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भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पीड़ित पक्ष की गवाही दर्ज हो चुकी है। अब सोमवार से पुलिस वालों की गवाही हो रही है। न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष और पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा के निर्देश पर दोनों पक्षों के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हैं। सबसे पहले एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मलाकार ने बयान दर्ज कराया। इसके बाद एसटीएफ के एक अधिकारी की गवाही भी शुरू हुई। अधिकारियों के अनुसार कई गवाहों की गवाही एक-एक घंटे से अधिक समय तक चली और हर बयान को रिकॉर्ड किया गया। पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी कराई जा रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों के मुख्य गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपा जाएगा। जांच पूरी होने के पाद अंतरिम रिपोर्ट भी दी जाएगी। इसके अलावा आम लोगों से भी सबूत मांगे जाएंगे। परिजन-पुलिस दोनों के बयान अलग-अलग हैं आयोग के सचिव सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 11 जुलाई से पीड़ित पक्ष की गवाही शुरू हुई थी। इस दौरान मृतक भरत तिवारी के परिवार के सदस्यों और घटना के समय विस्थापित रहे ग्रामीणों सहित 6-7 प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पीड़ित पक्ष ने कहा था भरत तिवारी की हत्या की गई, जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि भरत तिवारी के पास अवैध हथियार था और पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। आयोग दोनों पक्षों के दावों, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का जांच कर रहा है।
हर गवाह को पूरा समय दिया जा रहा आयोग ने बताया कि उसका उद्देश्य किसी भी पक्ष की जल्दबाजी में पुष्टि या खंडन करना नहीं, बल्कि सभी तथ्यों-साक्ष्यों को निष्पक्ष रूप से दर्ज करना है। इसलिए हर गवाह को पूरा समय दिया जा रहा है। गवाही खत्म होने से पहले आयोग की ओर से गवाह से पूछा जाता है कि क्या वह और कुछ कहना चाहता है। जब गवाह यह कह देता है कि उसे और कुछ नहीं कहना है, तभी उसकी गवाही पूरी मानी जाती है। जो भी गवाह अपने स्तर से जो कुछ बताता है, उसे उसी रूप में दर्ज किया जाता है। केवल किसी तथ्य में भ्रम-स्पष्टीकरण की आवश्यकता होने पर आयोग की ओर से प्रश्न पूछे जाते हैं।
पुलिस वालों की गवाही एक-दो दिन में पूरी होने की संभावना जांच अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में पीड़ित पक्ष की गवाही लगभग पूरी हो चुकी है। अब दूसरे पक्ष यानी पुलिस प्रशासन के प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, जो अगले एक-दो दिनों में पूरे होने की संभावना है। इसके बाद आयोग एक अंतरिम रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगा। हालांकि यह रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक नहीं की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से आयोग को पूरी जांच के लिए 6 माह का समय दिया गया है। विस्तृत जांच और अतिरिक्त साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी।
आम लोगों को भी मिलेगा मौका
जो अब तक किसी कारणवश उपस्थित नहीं हो सके हैं, उन्हें भी दूसरा अवसर दिया जाएगा। इनमें स्थानांतरित पुलिसकर्मी, एसटीएफ के अधिकारी और अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। दूसरे चरण की तिथि अंतरिम रिपोर्ट के बाद तय की जाएगी। सुनवाई के दौरान भरत तिवारी के कथित फेसबुक लाइव वीडियो और मोबाइल फोन को लेकर भी सवाल उठाए गए। सचिव ने कहा कि उनके समक्ष अब तक ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो कि लाइव वीडियो डिलीट किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि जब्त मोबाइल या उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्य किसी न्यायालय में लंबित आपराधिक मामले का हिस्सा हैं, तो उनका परीक्षण और निर्णय संबंधित न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में होगा।
अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचा उचित नहीं आयोग ने स्पष्ट किया कि अब तक दर्ज गवाहियों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। जांच अभी जारी है और रिकॉर्ड का खुलासा करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुकूल नहीं है। दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा है और आयोग सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण कर रहा है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि यदि किसी पक्ष को गवाहों के बयान की प्रमाणित प्रति चाहिए, तो वह आयोग को आवेदन देकर प्राप्त कर सकता है। अब तक किसी भी पक्ष की ओर से ऐसा आवेदन नहीं मिला है। आयोग ने कहा कि न्यायिक जांच का उद्देश्य सभी पक्षों को समान अवसर देना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष-तथ्यपरक निष्कर्ष तक पहुंचना है। दूसरे चरण में आवश्यकता पड़ने पर आयोग घटनास्थल का भी निरीक्षण कर सकता है।
