![]()
रांची में लग चुके हैं साढ़े तीन लाख मीटर, 3 लाख से अधिक हो चुके हैं प्रीपेड
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी ऑथोरिटी (सीईए) के द्वारा नियमों में किए गए बदलाव का असर रांची और झारखंड के बिजली कंज्यूमरों पर भी पड़ेगा। सीईए ने स्मार्ट मीटर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। जिसमें ऑथोरिटी ने नियमों में बदलाव करते हुए स्मार्ट मीटरों के लिए प्रीपेड बिलिंग की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब प्रीपेड सुविधा उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक हो गई है। संचार नेटवर्क वाले इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय-सीमा के अनुसार जारी रहेगा। केंद्र ने साफ कहा है कि किसी भी उपभोक्ता पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर जबरदस्ती नहीं थोपा जाएगा। हालांकि इसका असर स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर नहीं पड़ेगा। मगर अब कंज्यूमर अपनी इच्छा से प्री-पेड या पोस्टपेड मोड का इस्तेमाल कर सकते हैं। अभी तक इसको लेकर जेबीवीएनएल ने कोई गाइड लाइन या दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है। अगर रांची की बात करें तो यहां शुरुआती सर्वे में 3.70 लाख मीटर रिंग रोड के अंदर के एरिया में लगाने थे, जिसमें 3.60 लाख से अधिक लग चुके हैं और करीब 3 लाख से अधिक प्री-पेड मोड में तब्दील भी हो चुके हैं। उसके आधार पर बिलिंग भी हो रही है। रांची शहर में इस वर्ष के अंत तक शत प्रतिशत कंज्यूमरों को स्मार्ट मीटर से जोड़ने का लक्ष्य है। जहां संचार सुविधा है, वहां स्मार्ट मीटर प्राथमिकता
नई नीति में सीईए ने स्पष्ट किया है कि जहां पर संचार सुविधा है, वहां पर स्मार्ट मीटर को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मगर प्री-पेड के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। हालांकि वर्तमान में जेबीवीएनएल केवल शहरों में ही स्मार्ट मीटर लगवाने का काम कर रहा है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के मार्च 2026 के आदेश में स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर के बीच अलग बिजली दर नहीं रखी गई है। ऊहापोह में जेबीवीएनएल
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने अगस्त तक सभी सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगा कर बिजली घाटा और एंटीएंडीसी लोस कम करने का निर्देश दिया है। इसके बाद सभी सरकारी भवन में स्मार्ट मीटर लगाने का काम जारी है। नई नीति एवं गाइडलाइन से जेबीवीएनएल के समक्ष ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जो भी नया बदलाव होगा, उसका पालन किया जाएगा
ऐसे नए बदलाव और नयी नीति की आधिकारिक जानकारी या डॉक्यूमेंट्स जेबीवीएनएल के पास नहीं है। जब ऐसी कोई जानकारी आधिकारिक रूप से आएगी, तब देखेंगे। जो भी नई नीति या बदलाव होंगे, उसका पालन किया जाएगा। – पीके श्रीवास्तव, निदेशक, जेबीवीएनएल


