Daldal Web Series: मुंबई में अपराध के ‘दलदल’ की दहशत… भूमि पेडनेकर की एक्टिंग का दम देखने लायक

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Daldal Web Series: मुंबई में अपराध के 'दलदल' की दहशत... भूमि पेडनेकर की एक्टिंग का दम देखने लायक

दलदल वेब सीरीज

Daldal Web Series Hindi: नेटफ्लिक्स पर ‘दलदल’ वेब सीरीज देखने के बाद कई बातें दिलों दिमाग पर एक साथ दस्तक देती हैं. एक तो ‘दलदल’ साफ करना आसान नहीं होता, दूसरे कि ‘दलदल’ को साफ करने के लिए भी ‘दलदल’ में उतरना पड़ता है. नेटफ्लिक्स का ये ‘दलदल’ यकीनन अपराध का जंजाल है. महानगरों में जितने भी अपराध होते हैं, वे सब यहां देखने को मिलते हैं. और इस नेक्सस को ध्वस्त करने के लिए जब शासन-प्रशासन जोर आजमाइश करता है तो नाकों चने चबाने पड़ते हैं. वेब सीरीज में पुलिस अफसर रीता फरेरा बनीं भूमि पेडनेकर इसी नेक्सस पर विजय पाने के मिशन पर जुटी हैं.

अमृत राज गुप्ता के निर्देशन में बनी ‘दलदल’ वेब सीरीज की बुनावट बड़ी जटिल है. आम तौर पर किसी भी क्राइम सीरीज की तरह है. लेकिन यहां क्राइम के साथ साइको प्रॉबलम भी है. एक सीरियल किलर के साइको प्रॉबलम का सोशल इमोशनल टच भी दिया गया है. उसके पीछे मां की यादें और उसकी ममता भी. इसलिए यह सीरीज थोड़ी अलग हो जाती है. एक साथ कई मसालों का मिक्सचर. भूमि पेडनेकर के साथ ही आदित्य रावल और समारा तिजोरी की एक्टिंग ने सीरीज को आकर्षक बना दिया है.

मुंबई में चकाचौंध नहीं अंधेरे का साम्राज्य

फिल्मों के अलावा अगर ओटीटी सीरीज की ही बातें करें तो द रॉयल्स, लस्ट स्टोरीज, भक्षक और मैन्स वर्ल्ड आदि के बाद भूमि पेडनेकर का यहां दमदार रोल एक बार फिर से देखने को मिलता है. कहानी मुंबई जैसे महानगर के बैकग्राउंड की है, लेकिन यहां चकाचौंध नहीं बल्कि अंधेरे का साम्राज्य है. कहानी बताती है कोई भी महानगर महज बहुमंजिली अट्टालिकाओं, फ्लाइओवर्स, अंडरग्राउंड मेट्रो, फाइव स्टार होटलों की पार्टियों और चमचमाती रोशनियों के लिए ही नहीं जाने जाते. महानगरों की इन दीवारों के बीच अपराध की परछाइयां भी उतनी ही खतरनाक और घनीभूत होती हैं.

कोई आश्चर्य नहीं कि अपराधी इन्हीं लूप होल्स के फायदे उठाकर एक दिन साजिद (आदित्य रावल) और अनंत बनाम अनीता आचार्य (समारा तिजोरी) की तरह एक समानांतर ताकत बन जाते हैं और शहरी सभ्यता को चुनौती देने लगते हैं. भले ही उनके बैकग्राउंड कितने भी दर्दनाक हों लेकिन जब दहशत के पर्याय बन जाते हैं तो कानून की नजर में विलेन कहलाते हैं, जिनका खात्मा कानून का मकसद होता है. कानून को अपराधी के बैकग्राउंड से कोई सहानुभूति नहीं होती.

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साइको प्रॉबलम दोनों तरफ है

सात एपिसोड्स की इस वेब सीरीज में ऐसे ही हालात को हैंडल करने के लिए डीसीपी रीता फरेरा (भूमि पेडनेकर) को सामने लाया जाता है. उसे डीसीपी बनाया जाता है. महानगर में महिला अपराध पर काबू पाने के लिए एक महिला पुलिस अफसर को जिम्मेदारी दी जाती है. लेकिन साइको किलर की एक जोड़ी उसके लिए चुनौती बन चुकी है. सीरीज का सबसे दिलचस्प पहलू अपराधी और पुलिस अफसर के बचपन के दिनों की यादों में समानता है. रीता फरेरा जिन मुश्किलों को झेलकर बड़ी होती हैं, वैसी ही समस्या का सामना करते हुए अनीता आचार्य दिन के उजाले में जर्नलिस्ट है लेकिन रात के अंधेरे में किलर. वह धीरे-धीरे अपराध के दलदल में फंस जाती है और साइको किलर बन जाती है. मां की ममता को दोनों ही बचपन में ही खो चुकी हैं.

आक्रोश दोनों तरफ है. रीता फरेरा का गुस्सा हर अपराध के खिलाफ है तो अनीता आचार्य का सिस्टम के खिलाफ. साइको प्रॉबलम दोनों के साथ है. यह कहानी स्कूल में बच्चियों के अपहरण कांड से शुरू होती है. रीता फरेरा को पहले से पता है कि इस स्कूल में गलत काम हो रहा है. इसीलिए वह अंडर कवर टीचर के तौर पर पढ़ाना शुरू करती है और अपराध की तह तक जाने के मिशन में जुट जाती है.

क्राइम की कहानी में मां की भी यादें

श्रीकांत अग्निस्वरन, रोहन डिसूजा, हुसैन हैदरी, प्रिया सग्गी और सुरेश त्रिवेणी की टीम द्वारा प्रस्तुत ‘दलदल’ वेब सीरीज की कहानी का सबसे भावुक पहलू इसमें मां का कनेक्शन है. कहानी की शुरुआत में ही एक बच्ची को बचाने के क्रम में उसकी मां की मौत हो जाती है और वह घटना बार बार रीता फरेरा और अनीता आचार्य के चरित्र चित्रण के दौरन रेफ्रेंस बन कर बिजली की तरह कौंधती रहती है. पुलिस अफसर रीता और किलर अनीता ने भी अपने-अपने बचपन में मां को खोया था. क्राइम थ्रिलर में मां की यादों और ममता वाला कनेक्शन सीरीज को वजन प्रदान करता है.

लेकिन इसके अलावा दो और बातें विशेष तौर पर उल्लेखनीय है- एक, भूमि पेडनेकर की एक्टिंग और दूसरी, सिनेमैटोग्राफी. इन दोनों ही मोर्चे पर दलदल एक मस्ट वॉच वेब सीरीज बन गई है. भूमि पेडनेकर के किरदार की अपनी मनोभूमि है. वह जांबाज पुलिस ऑफिसर है. लेकिन उसकी निजी समस्याएं उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है. उन्हीं समस्याओं के चलते वह अपने आवेग पर काबू नहीं रख पाती. वह गुस्सैल है, चिड़चिड़ी है और महत्वाकांक्षी भी. भूमि ने इस किरदार के मनोविज्ञान को बखूबी जीकर दिखाया है.

रोशनी से संवाद करता अंधेरा

हालांकि दूसरी तरफ अनंत बनाम अनीता आचार्य के किरदार को समारा तिजोरी ने भी उसी जज्बे के साथ निभाया है. समारा के अलावा आदित्य राउत, अनंत महादेवन, गीता अग्रवाल शर्मा आदि का अभिनय भी उतना ही उम्दा है. लेकिन सबसे अहम तो दलदल में राकेश हरिदास की सिनेमैटोग्राफी है. रात के वक्त समंदर का किनारा हो या क्रिमिनल्स की अंधेरी सुरेंगें… हर शॉट और हर फ्रेम में रोशनी की लकीर खिंच जाती है. यहां अंधेरा भी संवाद करता है.

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