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महिलाओं ने चार साल में बदली गांव की तस्वीर:जल संरक्षण-पौधरोपण से अवैध धंधे छोड़ खेती की ओर बढ़े ग्रामीण, मिला राष्ट्रपति सम्मान


झारखंड के कोडरमा जिले में स्थित काझाटांड गांव सामूहिक एकता और स्वावलंबन का एक प्रेरक उदाहरण बन गया है। जिला मुख्यालय से लगभग 25 KM दूर जरगा पंचायत का यह गांव, जो कभी अवैध महुआ शराब के धंधे के लिए जाना जाता था, अब जल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। गांव की सूरत बदलाव की पहल करने वाली पार्वती देवी को राष्ट्रपति सम्मान भी मिला। दरअसल, चार साल पहले, इस गांव की स्थिति काफी खराब थी। ग्रामीण गरीबी में जीवन यापन कर रहे थे और पानी की कमी के कारण खेती संभव नहीं थी। कई लोग अवैध देशी शराब बनाने और ढिबरा (अभ्रक) खनन जैसे गैरकानूनी धंधों में लिप्त थे। जल संरक्षण के सराहनीय कार्य किए गए
महिलाओं को भी नए विचारों के साथ जीने की आजादी नहीं थी और वे अक्सर ढिबरा (अभ्रक) चुनने में लगी रहती थीं। जिला प्रशासन की पहल और ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं के सामूहिक श्रमदान ने गांव की तस्वीर बदल दी। यहां साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के सराहनीय कार्य किए गए हैं। पंचायत समिति सदस्य पार्वती देवी ने बताया कि जब वह 2023 में शादी करके गांव आईं, तो गांव की स्थिति बेहद खराब थी। उन्होंने गरीबी और महिलाओं की सीमित स्वतंत्रता का जिक्र किया। पार्वती देवी ने 2017 में काझाटांड से वार्ड सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वार्ड सदस्य बनने के बाद उनका प्रखंड कार्यालय आना-जाना शुरू हुआ, जहां उन्होंने विभिन्न प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने गांव की गंभीर जल समस्याओं को उनके सामने रखा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें टीसीबी (टेंच कम बंड) और चेकडैम जैसे जल संरक्षण के उपायों का सुझाव मिला। ग्रामीणों ने बनाया मजाक
पार्वती देवी कहती हैं कि जब वे इस सुझाव को लेकर गांव पहुंचीं तो गांव की एक दो महिलाओं को छोड़ बाकी सभी लोग इसका मजाक बनाने लगे। पार्वती देवी ने कुछ महिलाओं के साथ टीसीबी (ट्रेंच कम बंड) खोदना शुरू किया। शुरुआत में लोग इसे फालतू का समय गंवाना और अनुपयोगी चीजें बताकर मजाक उड़ाते थे। इसी बीच 2022 में तत्कालीन डीसी आदित्य रंजन जरगा पंचायत के काझाटांड गांव पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने न केवल पार्वती देवी की सोच की सराहना की बल्कि गांव की महिलाओं और पुरुषों को इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। पति ने खूब दिया साथ
इस कार्य को सफल बनाने में पार्वती देवी के साथ साथ मुख्य रूप से रिंकी देवी, रिंकू देवी, सुषमा देवी, सविता देवी ने महती भूमिका निभाई है। ऐसे में गांव की सूरत, रहने के तरीके के बदलाव सहित अन्य बदलाव लाने में पार्वती देवी के पति विजय सिंह ने इनका खूब साथ दिया। जब वे पड़ोस में रहने वाली रिंकी, रिंकू, सुषमा व सविता देवी से अपने विजन के बारे में बताया तो वे लोग तैयार तो हो गईं, लेकिन उनके घर वालों ने इन सब चीजों को फालतू बताते हुए बरसों से चलते आ रहे रोजगार पर ही ध्यान देने को कहा। जान से मारने की धमकी तक मिली
हालांकि पार्वती देवी ने हिम्मत नहीं हारी और अपने संकल्प को पूरा करने में लगी रहीं। इसी बीच रिंकी और रिंकू देवी ने भी अपने घरवालों को मनाते हुए पार्वती देवी का साथ देने में जुट गईं। इस प्रकार एक एक कर गांव की महिलाओं को ढिबरा चुनने से दूरी बनाते देख गांव के कुछ दबंग किस्म के लोगों ने पार्वती देवी को कई बार जान से मारने की धमकी तक दे डाली। हालांकि पार्वती देवी ने सभी बातों को अनदेखा करते हुए अपने काम में लगी रहीं। गांव आसपास के ग्रामीणों के लिए बना प्रेरणा
पार्वती देवी बताती हैं कि इनके साथ जुटी ज्यादातर महिलाएं 7 वीं पास हैं। ये खुद भी 7 वीं पास हैं, ऐसे में सरकारी कार्यालयों में जाने पर इन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ सब कुछ ठीक होता चला गया। गांव के लोगों की सोच बदली, सभी लोग साथ आए और आज काझाटांड आसपास के गांव वालों के लिए प्रेरणा बन गया है। 300 पौधारोपण से गांव में आई हरियाली गांव की रहने वाली रिंकू देवी ने बताया कि पार्वती दीदी के प्रयास और डीसी के सुझाव ने महज एक वर्ष में गांव की सूरत बदल दी। गांव की सभी महिलाएं-पुरुष टीसीबी की खुदाई, तालाब खुदाई, चेकडैम निर्माण के साथ-साथ पौधरोपण करने लगे। नतीजा यह हुआ कि जिस गांव के लोग पीने के पानी को तरसते थे, आज इस गांव में सभी प्रकार के अनाज की खेती सहित साग सब्जी उगाए जा रहे हैं। मेहनत को 2023 में मिला सम्मान बताते चलें कि इस गांव की बदलती सूरत की खबर दिल्ली तक पहुंची। जहां सन 2023 में जल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने को लेकर पार्वती देवी को राष्ट्रपति द्वारा सम्मान प्राप्त हुआ। पार्वती देवी ने कहा कि यह सम्मान उन सारी महिलाओं की मेहनत का नतीजा था, जिसने विषम परिस्थितियों में भी गांव का सूरत-ए-हाल बदलने में उनका साथ दिया।

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