Thursday, July 16, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

बिहार में बारिश से बढ़ा डेंगू का खतरा:स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 180 से कम मरीज, 318 फॉगिंग मशीनें तैनात


बिहार में मानसून की सक्रियता के साथ ही डेंगू का खतरा बढ़ने लगा है। हालांकि, इस वर्ष अब तक डेंगू के मरीजों की संख्या पिछले साल की तुलना में काफी कम दर्ज की गई है। इसके बावजूद, स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। राज्यभर के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 15 जुलाई तक बिहार में 180 से कम डेंगू मरीज सामने आए हैं। इनमें से लगभग 50 मामले अकेले पटना जिले से दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि समय पर की गई तैयारियों और लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के कारण मरीजों की संख्या नियंत्रित रही है। विभाग ने जुलाई माह को ‘एंटी-डेंगू माह’ घोषित किया है। इस अवधि में स्कूलों, पंचायतों, नगर निकायों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को डेंगू से बचाव के तरीके, मच्छरों की रोकथाम और शुरुआती लक्षणों की पहचान के बारे में जानकारी दी जा रही है। राज्यभर में 318 फॉगिंग मशीनें तैनात की गई हैं मच्छर नियंत्रण के लिए राज्यभर में 318 फॉगिंग मशीनें तैनात की गई हैं। लार्वा को नष्ट करने के लिए एंटी-लार्वा छिड़काव भी नियमित रूप से किया जा रहा है। सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में एनएस-1 एलिसा और आईजीएम एलिसा जांच किट उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अतिरिक्त, आवश्यक दवाओं, प्लेटलेट्स प्रबंधन और अन्य चिकित्सा संसाधनों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। पीएमसीएच में 20 बेड का एक विशेष डेंगू वार्ड भी तैयार किया गया है। पटना में विशेष निगरानी, घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य विभाग की टीम सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने बताया कि डेंगू की रोकथाम केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें आम लोगों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पटना नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार लार्वा सर्वे, एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग का काम कर रही हैं। जहां जलजमाव की शिकायत मिल रही है, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। उनके अनुसार बारिश के बाद अगले दो महीने डेंगू नियंत्रण के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण हैं।
डॉक्टरों की सलाह – बुखार को नजरअंदाज न करें पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने लोगों से अपील की है कि तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द, उल्टी या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि बिना चिकित्सकीय सलाह के एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसी दर्द निवारक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे डेंगू मरीजों में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, आराम करना और समय पर जांच कराना डेंगू के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण है। डॉक्टरों के अनुसार जुलाई से सितंबर तक का समय डेंगू के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है। बारिश के बाद घरों और आसपास जमा साफ पानी में एडीज मच्छर तेजी से पनपता है। इसलिए सप्ताह में कम-से-कम एक दिन घर और आसपास जमा पानी पूरी तरह खाली करें, पानी की टंकियों को ढककर रखें और साफ-सफाई बनाए रखें। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मानसून के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी डेंगू संक्रमण को तेजी से बढ़ा सकती है। ऐसे में सरकारी तैयारियों के साथ-साथ आम लोगों की सतर्कता और सहभागिता ही इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे पीएमसीएच में 20 बेड का समर्पित डेंगू वार्ड तैयार संभावित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) ने भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अस्पताल के राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक (आरएसबी) में 20 बेड का विशेष डेंगू वार्ड तैयार किया गया है। वार्ड में मच्छरदानियों सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां 24 घंटे डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल अटेंडेंट की तैनाती रहेगी। जरूरत पड़ने पर मरीजों को नए रेडियोलॉजी भवन की आधुनिक जांच सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा, जिससे जांच और उपचार में किसी तरह की देरी न हो।
पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में डेंगू मरीजों के इलाज के लिए सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त बेड की व्यवस्था भी की जाएगी।

निजी अस्पतालों और लैब को भी दिए गए निर्देश स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सभी संस्थानों को कहा गया है कि डेंगू के संदिग्ध और पुष्ट मामलों की जानकारी तत्काल स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं। इस व्यवस्था का उद्देश्य संक्रमित क्षेत्रों की जल्द पहचान कर वहां फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और अन्य रोकथाम उपायों को तुरंत लागू करना है। विभाग का मानना है कि समय पर सूचना मिलने से संक्रमण के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles