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आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटरों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला मानी जाने वाली इन कर्मियों का कहना है कि उनके कार्य के अनुरूप न तो सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है और न ही उन्हें सरकारी कर्मचारी या श्रमिक का दर्जा प्राप्त है। संगठन के अनुसार, अगस्त 2025 से आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबे समय से लंबित है। लगातार संघर्ष और बातचीत के बाद भुगतान प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने संघीय प्रतिनिधिमंडल को बताया है कि फिलहाल मार्च 2026 तक की ही राशि का भुगतान संभव है, क्योंकि पर्याप्त बजटीय आवंटन उपलब्ध नहीं है। संगठन ने सरकार से सभी लंबित प्रोत्साहन एवं पारितोषिक राशि के अद्यतन भुगतान के लिए तत्काल पर्याप्त आवंटन जारी करने की मांग की है। शैक्षणिक प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर होना चाहिए
आशा कर्मियों ने वेलनेस सेंटर पर कार्य के एवज में देय एक हजार रुपये प्रति आशा का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, मोबाइल रिचार्ज और पोशाक भत्ता में महंगाई के अनुरूप वृद्धि तथा आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर बंद की गई आशा आईडी को तत्काल बहाल करने की भी मांग की गई। संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्ति की आयु का निर्धारण शैक्षणिक प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर होना चाहिए। संगठन ने सभी आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, न्यूनतम 26 हजार रुपये मासिक वैधानिक मजदूरी, 10 लाख रुपये सेवानिवृत्ति लाभ और 10 हजार रुपये मासिक पेंशन सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। उन्होंने बिहार सरकार की ओर से 10 हजार रुपये मासिक मानदेय, संसद में घोषित बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि का एरियर सहित भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, श्रमिक का दर्जा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मियों का नियमितीकरण तथा स्वास्थ्य क्षेत्र पर सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करने की भी मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

