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पटना स्मार्ट सिटी की पुरानी योजना के तहत करीब 6.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार 200 प्री-फैब्रिकेटेड दुकानों को अब कॉम्फेड (सुधा) को सौंपने की तैयारी है। गर्दनीबाग हाई स्कूल के पास रखी इन दुकानों को पहले जीविका को देने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए जीविका को पत्र भी भेजा गया था, लेकिन अब योजना में बदलाव करते हुए दुकानों को कॉम्फेड के सहयोग से राजधानी के प्रमुख स्थानों पर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। पटना स्मार्ट सिटी और कॉम्फेड के बीच दुकानों के संचालन और स्थापना को लेकर समन्वय स्थापित हो चुका है। इन दुकानों पर पटना स्मार्ट सिटी और कॉम्फेड का संयुक्त लोगों लगाया जाएगा। दुकानों को सुधा बूथ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जहां दूध, दही, लस्सी, पेड़ा, आइसक्रीम और बोतलबंद पानी समेत अन्य उत्पादों की बिक्री होगी। इन दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से लोगों या एजेंसियों को दी जाएगी। आचार संहिता समाप्त होने के बाद प्रस्ताव को पटना स्मार्ट सिटी की बोर्ड बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा। बोर्ड की स्वीकृति मिलने के बाद दुकानों की स्थापना और संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पार्क, चौराहों और सरकारी कार्यालयों के पास लगेंगी दुकानें प्री-फैब्रिकेटेड दुकानों को शहर के पार्कों, प्रमुख चौराहों और सरकारी कार्यालयों के आसपास स्थापित करने के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। अब तक करीब 40 स्थानों की पहचान की जा चुकी है। प्राथमिकता के आधार पर पहले पटना शहर के भीतर दुकानों को लगाया जाएगा। शहर के अंदर पर्याप्त जगह नहीं मिलने पर बची हुई दुकानों को बाहरी इलाकों में स्थापित किया जाएगा।
दीघा वेंडिंग जोन की योजना में बदलाव जेपी गंगा पथ पर रोजाना लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम को देखते हुए दीघा वेंडिंग जोन की योजना में भी बदलाव किया गया है। अब इस क्षेत्र को वाहन पार्किंग के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। वेंडिंग जोन में पहले से स्थापित की जा रही दुकानों को हटाकर जगह खाली कराई जा चुकी है। दीघा वेंडिंग जोन के लिए अब वैकल्पिक और उपयुक्त स्थान की तलाश की जा रही है। नई जगह तय होने के बाद वहां दुकानों को स्थापित किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि पार्किंग की सुविधा विकसित होने से जेपी गंगा पथ पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
500 दुकानों से घटकर 50 आधुनिक दुकानों तक पहुंची योजना शुरुआत में जेपी गंगा पथ पर करीब 15 करोड़ रुपए की लागत से 500 दुकानें स्थापित करने का प्रस्ताव था। इस साल जनवरी में दुकानों की संख्या घटाकर 250 कर दी गई। बाद में योजना में फिर बदलाव करते हुए करीब 7.17 करोड़ रुपए की लागत से 50 अत्याधुनिक और ब्रांडेड दुकानें विकसित करने का निर्णय लिया गया।ना करीब 55 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में फैले इस इलाके को महानगरों की तर्ज पर नाइट लाइफ और टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की योजना थी। प्रस्ताव के तहत बड़े राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांडों के साथ स्थानीय वेंडरों को भी दुकानें उपलब्ध कराने की तैयारी थी। हालांकि, ट्रैफिक व्यवस्था और पार्किंग की जरूरत को देखते हुए अब योजना के स्वरूप में बदलाव किया जा रहा है।
