Saturday, July 4, 2026

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन:गयाजी में धरना दिया, राष्ट्रपति के नाम का सौंपा ज्ञापन, कहा- ट्रस्ट भंग हो


गयाजी जिला कांग्रेस कमिटी और श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी उजागर कराओ संघर्ष समिति ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान गेट संख्या-7 के पास विशाल धरना दिया। धरने के दौरान, नेताओं ने सरकार से छह सूत्री मांगों को तुरंत पूरा करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। कार्यक्रम के समापन के बाद, राष्ट्रपति को छह सूत्री ज्ञापन ई-मेल, ट्वीट और डाक के माध्यम से भेजा गया। इस धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता गया जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रजनीश कुमार झुना ने की। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी उजागर कराओ संघर्ष समिति के संयोजक प्रो. विजय कुमार मिट्ठू ने कार्यक्रम का संचालन किया। घोटाले के कारण भक्तों में गुस्सा प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भगवान श्रीराम मंदिर विश्व के करोड़ों सनातनियों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। मंदिर में दान, चढ़ावा, जमीन और अन्य संसाधनों के प्रबंधन को लेकर सामने आ रहे कथित घोटाले, भ्रष्टाचार और चोरी के आरोपों ने श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश पैदा किया है। नेताओं ने इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। प्रो. विजय कुमार मिट्ठू ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास की रक्षा के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और जनता के सामने सच्चाई रखने का आग्रह किया। संघर्ष समिति और कांग्रेस तब तक आंदोलन जारी रखेंगी, जब तक सरकार उनकी सभी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती। कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष गगन मिश्रा ने भी धरना को संबोधित करते हुए सरकार के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए, चंपत राय और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, मंदिर में शुरू से प्राप्त सभी चढ़ावे का स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए, पूरे कथित मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए और प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए श्रद्धालुओं से माफी मांगें।

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