‘हिन्दुस्तान’ के मतदाता जागरूकता अभियान ‘आओ राजनीति करें’ में मंगलवार को शहर के विश्वविद्यालयों और कॉलेज के छात्रों ने हिस्सा लिया। लोकतंत्र के उत्सव में पहली बार भागीदारी करने जा…
‘हिन्दुस्तान’ के मतदाता जागरूकता अभियान ‘आओ राजनीति करें’ में मंगलवार को शहर के विश्वविद्यालयों और कॉलेज के छात्रों ने हिस्सा लिया। लोकतंत्र के उत्सव में पहली बार भागीदारी करने जा रहे युवाओं ने कहा कि राजनेता सिर्फ उनकी आबादी का प्रतिशत न बताएं, बल्कि काम भी करें। अंसल यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम विश्वविद्यालय और द्रोणाचार्य कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने कहा कि जो सभी सांसद बने, उसका युवाओं से जुड़ाव जरूर होना चाहिए। वह हमारे संस्थानों का भी दौरा करें। इसके अलावा छात्रों ने पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की मांग की:
गुरुग्राम यूनिवर्सिटी (जीयू) की संवाद में शामिल हुई सोनिया त्यागी ने कहा कि देश निर्माण में युवाओं की क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल होना चाहिए, चुनाव में जीतने वाले जनप्रतिनिधि उच्च शिक्षा के लिए डीयू-जेएनयू जैसे संस्थान मुहैया कराएं, ताकि छात्र अपने सपनों को पूरा कर सकें। सोनिया ने कहा कि मौजूदा वक्त के हिसाब से डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई पर जोर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने ई-लाइब्रेरी और इंटरनेट-सोशल मीडिया से युवाओं के रूझान को घटाने के लिए खेलकूद में भागीदारी अनिवार्य किए जाने की मांग की। सेक्टर-9 राजकीय कॉलेज के छात्र संघ की अध्यक्ष अंजना चौधरी ने जनप्रतिनिधि के पढ़े-लिखे होने की वकालत की। उन्होंने कहा कि शिक्षा में डिजिटल का समावेश होना चाहिए। अंसल यूनिवर्सिटी की छात्रा अर्शिया ने कहा कि सरकार को जिम्मेदार ठहराने के बजाए युवा जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आएं। देश में सरकार तब तक कुछ नहीं कर सकती जब तक युवा और नागरिक उनका पालन न करें। जिम्मेदारी का अहसास खुद को होना चाहिए। नेता भी कुछ हद तक समस्याओं के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन युवा सिर्फ नेताओं को दोष देता है लेकिन कभी वोट नहीं करता है। जब तक वोट नहीं करेंगे तब तक किसी को दोष देने का अधिकार नहीं है। क्योंकि सरकार, सांसद चुनने में उसके वोट का योगदान नहीं है।
सेक्टर 14 कॉलेज की नेहा ने कहा कि वोट देने से पहले युवाओं को इसका महत्व समझने की जरूरत है। युवा जिस दिन वोट का महत्व समझ जाएगा, उस दिन काफी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। युवा खुद के वोट से देश की किस्मत बदल सकते हैं। चुनाव हो या नौकरी, चयन पारदर्शी होना चाहिए। शिक्षा में पेपर वर्क को कम कर डिजिटल किया जाए। गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के छात्र विशाल ओझा ने कहा कि युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नहीं चाहिए। युवाओं को अधिक से अधिक नौकरी के अवसर चाहिए। शिक्षा का स्तर अभी ठीक नहीं है। बीटेक करने के बाद भी दस से बारह हजार मिलते हैं। शिक्षा का स्तर ऐसा हो कि उसके पूर्ण होने पर बेहतर अवसर मिलें। राज गुप्ता ने कहा कि छात्रों को शोधपरक शिक्षा मिलनी चाहिए। शिक्षा में नैतिक शिक्षा और योग को अवश्य जोड़ा जाए। शिक्षा के बीच का अंतर खत्म किया जाए ताकि सभी को समान अवसर मिल सकें। द्रोणाचार्य कॉलेज की छात्रा रौनक ने कहा कि युवा की उंगली पर ही उसका भविष्य है। युवा शिक्षित और अच्छी सोच वाले नेता को चुनेंगे तो वो बेहतर विकास कर सकेगा। अधिकांश नेता इस समय ऐसे हैं उन्हें खुद के क्षेत्र में आने वाले गांवों के नाम तक नहीं पता हैं। ऐसे में वो उन गांवों का कैसे विकास कर पाएगा? शहर की तरह गांवों में विकास और शिक्षा का स्तर बढ़ाया जाए। संवाद में द्रोणाचार्य कॉलेज के गौरव कटारिया, अंसल यूनिवर्सिटी के छात्र सार्थक, एमिटी यूनिवर्सिटी गुरुग्राम के छात्र सैमुअल नील्सन और देवांग त्यागी ने भी अपने विचार रखे और कहा कि वक्त के हिसाब से पाठ्यक्रम में बदलाव होना चाहिए। इसकी पहले जनप्रतिनिधियों को करनी चाहिए।
रोल मॉडल बने राजनेता
द्रोणाचार्य कॉलेज के छात्र अक्षत कुमार ने कहा कि युवाओं का रोल मॉडल होना चाहिए। यदि देश में विवेकानंद, अब्दुल कलाम जैसे ज्यादा से ज्यादा रोल मॉडल होंगे तो युवा उन्हें देखकर आगे बढ़ेगा। इतिहास की किताबों में ज्यादा से ज्यादा विदेशी के बजाए देश के महान इतिहास को पढ़ाया जाए। भारत को महान कहते हैं लेकिन किसी युवा से पूछा जाए कि भारत कैसे महान है तो वह दो मिनट कुछ नहीं बोल पाएगा। यदि भारत का महान इतिहास पढ़ाया जाएगा तो युवा प्रेरित होकर आगे का रास्ता तय करेगा।
टॉप यूनिवर्सिटी की कमी
द्रोणाचार्य कॉलेज केनिकेश कुमार ने कहा देश में टॉप यूनिवर्सिटियों की कमी है। देश की टॉप यूनिवर्सिटियों में दिल्ली यूनिवर्सिटी, जेएनयू का नाम आता है। लेकिन विश्व में इनकी रैंकिंग टॉप 200 में भी नहीं हैं।
सांसद भी करें मन की बात
द्रोणाचार्य कॉलेज से पढ़ाई कर रहे आशीष कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री की तरह सांसद को क्षेत्र में मन की बात करनी चाहिए। जीतने के बाद पांच साल तक क्षेत्र में लोगों की समस्या जानने के लिए नहीं आते हैं।
युवा बोले- सांसद में हो ये खूबियां
- काम करने की इच्छाशक्ति
- जाति-धर्म के बजाए इंडिया फर्स्ट
- ईमानदार होना चाहिए सांसद
- युवाओं को लेकर साथ चले
- ढ़ांचागत विकास पर ध्यान
- हर क्षेत्र का समान विकास
- संविधान का जरूरी ज्ञान
- अपने काम में रखे पारदर्शिता
- आम लोगों में विश्वसनीय
- जोखिम उठाने वाला
- बेहतर एनालिस्ट हो
- नैतिक ज्ञान-व्यवहार वाला


