
Taslima Nasreen West Bengal: बांग्लादेश की चर्चित एवं निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन करीब 20 साल के लंबे इंतजार के बाद अगले महीने कोलकाता लौटने जा रही हैं. वह 1 अगस्त 2026 को शहर के प्रतिष्ठित रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले कट्टरपंथ-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में शिरकत करेंगी.
2007 में तसलीमा को छोड़ना पड़ा था कोलकाता
वर्ष 2007 में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद तसलीमा को कोलकाता छोड़ना पड़ा था. पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार इसे धार्मिक कट्टरपंथ के आगे न झुकने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने की नीति के रूप में पेश कर रही है.
20 साल बाद कोलकाता वापसी का जश्न
तसलीमा नसरीन ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये अपनी कोलकाता वापसी की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि वह रवींद्र सदन में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगी, जहां उनके कविता पाठ करने की संभावना है.
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शुभेंदु अधिकारी होंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
21 नवंबर 2007 को तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के कट्टरपंथी ताकतों के आगे घुटने टेक देने के कारण उन्हें मजबूरी में यह शहर छोड़ना पड़ा था. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मुख्य अतिथि होंगे.
3 संगठनों ने मिलकर किया है आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन सेक्युलर मिशन, पश्चिमबंगेर जोन्नो और ह्यूमन राइट्स बियांड फ्रंटियर्स ने मिलकर किया है. धर्मनिरपेक्ष और कट्टरपंथ-विरोधी संगठनों के संयुक्त मंच के मोहित रॉय ने कहा कि कार्यक्रम तसलीमा नसरीन के लगभग 20 साल बाद कोलकाता लौटने का ऐतिहासिक जश्न है.
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क्या था वर्ष 2007 का ‘द्विखंडिता’ विवाद?
तसलीमा नसरीन की चर्चित आत्मकथा ‘द्विखंडिता’ के कुछ अंश प्रकाशित होने के बाद कोलकाता में चरमपंथी ताकतों ने हिंसक प्रदर्शन और उपद्रव किया था. परिस्थिति को संभालने में विफल रहने पर तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने सुरक्षा का हवाला देते हुए नसरीन को कोलकाता छोड़ने का निर्देश दिया था.
कोलकाता से जयपुर और दिल्ली
तसलीमा नसरीन को उस समय कोलकाता से पहले जयपुर और फिर दिल्ली स्थानांतरित किया गया था. बाद में केंद्र सरकार की ओर से उन्हें भारत में लंबे समय तक रहने की अनुमति (Residential Permit) और मल्टीपल-एंट्री वीजा दी गयी थी. अब करीब 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उनका कोलकाता आना शहर के बौद्धिक वर्ग में खासा उत्साह भर रहा है.
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