आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने आओ राजनीति करें अभियान के तहत मंगलवार को शहर के स्टेशन रोड स्थित आजीविका में छात्राओं से ‘हमारा नेता कैसा हो’ विषय पर राय रखने का…
आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने आओ राजनीति करें अभियान के तहत मंगलवार को शहर के स्टेशन रोड स्थित आजीविका में छात्राओं से ‘हमारा नेता कैसा हो’ विषय पर राय रखने का मौका दिया। इस दौरान छात्राओं का पूरा फोकस शिक्षा और स्वास्थ्य पर ही रहा। उन्होंने कहा कि हम वैसे नेता का चुनाव करेंगे जो शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार लाए। क्योंकि आज कल के नेताओं के आदत में शामिल हो गया है वादा करके मुकर जाना।
छात्राओं ने कहा कि जिस दिन से नेता जी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना शुरू कर देंगे शिक्षा में अपने आप सुधार आ जाएगा। वर्तमान स्थिति में बिहार में शिक्षा की हालत चौपट है। सरकारी स्कूलों में तो पढ़ाई की स्थिति बद से भी बदतर है। कायदे के शिक्षकों का अभाव है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर प्राइवेट स्कूलों में जा रहे हैं। अगर सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिले तो शिक्षा का बाजारीकरण स्वत: खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ इसी तरह की स्थिति स्वास्थ्य के क्षेत्र में है। शहर के बड़े सरकारी अस्पतालों में रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। परिजन अपने मरीज को सीधे बाहर लेकर जाते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक एवं अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का हाल और भी बुरा है।
छात्राओं ने कहा कि कहा कि आज महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। रोजना जो खबर आती है उसे भी देखकर कम से कम नेताओं को पहल करनी चाहिए। हम लोग महिलाओं को वोट देने के लिए जागरुक करेंगे। हमारी कोशिश रहेगी कि मम्मी-पापा ही नहीं आस पड़ोस की एक भी महिलाएं वोट देने से वंचित नहीं रहे। कहा कि योग्य और इमानदार नेताओं को ही चुनेंगे।
महिलाओं को राजनीति में दिलचस्पी दिखाना होगा
महिलाओं को तरजीह देने में राजनीतिक दल दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में बक्सर और ब्रह्मपुर से दो महिलाओं का टिकट काटकर पुरुष को दे दिया गया। यह कहां का इंसाफ है। महिलाओं के लिए आरक्षण देने की बात करना सीधे बेमानी साबित हो रहा है। छात्राओं ने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में भी महिलाओं को पुरुषों के बराबर तरजीह देने की आवश्यकता है। आज के परिवेश में महिलाएं अपने को ठगी हुईं महसूस कर रही हैं।
विकास के मुद्दे पर कार्य करने वाला ही प्रत्याशी हमारा नेता होगा। वैसे इस बार अपने यहां के प्रत्याशियों को ही वोट करेंगे, क्योंकि वहीं अपनों का दर्ज बेहतर तरिके से समझेगा। बहार से थोपे गए प्रत्याशी क्षेत्र की जनता की समस्या को दूर करने में असफल रहे हैं।
-तान्या कुमारी
इस बार वोट वैसे ही प्रत्याशी को देंगे जो प्रतिनिधि नहीं बल्कि सेवक बनकर जनता का कार्य करे। वोट करने से पहले योग्य और इमानदार प्रत्याशी की पहचान करेंगे। अन्य महिलाओं को भी चुनाव में वोट देने के लिए जागरुक करुंगी व वोट की महता बतलाउंगी।
-आफरीन खातुन
महिलाओं की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा है। आज के नेता इस मुद्दे पर कोई काम नहीं कर रहे हैं। इस बार प्रत्याशी के झूठे वादों में फंसने वाले नहीं हैं।सोच बदलने के आवश्यकता है। सुरक्षा के मामले में कार्य करने वाले प्रत्याशियों के पक्ष में ही वोट करे।
-प्रियंका कुमारी केसरी
नेताओं के लुभावने वादे पर विश्वास नहीं करना है। उन प्रत्याशियों को पहचनाने की आवश्यकता है, जो वादे कर जीते हैं और पांच साल में अपना अपना वादा पूरा नहीं किए हैं। वैसे नेता जी को किसी भी सूरत में अपना मत नहीं देंगे।
-सीमा पांडेय
आज हमारा संसदीय क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। रोजगारपरख शिक्षा संस्थानों की कमी है। तकनीकी शिक्षा लेने के लिए हमारे यहां के छात्र-छात्राओं को अन्य राज्यों में जाना पड़ता है। शहर से लेकर गांव तक बेहतर शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए।
-जया कुमारी
चुनाव आते ही प्रत्याशियों की दौड़ शुरु हो जाती है। पहली बार वोट देना है। चुनाव के समय वादा करने वाले प्रत्याशी जीतने के बाद अपने वादे को भुल जाते हैं। काफी सोच समझ कर वोट करने की जरुरत है, ताकि योग्य प्रत्याशी जीतकर संसद में जाए।
-प्रिया कुमारी

