झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं, ओएमआर शीट में गड़बड़ी के आरोपों और CID की ताबड़तोड़ जांच के बीच आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है।
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दैनिक भास्कर के साथ एक एक्सक्लूसिव बातचीत में पूर्व चेयरमैन ने न केवल अपने अचानक दिए गए इस्तीफे की वजह का खुलासा किया, बल्कि यूपी में ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा की जिम्मेदारी देने से लेकर पीटी रिजल्ट में सदस्यों के हस्ताक्षर न होने जैसे तमाम तीखे सवालों के बेबाक जवाब दिए।
ख्यांग्ते का साफ तौर पर कहना है कि परीक्षा पूरी तरह तय नियमावली के तहत ही ली गई थी और उन्होंने संस्था में निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करने के लिए बिना किसी बाहरी दबाव के अपनी मर्जी से पद छोड़ा है।
पढ़ें JPSC परीक्षा विवाद पर पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से बातचीत के मुख्य अंश…
सवाल : 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में विवाद है। कई तरह के आरोप हैं। क्या कहेंगे?
जवाब : आयोग ने जो परीक्षा ली वह नियम के मुताबिक ही हुई है। हमने तय नियमावली के अनुसार की परीक्षा प्रक्रिया को पूरा किया है। लेकिन अखबारों और मीडिया में जिस तरह से छापी गई हैं, वहीं से ये सारा विवाद शुरू हुआ है।
सवाल : ओएमआर में गड़बड़ियां और आपको उसकी जानकारी होने के आरोप हैं?
जवाब : ओएमआर में गड़बड़ियां थीं। इसकी जानकारी भी मेरे पास थी। अखबारों में ही इसकी जानकारी थी। बावजूद इसके ये काम एजेंसी और अधिकारियों के जिम्मे होता है। मैंने इसे लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी भी थी। अब यह मामला जांच एजेंसी के पास है। जांच से ही सारी बातें स्पष्ट हो जाएंगी।
सवाल : परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी जिस एजेंसी को दी गई। वह यूपी में ब्लैक लिस्टेड थी। आपने उसे किस आधार पर जिम्मेदारी सौंपी?
जवाब : अगर कोई एजेंसी ब्लैक लिस्टेड होगी तो आयोग क्यों चाहेगा कि उसके साथ मिल कर काम करे। लेकिन ब्लैक लिस्टेड एक टर्म है। यह एक अवधि तक के लिए कई बार होता है। जहां तक चयनीत एजेंसी की बात है तो हमरा पूरा प्रयास रहा कि चयन एकदम फेयर हो। बीते साल 2025 में जब एजेंसी का चयन किया गया तब हम इस बात को लेकर आश्वश्त थे कि वह ब्लैक लिस्टेड नहीं है।

सवाल : पीटी रिजल्ट में सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। क्या तब आयोग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा था?
जवाब : झारखंड लोकसेवा आयोग का रूल्स ऑफ प्रोसिजर 2002 है। उसके मुताबिक पीटी और मुख्य परीक्षा के रिजल्ट में सदस्यों की भूमिका का जिक्र नहीं है। इसी नियम के मुताबिक पीटी के परिणाम में उनकी भूमिका नहीं रखी गई।
सवाल : पूर्व में ली गई परीक्षाओं के परिणाम में सदस्यों की भूमिका और हस्ताक्षर तो हुआ करते थे?
जवाब : पूर्व में ली गई परीक्षा के परिणाम में हस्ताक्षर जरूर रहा करते थे पर रूल में कभी नहीं थे। 2002 में बने रूल में सदस्यों के हस्तक्षर का जिक्र नहीं है। उसमें लिखा है कि फाइनल रिजल्ट में ही उनकी भूमिका होगी।
सवाल : 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में जो अनियमितता और गड़बड़ियां सामने आई है, आपको क्या लगता है ऐसा हुआ है?
जवाब : वैसे तो यह जांच का विषय है। जांच हो रही है। मैंने जब से कार्यभार संभाला तब काफी चैलेंजेज थे। मैंने काफी कुछ किया। जिसके बाद से 2025 से आयोग काम करना शुरू किया। परीक्षाएं हुईं। रिजल्ट भी जारी हुए। आयोग में सुधार की जरूरत थी। उसे मैंने किया।
सवाल : आयोग के अध्यक्ष अचानक से इस्तीफा दे देते हैं। कोई दबाव या कुछ और?
जवाब : मेरा मानना है कि जब किसी संस्थान में जांच हो रही है तो निष्पक्ष जांच के लिए संस्थान के प्रमुख को कदम उठाने चाहिए। मैंने भी अपना इस्तीफा इसी निष्पक्ष जांच के लिए दिया है। मुझे नहीं लगता कि मैंने किसी दबाव में आ कर इस्तीफा दिया है।

9 खास भर्ती परीक्षाओं को स्थगित किया गया है
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में चल रहे विवाद के बीच आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते का इस्तीफा 4 दिन पहले राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया है। वहीं, आयोग ने झारखंड संयुक्त सिविल सेवा मेंस परीक्षा सहित कुल 9 खास भर्ती परीक्षाओं को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है।
14वीं संयुक्त असैनिक सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के रिजल्ट पर सवाल
2 जुलाई 2026 को जारी 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के रिजल्ट के बाद कई उम्मीदवारों ने अनियमितता के आरोप लगाए। उम्मीदवारों का कहना है कि कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए, OMR शीट और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही।
इसके अलावा उम्मीदवारों को मार्क्स भी नहीं बताए गए। ज्यादा मार्क्स होने का दावा करने वाले कुछ उम्मीदवारों का सिलेक्शन नहीं हुआ, जबकि कम मार्क्स वाले उम्मीदवारों का सिलेक्शन हो गया।

परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी पर आरोप
JPSC पर यह आरोप भी है कि आयोग ने ऐसी एजेंसी से कई परीक्षाएं कराईं जिसे उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। आयोग के एक सदस्य ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर चिंता जताई।
CID जांच शुरू
विवाद बढ़ने के बाद झारखंड सरकार ने पूरे मामले की जांच CID को सौंप दी। CID ने JPSC कार्यालय सहित कई स्थानों पर छापेमारी की। CID ने जांच के दौरान डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन सहित परीक्षा से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि परीक्षा संचालन और डेटा प्रोसेसिंग में गंभीर गड़बड़ी हुई।

फिलहाल इन बिंदुओं पर जांच कर रही CID
डिजिटल टैंपरिंग और ओएमआर में फेरबदल :
क्या परीक्षा के बाद सर्वर या ओएमआर शीट में बैकडेट में बदलाव किए गए ?
मनी लॉन्ड्रिंग का कोणः
उम्मीदवारों से वसूली गई मोटी रकम किन-किन खातों में भेजी
अधिकारियों की भूमिका :
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को JPSC ने किस आधार पर परीक्षा संचालन की अनुमति दी।

JPSC ने झारखंड संयुक्त सिविल सेवा मेंस परीक्षा-2025 समेत कुल 9 भर्ती परीक्षाओं को फिलहाल टाल दिया है। आयोग ने कहा है कि परीक्षाओं की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। उम्मीदवारों से केवल आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई है।



