![]()
‘सोनू-मोनू पिछले 7-8 साल से इलाके में आतंक फैला रहे हैं। दोनों दिनदहाड़े अवैध हथियार लेकर घूमते थे और हवाई फायरिंग कर लोगों को डराते-धमकाते थे। सबसे चौंकाने वाला आरोप ये कि सोनू-मोनू गांव के बच्चों को चॉकलेट और बिस्किट का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। बच्चों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देते थे। दोनों की गिरफ्तारी के बाद से 11 साल का एक बच्चा पुलिस की डर की वजह से गांव से फरार है। सोनू-मोनू को बेकसूर बता रहे हैं, जो लोग कह रहे हैं कि सोनू-मोनू के पास पिस्टल नहीं था, उनसे ही पूछा जाना चाहिए कि आखिर सोनू-मोनू करता क्या है। क्या वे दोनों कहीं मजदूरी करते हैं या कोई नौकरी करते हैं। वे दोनों गांव के छोटे-छोटे बच्चों को अपने साथ ले जाते हैं और उन्हें पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग देते हैं।’ बेगूसराय के बलिया थाना क्षेत्र स्थित बरियारपुर गांव के लोगों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। दरअसल, 3 दिन पहले अपराधी सोनू-मोनू की गिरफ्तारी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी एक अपराधी की कमर में जबरन पिस्टल डालता दिख रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए बेगूसराय के डीआईजी (DIG) और सीआईडी (CID) की स्पेशल टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। पुलिस अधिकारियों ने सोनू-मोनू के परिजन के साथ-साथ बरियारपुर गांव के लोगों से जानकारी जुटाई। सोनू-मोनू की गिरफ्तारी और सामने आए वीडियो को लेकर बरियारपुर गांव के लोगों का क्या कहना है? पुलिसकर्मियों की टीम को गांव के लोगों ने क्या बताया? गिरफ्तार किए गए दोनों अपराधियों पर कितने केस दर्ज हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। अपराधी सोनू-मोनू की गिरफ्तारी की 3 तस्वीरें सबसे पहले जानिए बरियारपुर गांव के लोगों के दावे सोशल मीडिया पर एक अपराधी की कमर में जबरन पिस्टल खोंसने के वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर ने अपराधियों को निर्दोष बताया, पुलिस पर जबरन हथियार थमाने का आरोप लगाया। वहीं दूसरी तरफ स्थानीय ग्रामीणों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। बरियारपुर के ग्रामीणों का आरोप है कि सोनू-मोनू पेशेवर अपराधी हैं, दोनों का इलाके में आपराधिक इतिहास है। स्थानीय पल्लव कुमार सिंह और मंटुन सिंह ने सोनू-मोनू को लेकर कहा कि वे दोनों गांव के ही एक 10-11 साल के नाबालिग लड़के जीत कुमार (बदला नाम) को अपना दोस्त बना लिया था। जीत कुमार के माता-पिता गरीब हैं और दूसरों के खेतों में सिंचाई कर अपना और परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जीत को उसकी मां हमेशा अपनी निगरानी में रखती थी, लेकिन जैसे ही जीत को मौका मिलता था, वो सोनू-मोनू के पास भाग जाता था, क्योंकि सोनू-मोनू जीत को चॉकलेट और बिस्किट का लालच देते थे। ‘जीत को कोई हाथ भी लगाएगा, तो दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी जाएगी’ बरियारपुर के लोगों के अनुसार, सोनू-मोनू अपने साथ जीत को लेकर गांव में घूमते थे। नाबालिग जीत को भी तमंचा पकड़ा देते थे और कहीं भी उससे फायरिंग करवाने लगते थे। सोनू-मोनू ने बकायदा जीत को पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग दी थी। गांव के लोगों ने बताया कि सोनू-मोनू गांव में जीत को अपने साथ लेकर घूमने के दौरान कहते थे कि अगर किसी ने भी जीत को हाथ भी लगाया तो दिनदहाड़े उसकी हत्या कर दी जाएगी। सोनू-मोनू की गिरफ्तारी के बाद से पुलिस की डर की वजह से जीत गांव से फरार हो गया है। ‘गिरफ्तारी के लिए टीम आई तो सोनू-मोनू ने पुलिस पर तानी थी पिस्टल’ गांव के लोगों ने कहा कि गिरफ्तारी के समय सोशल मीडिया पर ये कहा गया कि पुलिस ने सोनू-मोनू को जबरन फंसाने के लिए उसकी कमर में खुद कट्टा डाल दिया था। इस दावे पर चश्मदीद मंटुन सिंह ने बताया कि हम सब अपने छत से ये पूरा माजरा देख रहे थे। उन्होंने बताया कि जब पुलिस सोनू-मोनू को पकड़ने आई, तो दोनों ने पुलिस टीम पर ही पिस्टल तान दिया था। पुलिस ने बहुत ही सूझबूझ दिखाते हुए पिस्टल दोनों से छीन लिया। पुलिस ने उसकी कमर में कोई हथियार नहीं डाला, बल्कि वह हथियार सोनू के हाथ से ही बरामद हुआ था। वो हथियार सोनू का ही था। ‘15 दिन पहले ग्रामीण कारी सिंह के घर पर सोनू-मोनू ने फायरिंग की थी’ ग्रामीण राजा कुमार ने बताया कि अगर सोनू-मोनू निर्दोष हैं, तो बीते 20 जून को कारी सिंह के घर पर गोली चलाने कौन आया था? वहीं, पीड़ित कारी सिंह ने बताया कि 20 जून को मेरा पोता अपने खेत में घास (लरकटिया) काटने गया था। इसी दौरान सोनू-मोनू के साथ रहने वाला नाबालिग जीत कुमार वहां पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए कहा कि तुम्हारे बाप का खेत है, जो घास काट रहे हो। इसके बाद सोनू-मोनू वहां पहुंच गए। एक पोता तो जान बचाकर भाग निकला, लेकिन बदमाशों ने दूसरे पोते को पकड़कर उसके कान पर पिस्टल सटा दी। कारी सिंह ने बताया कि खेत से भागकर घर पहुंचे पोते ने पूरी कहानी बताई। जब हम लोग शिकायत करने नाबालिग जीत के घर पहुंचे तो उसके माता-पिता ने अपने बच्चे को डांटने के बजाए सोनू-मोनू को कॉल करके बुला लिया। कारी सिंह ने बताया कि फोन कॉल के बाद आए सोनू-मोनू ने मेरे घर पर करीब 5-6 राउंड फायरिंग की। घटना के वक्त घर में कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। वहीं, घर के अंदर मौजूद महिलाओं और बच्चों ने छिपकर अपनी जान बचाई। पीड़ित महिला रुपम देवी ने बताया कि सोनू और मोनू दोनों आदतन बदमाश हैं। वे बार-बार हमारे घर पर गोली चलाते हैं। ये दूसरी-तीसरी बार है, जब ऐसी घटना हुई है। ‘मना करने के बाद भी मैंने वीडियो बनाया’ गिरफ्तारी के समय वीडियो बनाने वाले पिंकू कुमार ने बताया कि सुबह करीब 10:30 बजे अचानक हल्ला-हंगामा हुआ। जब हम लोग वहां देखने गए, तो मैंने अपना मोबाइल निकाला। सामने से मुझे धमकी दी गई कि कोई वीडियो नहीं बनाएगा, लेकिन मैंने साफ कह दिया कि मैं तो वीडियो बनाऊंगा। मैंने खुद देखा कि पुलिस के पास पिस्टल थी और वो निकालकर सोनू के कमर में डाल (खोंस) रहा था। गिरफ्तार किए गए सोनू-मोनू का आपराधिक इतिहास रहा है। सोनू सिंह पर बलिया थाना में 11, जबकि उसके भाई मोनू सिंह पर बलिया थाना में ही 9 मामले दर्ज हैं। पुलिस ने जब दोनों की गिरफ्तारी की तो उनके पास से एक पिस्टल, 9 जिंदा कारतूस, 2 चाकू और 3000 रुपए बरामद किए गए थे। अब जानिए, पूरे मामले को लेकर बेगूसराय के एसपी का क्या कहना है? बेगूसराय के SP मनीष ने बताया कि सोनू और मोनू पर हथियार लहराने, रंगदारी मांगने के मामले दर्ज हैं। 2018 में सोनू-मोनू ने पुलिस पर फायरिंग भी की थी। दोनों भाइयों के हथियार लहराने के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को बलिया थाना की पुलिस टीम गिरफ्तार करने गई थी। इस दौरान पुलिसकर्मियों से अपराधियों की ओर से हाथापाई की गई थी और गिरफ्तारी के दौरान पुलिसकर्मियों को चुनौती भी दी गई थी। सोनू-मोनू के अलावा साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के रहने वाले अमित कुमार नाम के एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है। उससे पूछताछ चल रही है। गिरफ्तार अमित कुमार की ओर से ही सोनू-मोनू को हथियार सप्लाई किए जाने की आशंका है।
