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मुंगेर जिले के दियारा क्षेत्रों में गंगा नदी का कटाव शुरू हो गया है। संभावित बाढ़ से पहले शुरू हुए इस कटाव से किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। सदर प्रखंड के कई इलाकों में जमीन धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सबसे गंभीर स्थिति मोहली पंचायत के आदर्श ग्राम टीका रामपुर और नौवागढ़ी उत्तरी पंचायत के मनियारचक गंगा घाट के आसपास देखी जा रही है। कटाव के कारण किसानों की उपजाऊ जमीन और फसलें लगातार गंगा में समा रही हैं। बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा और सदर प्रखंड के लगभग 40 किलोमीटर क्षेत्र में की गई पड़ताल में कई गंगा घाटों की स्थिति जर्जर पाई गई। हालांकि, बरियारपुर प्रखंड में फिलहाल सक्रिय कटाव नहीं मिला है, लेकिन अधिकांश घाट क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं। जमालपुर के सिंघिया, पड़हम और फरदा तथा धरहरा के शिवकुंड और हेमजापुर सहित कई घाटों पर कटावरोधी कार्य किए जाने के बावजूद संरचनाएं कमजोर नजर आईं। एक माह से लगातार जमीन धंस रही
मोहली पंचायत के आदर्श ग्राम टीका रामपुर में चंडिका स्थान के समीप कटाव की स्थिति सबसे अधिक गंभीर है। यहां पिछले एक माह से लगातार जमीन धंस रही है और गंगा नदी किसानों की खेती योग्य भूमि को निगल रही है। किसानों द्वारा लगाई गई मक्का और अन्य फसलें भी कटकर नदी में समा रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बीते एक माह में पश्चिम दिशा में करीब आधा किलोमीटर और उत्तर दिशा में लगभग 40 फीट जमीन गंगा में विलीन हो चुकी है। कटाव का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे गांव अब मात्र 300 मीटर की दूरी पर रह गया है। आने वाले दिनों में गांव पर भी खतरा मंडरा सकता है
किसान रामरूप यादव, सकलदेव मंडल, रूपेश यादव, मनोज बिंद और राजेश कुमार ने बताया कि कटाव की जानकारी कई बार मौखिक रूप से अंचल कार्यालय और प्रखंड प्रशासन को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कटावरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में गांव पर भी खतरा मंडरा सकता है। मनियारचक घाट पर भी खतरे के संकेत
सदर प्रखंड के मनियारचक गंगा घाट पर पूर्व में बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा कटावरोधी कार्य कराया गया था। इसके बावजूद घाट के समीप दोबारा कटाव के संकेत मिलने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं, वहां घाट काफी खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। बाढ़ के दौरान यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। 2025 में भी हुआ था कटाव
ग्रामीणों ने बताया कि टीका रामपुर में वर्ष 2025 में भी पश्चिमी हिस्से में बड़े पैमाने पर कटाव हुआ था। उस समय भी स्थायी कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया, जिसके कारण इस वर्ष फिर से स्थिति भयावह हो गई है। लोगों का कहना है कि जब गंगा का जलस्तर कम था, तब यदि सुरक्षा कार्य कर दिया जाता तो आज किसानों की जमीन और फसलें सुरक्षित रहतीं।
अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई का दिया आश्वासन
सदर अंचलाधिकारी अंजली ने बताया कि मंगलवार को टीका रामपुर गांव में शिविर लगाया जाएगा। शिविर के दौरान कटाव प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया जाएगा। वहीं जिला आपदा पदाधिकारी कमल किशोर ने कहा कि मामले की जानकारी प्राप्त कर बाढ़ नियंत्रण एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से बातचीत की जाएगी, ताकि आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

