
बैरकपुर से मनोरंजन कुमार सिंह की रिपोर्ट
Bengal Jute Mill : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही जूट उद्योग को नयी रफ्तार देने के लिए श्रम विभाग ने पहल की है. राज्य में बंद पड़ी जूट मिलें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं. लंबे समय से बंद पड़ी जूट मिलों को फिर से चालू करने की प्रक्रिया तेज हुई है. राज्य सरकार के श्रम विभाग की ओर से एक माह में बंद पड़ी 14 जूट मिलों को फिर से शुरू किया गया. इससे हजारों श्रमिकों को पुन: रोजगार मिला और उनके चेहरे पर मुस्कान लौटी है.
बंगाल में कभी 62 बड़ी मिलें थीं, अब 58 मिलें ही हैं
राज्य के श्रममंत्री अर्जुन सिंह ने बताया कि 62 बड़ी मिलें थीं, अब 58 मिलें ही हैं. तृणमूल के शासन काल में कई सारी मिलें बंद हो गयी थीं. जूट उद्योग के श्रमिकों की स्थिति खराब थी, लेकिन भाजपा ने सत्ता में आने से पहले ही आश्वासन दिया था कि जूट उद्योग का नयी रफ्तार दी जायेगी. उसी मुताबिक अब जूट मिलों पर फोकस किया जा रहा है.
फिलहाल चार जूट मिले बंद
विगत एक महीने में बंद पड़ीं लगभग 14 जूट मिलें खुल चुकी हैं, इनमें से कुछ में उत्पादन शुरू हो चुका है, तो कुछ में मेंटनेंस का कार्य चल रहा है. दो और जूट मिलें हैं, जो एक-दो दिनों के अंदर ही खुल जायेंगी. फिलहाल चार जूट मिले बंद रह गयी हैं, वह भी जल्द से जल्द खुलेंगी. जगदल जूट मिल में अगले सोमवार से उत्पादन शुरू होने की संभावना है, जबकि एम्पायर एमको, भारत और लुमटेक्स जूट मिलों में भी अगले कुछ दिनों में उत्पादन शुरू हो जायेगा.
मरम्मत के बाद खुलेंगी कुछ मिलें
श्रम विभाग के मुताबिक, उत्तर 24 परगना जिले में कई प्रमुख बंद जूट मिलें खुल गयी हैं और उनमें फिर से उत्पादन भी शुरू हो चुका है, जबकि कुछ में मशीनों की मरम्मत का कार्य अंतिम चरण में है. बंद मिलों को खोलने के लिए श्रम विभाग की ओर से लगातार मिलों में दौरा कर जायजा लिया जा रहा है.
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हाल में खुली जूट मिलें
- काकीनाड़ा जूट मिल – करीब 3,000 श्रमिक
- एलायंस जूट मिल – 3,000 श्रमिक
- एंग्लो इंडिया जूट मिल – 3,509 श्रमिक
- नैहाटी जूट मिल – 3,500 श्रमिक
- एम्पायर जूट मिल – 3,200 श्रमिक
- सनबीम वाणिज्य लिमिटेड (एमको) जूट मिल – 2,700 श्रमिक
- भारत जूट मिल
- लुमटेक्स जूट मिल
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