![]()
मधुबनी में 20 जुलाई को भाकपा (माले) जिला कमेटी के नेतृत्व में एक विशाल प्रतिवाद मार्च निकाला गया। यह मार्च जंतर-मंतर पर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और आइसा के केंद्रीय नेताओं के साथ एकजुटता के समर्थन में आयोजित किया गया था। राष्ट्रव्यापी छात्र-युवा आक्रोश दिवस के तहत सैकड़ों छात्र-युवाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया। दोपहर 2 बजे मधुबनी रेलवे स्टेशन परिसर से शुरू हुआ यह मार्च प्रधान डाकघर, थाना चौक और वॉटसन स्कूल होते हुए समाहरणालय पहुंचा। मार्च का नेतृत्व भाकपा (माले) के जिला सचिव कॉमरेड ध्रुव नारायण कर्ण कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की शिक्षा, छात्र-युवा और लोकतंत्र विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। समाहरणालय पहुंचने के बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक के समक्ष एक सभा का आयोजन किया गया, जिसके साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव ध्रुव नारायण कर्ण ने देश की शिक्षा व्यवस्था को गंभीर संकट में बताया। उन्होंने लगातार पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कथित विफलताओं पर चिंता व्यक्त की, जिससे करोड़ों छात्र-युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। कर्ण ने आरोप लगाया कि सरकार समस्याओं का समाधान करने के बजाय छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। वक्ताओं ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-युवाओं पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की निंदा की और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। सभा में पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, एनटीए को भंग कर पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त, पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक और आंदोलनरत छात्र-युवा नेताओं पर की गई कार्रवाई वापस लेने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग भी की गई।
मार्च और सभा में श्याम पंडित, भूषण सिंह, उत्तिम पासवान, मयंक कुमार, योगनाथ मंडल, विजय कुमार दास, अजीत ठाकुर, नवल किशोर यादव, पुनेन्दु कुमार, विशंभर कामत, योगेन्द्र यादव, मदन चंदर झा, प्रेम ठाकुर, महाकांत यादव, रामबिलास सदाय, सुनीता सदाय, योगेन्द्र महतो सहित जिला कमेटी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का समापन छात्र-युवाओं के अधिकारों, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष को तेज करने के संकल्प के साथ हुआ।
