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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को कटिहार में विपक्षी दलों ने छात्र आंदोलन की जीत बताया है। इस संबंध में भाकपा (माले) के पूर्व विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि प्रधान ने स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि छात्र संघर्ष ने उन्हें ऐसा करने के लिए बाध्य किया। महबूब आलम ने इस घटना को संविधान और लोकतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन ने “अहंकार और तानाशाही की राजनीति” को चुनौती दी है। आलम ने यह भी उल्लेख किया कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ और कई छात्रों की जान गई। सत्ता के अहंकार को झुकाने का काम किया
पूर्व विधायक ने मांग की कि मृत छात्रों की स्मृति में स्मारक बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं, घायल छात्रों का सरकारी खर्च पर इलाज कराया जाए, घायल छात्रों को ₹2-2 लाख और मृत छात्रों के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। आलम ने छात्र आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर सत्ता के अहंकार को झुकाने का काम किया है। यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था सर्वोपरि
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश सचिव और युवा छात्र नेता आशु पांडे ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि भारत महात्मा गांधी का देश है और यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था सर्वोपरि है। पांडे ने जोर दिया कि देश लोकतंत्र के सिद्धांतों से चलेगा और तानाशाही की किसी भी कोशिश का जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।

