Wednesday, July 22, 2026

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सिल्ली, तमाड़ और खिजरी में 99 प्रतिशत फॉर्म बंटे, रांची में 10, हटिया में 20% वोटर अब भी छूटे


रांची जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के तहत मतदाता सूची के सत्यापन में रांची जिले के ग्रामीण काफी आगे निकल गए हैं, जबकि शहरी अब भी पिछड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विधानसभा क्षेत्र अब शत-प्रतिशत फॉर्म वितरण के करीब हैं। अब तक जिले के 26.74 लाख मतदाताओं में से 24.40 लाख यानी 85 प्रतिशत मतदाताओं तक एन्यूमरेशन फॉर्म पहुंच चुका है। जबकि 14.48 लाख फॉर्म का डिजिटलाइजेशन भी पूरा हो गया है, जो 54.15 प्रतिशत है। इसमें सबसे अच्छी स्थिति सिल्ली, तमाड़ और खिजरी विधानसभा की है, जहां 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। दूसरी ओर शहरी आबादी वाले रांची और हटिया विधानसभा अभी भी सबसे पीछे हैं, जहां अभी भी करीब 20 प्रतिशत मतदाताओं तक फॉर्म नहीं पहुंच पाया है। रांची में अभी तक मात्र 89.36 प्रतिशत और हटिया में 79.40 प्रतिशत मतदाताओं तक ही फॉर्म पहुंचा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से 20 जुलाई को शहरी क्षेत्र के सभी मतदान केन्द्रों पर विशेष कैंप लगाया जाएगा। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलने वाले इस शिविर में जिन मतदाताओं को अब तक एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं मिला है, उन्हें फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, जिन लोगों ने फॉर्म भर लिया है लेकिन अभी तक जमा नहीं किया है, वे भी इसी शिविर में अपना फॉर्म जमा कर सकेंगे। मतदाताओं की मैपिंग भी की जाएगी। विधानसभावार फॉर्म और डिजिटलाइजेशन की स्थिति विधानसभा फॉर्म वितरण जमा तमाड़ 99.75% 67.66% सिल्ली 99.65% 67.10% खिजरी 99.27% 59.97% मांडर 97.97% 67.99% कांके 86.77% 50.79% रांची 89.36% 40.77% हटिया 79.40% 42.08% जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बीएलओ को मतदाता घरों पर आसानी से मिल रहे हैं, वहीं शहरी इलाकों में अपार्टमेंट कल्चर, नौकरी-पेशा लोगों का दिनभर घर से बाहर रहना, किरायेदारों का लगातार बदलना और बड़ी संख्या में बंद मकान की वजह से अभियान की रफ्तार धीमी है। इसी वजह से शहरी विधानसभा क्षेत्र फॉर्म वितरण और डिजिटलाइजेशन दोनों में पिछड़ रहे हैं। जबकि, ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता स्थायी रूप से गांवों में रहते हैं। अधिकांश परिवार एक ही स्थान पर उपलब्ध रहते हैं, जिससे बीएलओ को घर-घर पहुंचने और फॉर्म भरवाने में आसानी हो रही है। जनप्रतिनिधियों और पंचायत स्तर पर भी अभियान को सहयोग मिल रहा है।

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