोइत्रा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह इस मामले को केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रही हैं.
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