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बेगूसराय के वीरपुर थाना क्षेत्र के मुजफ्फरा कस्तुरबा विद्यालय के वार्डन रिंकू कुमारी की 2021 में हुई संदिग्ध मौत मामले में नए सिरे से जांच होगी। पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव के नेतृत्व में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए गठित विशेष अनुसंधान दल (SIT) आज(13 जुलाई 2026) से अपनी कार्रवाई शुरू करेगी। हाई कोर्ट के आदेश पर गठित हुई SIT रिंकू की मौत का रहस्य 5 साल बाद भी नहीं सुलझा है। हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल 2026 की सुनवाई के दौरान स्थानीय पुलिस की जांच पर सवाल उठाए और केस की जांच नए सिरे से करने के आदेश दिए। अब जांच शुरुआत से होगी। इसके लिए आईजी विकास वैभव को जिम्मा सौंपा गया है। हाईकोर्ट ने माना कि बेगूसराय पुलिस के निचले स्तर के अधिकारी इस मामले में न्याय नहीं कर सकते। विकास वैभव को कोर्ट ने खुली छूट दी है कि वे अपनी टीम खुद चुनें और बेगूसराय पुलिस को सख्त निर्देश दिया है कि वे विकास वैभव की टीम को हर संभव सहयोग दें। SIT टीम में शामिल अधिकारी SIT में बेगूसराय क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) शैलेश कुमार सिन्हा, विशेष निगरानी इकाई पटना के डीएसपी अशोक झा, बगहा के एसडीपीओ निहार भूषण, मुजफ्फरपुर पूर्वी के एसडीपीओ अलय वत्स, पटना जिलाबल के पुलिस निरीक्षक कुमार अभिनव और बेगूसराय जिलाबल के अन्य पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मी शामिल हैं। कैंप कार्यालय में बड़ी बैठक, घटनास्थल का होगा दौरा आईजी विकास वैभव बेगूसराय पहुंच चुके हैं। सोमवार को कैंप कार्यालय में SIT के सभी सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक में अब तक के अनुसंधान की प्रगति, उपलब्ध वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसके बाद घटनास्थल का भ्रमण कर मामले से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं का अवलोकन करेंगे, जिससे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। DIG कार्यालय बना कैंप ऑफिस, IG विकास वैभव की जनता से अपील मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेगूसराय DIG कार्यालय को इस जांच का आधिकारिक कैंप कार्यालय बनाया गया है। आईजी विकास वैभव ने बताया कि हमारी टीम उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कांड का फिर से अनुसंधान शुरू कर रही है। आम जनता से अनुरोध है कि अगर किसी के पास इस मामले से जुड़े कोई भी तथ्य, जानकारी या साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो वे बेगूसराय स्थित DIG कार्यालय में आकर मुझसे या टीम से मुलाकात कर सकते हैं। बड़े खुलासे की उम्मीद फिलहाल मृतका की पुत्री तेजस्विनी की अपील पर हाई कोर्ट की इस सख्ती और आईजी विकास वैभव के नेतृत्व में अनुसंधान के बाद अब वीरपुर कांड में बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस विभाग इस पूरे मामले को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सुलझाने में जुट गया है। अब सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी कहानी सुबह गई स्कूल, दोपहर में मिली मौत की सूचना 4 अप्रैल 2021 की सुबह रिंकू कुमारी अपने घर असुरारी से स्कूल के लिए निकली थी। दोपहर करीब 2 बजे उनकी बेटी तेजस्विनी को उनकी मौत की सूचना मिली। जब परिजन स्कूल पहुंचे, तो रिंकू कुमारी का शव फर्श पर पड़ा था। पुलिस और स्थानीय लोगों ने उन्हें मोबाइल में वे तस्वीरें दिखाई, जिनमें शव पंखे से लटका हुआ था। लेकिन शरीर धूल और मिट्टी से सना था तथा पैर जमीन को छू रहे थे। परिजनों ने इसे हत्या बताया, जबकि पुलिस आत्महत्या का रूप देने में जुटी रही। बेटी का आरोप- दबाव में बदली गई FIR याचिकाकर्ता तेजस्विनी कुमारी ने कोर्ट को बताया कि वह प्राथमिकी दर्ज कराने वीरपुर थाना पहुंची तो तत्कालीन थाना प्रभारी ने उनके बताए संदिग्धों कौशल कुमार और रोहित कुमार के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करने से मना कर दिया। पुलिस ने अपनी मर्जी से आवेदन लिखवाया और उस पर तेजस्विनी के हस्ताक्षर लिए। तेजस्विनी का कहना है कि आरोपी उनके पड़ोसी हैं और उन्होंने उसकी मां से जमीन के नाम पर 15 लाख रुपए लिए थे। मौत से पहले लिखा था दो पेज का लेटर रिंकू ने मौत से पहले 2 पेज का एक लेटर लिखा था। कौशल के नाम से लिखे गए इस लेटर में उसने कहा था कि किस तरीके से 15 लाख रुपए का जुगाड़ करके दिया था। किस-किस से कैसे पैसे लिए थे और अब पैसा लौटाना कितनी मजबूरी है। कौशल ने 4 अप्रैल 2021 को ही पैसे लौटाने का वादा किया गया था, लेकिन उसी दिन रिंकू की संदिग्ध मौत हो गई। कोर्ट ने पाया कि स्थानीय पुलिस की जांच में कई बड़े झोल थे, जिन्हें नजरअंदाज किया गया। साढ़े पांच घंटा बंद क्यों रहा CCTV जस्टिस संदीप कुमार ने अपने आदेश में पुलिस की जांच को पूरी तरह से एकतरफा और संदिग्ध बताया। घटना के दिन स्कूल के सीसीटीवी कैमरे सुबह 7:57 बजे बंद हो गए और ठीक दोपहर 1:45 बजे (जब शव बरामद हुआ) फिर से चालू हो गए। पुलिस ने कभी यह नहीं पूछा कि साढ़े पांच घंटे कैमरे बंद क्यों थे, क्या कोई साक्ष्य मिटाया जा रहा था। सिटिंग पोजीशन में आत्महत्या का दावा रिंकू कुमारी का शव पार्शियल हैंगिंग (अर्ध-लटकती हुई स्थिति) में था, जहां उनके मुड़े पैर जमीन को छू रहे थे। मेडिकल विशेषज्ञों और हाईकोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति में हत्या की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन पुलिस ने इसे आत्महत्या मानकर केस बंद करने की जल्दबाजी दिखाई। तत्कालीन थाना प्रभारी ने उसके बताए गए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने के बजाए, अपनी मर्जी से आवेदन लिखवाया और उस पर जबरन हस्ताक्षर कराए। मोबाइल लोकेशन और सीडीआर की अनदेखी पुलिस ने संदिग्धों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स और टावर लोकेशन की जांच में घोर लापरवाही बरती। जिन लोगों पर हत्या का शक था, उनके लोकेशन की गहन जांच नहीं की गई। स्कूल का चपरासी अजीत कुमार घटना के समय मौजूद था। लेकिन उसके बयानों में भारी विरोधाभास था। हाईकोर्ट ने पाया कि पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ करने के बजाय उसे बचाने की कोशिश किया है। क्यों खास है यह फैसला पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष जांच हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि जब स्थानीय पुलिस की जांच किसी विशेष दिशा में मोड़ दी गई हो या प्रभाव में हो, तो संवैधानिक अदालतों का यह कर्तव्य है कि वे दोबारा जांच के आदेश दें। कोर्ट ने तेज तर्रार आईपीएस आईजी विकास वैभव को अपनी टीम खुद चुनने की आजादी दी है और बेगूसराय पुलिस को उन्हें पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। जमीन विवाद और 15 लाख रुपए का एंगल याचिकाकर्ता तेजस्विनी के अनुसार यह कोई साधारण आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। आरोपियों ने रिंकू कुमारी से जमीन दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपए लिए थे। 4 अप्रैल 2021 को ही इन पैसों को वापस करने के लिए पंचायत बुलाई गई थी। आरोप है कि पैसे नहीं लौटाने पड़े, इसलिए वार्डन की हत्या कर दी गई और उसे सुसाइड का रूप देने के लिए स्कूल प्रशासन के साथ मिलकर साजिश रची गई। विकास वैभव को क्यों सौंपी गई जांच पटना हाईकोर्ट ने माना कि बेगूसराय पुलिस के निचले स्तर के अधिकारी इस मामले में न्याय नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि निष्पक्ष जांच नागरिक का मौलिक अधिकार है। आईजी विकास वैभव को यह जिम्मेदारी देने के पीछे का उद्देश्य जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने उन्हें खुली छूट दी है कि वे अपनी टीम खुद चुनें और बेगूसराय पुलिस को सख्त निर्देश दिया है कि वे विकास वैभव की टीम को हर संभव सहयोग प्रदान करें। क्या होती है डी नोवो (De Novo) जांच कानूनी भाषा में डी नोवो जांच का मतलब है शून्य से शुरुआत। अब विकास वैभव और उनकी टीम पुरानी चार्जशीट या पुलिस की पुरानी थ्योरी को आधार नहीं बनाएगी। वे नए सिरे से चश्मदीदों के बयान लेंगे, फॉरेंसिक साक्ष्यों की दोबारा जांच करेंगे और उन कड़ियों को जोड़ेंगे, जिन्हें वीरपुर थाना की पुलिस ने जानबूझकर छोड़ दिया था। यह जांच अब शुरू से होगी, जिसमें पुराने सबूतों और बयानों पर निर्भर रहने के बजाय नए सिरे से सत्य की खोज की जाएगी। आदेश है पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी इस आदेश के बाद मृतका की बेटी तेजस्विनी को न्याय की एक नई उम्मीद जागी है। पांच साल इंतजार और सिस्टम से लड़ने के बाद अब उम्मीद है कि इस रहस्यमयी मौत का सच सामने आएगा। यह मामला केवल एक हत्या या आत्महत्या का नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर सवाल है। कैसे एक संवेदनशील मामले में साक्ष्यों को नजर अंदाज किया गया। कोर्ट का यह आदेश उन पुलिस अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो जांच में कोताही बरतते हैं। ‘घर से निकलते समय मां ने कहा था खाना खा लेना’ तेजस्विनी ने बताया कि सुबह 6 बजे मां जब घर से निकल रही थी तो उस समय हम तीनों बहन सोई हुई थी। मां जगा कर बोली कि खाना खा लेना, हम शाम तक आ जाएंगे। दोपहर में खाना खाने से पहले फोन आया कि मां ने आत्महत्या कर लिया। हम लोग वहां पहुंचे तो मां की लाश फर्श पर पड़ी हुई थी। स्थानीय लोगों ने फोटो दिखाया की मां फंदे से लटकी हुई है और पैर मोड़कर घुटने के बल बैठी हुई थी। FIR दर्ज कराने गए तो थानाध्यक्ष समरेंद्र कुमार ने कहा कि हम जैसा कहते हैं वैसा लिखो। हम नाम दे रहे थे, लेकिन उसने नाम नहीं दिया, सही तरीके से इन्वेस्टिगेशन नहीं किया। कोर्ट में नालिसी दायर किया तो ट्रायल शुरू हुआ, 9 अप्रैल 2025 को केस डिस्टिक कोर्ट ने क्लोज कर दिया। पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट में आत्महत्या साबित किया था। इस बीच में हम लोग मानवाधिकार चले गए थे। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस क्लोज होने पर पटना हाई कोर्ट के वकील आकांक्षा मालवीय ने काफी सपोर्ट किया और मेरी तरफ से कोर्ट में सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए। हाईकोर्ट के आदेश से जगी न्याय की उम्मीद तेजस्विनी का कहना है कि अब कोर्ट के आदेश पर फिर से जांच शुरू हो रही है। न्याय मिल जाता तो पटना नहीं जाते, लेकिन अब न्याय की उम्मीद जगी है। लगता है कि मेरी मां की मौत का राज खुल जाएगा। पुलिस अगर उसी समय सही से जांच करती तो न्याय मिल जाता। हम लगातार गुहार लगाते रहे थे कि अच्छे से जांच किया जाए, लेकिन कोई देखने के लिए तैयार नहीं हुआ। एसपी, डीएम, डीआईजी, डीजीपी सबको आवेदन भेजें। यह करते-करते थक गए।
