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रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ मामले में ED का एक्शन, बंगाल समेत 4 राज्यों में छापेमारी, फंडिंग नेटवर्क का पर्दाफाश

रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ मामले में ED का एक्शन, बंगाल समेत 4 राज्यों में छापेमारी, फंडिंग नेटवर्क का पर्दाफाश

Bengal ED Raids News Today: बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की भारत में अवैध घुसपैठ और मनी लाउंडरिंग (धनशोधन) मामले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों समेत 4 राज्यों में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की.

विदेशी फंडिंग वाले गिरोह का नेटवर्क खंगाल रहा ईडी

ईडी से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी विशेष रूप से एक ऐसे गिरोह के वित्तीय नेटवर्क को खंगाल रही है, जो विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत एक चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिये संचालित हो रहा था. इस ट्रस्ट को ब्रिटेन (UK) की कुछ संस्थाओं से मोटी फंडिंग की जा रही है.

बंगाल के 3 जिलों समेत 13 ठिकानों पर रेड

ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत शुरू की गयी इस कार्रवाई में पश्चिम बंगाल के 3 सीमावर्ती जिले उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद प्रमुख केंद्र रहे. बंगाल के इन तीन जिलों के अलावा दिल्ली के जामिया नगर, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (देवबंद) और हरियाणा के बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) में कुल 13 से अधिक ठिकानों पर एक साथ रेड मारी गयी.

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कैसे काम करता था घुसपैठ और बसाने का सिंडिकेट?

ईडी द्वारा वर्ष 2024 में दर्ज किया गया यह मामला मूल रूप से उत्तर प्रदेश एटीएस (UP-ATS) की उस एफआईआर पर आधारित है, जिसमें एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट का खुलासा हुआ था. जांच में बंगाल से जुड़े इस नेक्सस के 2 प्रमुख मॉड्यूल सामने आये हैं.

  1. सीमा पार से घुसपैठ का पहला चरण : पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय एक समूह रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को अवैध तरीके से भारतीय सीमा में दाखिल कराता था.
  2. फर्जी दस्तावेज और पहचान : दूसरा समूह इन घुसपैठियों के लिए जाली पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड और भारतीय पासपोर्ट) तैयार करवाता था. दस्तावेज बनने के बाद इन्हें रोजी-रोटी और रोजगार के बहाने देश के अलग-अलग राज्यों में भेज दिया जाता था.

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6 से 10 हजार की किस्तों में फंडिंग, ई-रिक्शा देकर स्थायी पुनर्वास

एटीएस और ईडी की जांच में सामने आया कि घुसपैठियों को स्थायी रूप से बसाने के लिए एक जटिल वित्तीय ढांचा (Financial Network) तैयार किया गया था. संदिग्धों के खातों, बिचौलियों और फर्जी बैंक अकाउंट्स के माध्यम से 6,000 रुपए, 8,000 रुपए और 10,000 रुपए की छोटी-छोटी किस्तों में पैसे भेजे जाते थे.

आर्थिक पुनर्वास की भी की जाती है व्यवस्था

मनी लाउंडरिंग के जरिये जुटाये गये इस धन का मुख्य उद्देश्य घुसपैठियों को आर्थिक रूप से मजबूत करना था. ट्रस्ट द्वारा उन्हें नियमित आय सुनिश्चित करने के लिए ई-रिक्शा, नकदी या नौकरियां उपलब्ध करायी जाती थीं. फिलहाल केंद्रीय एजेंसी बंगाल में नेटवर्क से जुड़े स्थानीय बिचौलियों और ट्रस्ट के बैंक खातों के दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है.

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