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अंतर-धार्मिक विवाह पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा- वयस्कों को जीवनसाथी चुनने का अधिकार

अंतर-धार्मिक विवाह पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा- वयस्कों को जीवनसाथी चुनने का अधिकार

Calcutta High Court News: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अंतरधार्मिक विवाह पर कहा है कि वयस्क नागरिकों को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है. कोर्ट ने हावड़ा के उलुबेड़िया में बुधवार को होने वाली अंतर-धार्मिक शादी के लिए सुरक्षा देने का निर्देश पुलिस को दिया. इस अंतर-धार्मिक विवाह का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा था. जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने उलुबेड़िया थाना प्रभारी को शांतिपूर्ण विवाह संपन्न कराने और 7 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया.

युवक-युवती की याचिका पर सुनवाई में कोर्ट ने की टिप्पणी

अदालत ने यह टिप्पणी अलग-अलग धर्मों के एक युवक और एक युवती की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें उन्होंने विवाह संपन्न कराने के लिए पुलिस सुरक्षा का अनुरोध किया था. उनके वकील ने दावा किया कि विवाह के फैसले का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किये जाने के कारण उन्हें सुरक्षा संबंधी आशंका है.

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10 अगस्त को होगी केस की अगली सुनवाई

अदालत ने पुलिस को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि विवाह के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो. मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी. हावड़ा (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने मंगलवार को कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जायेगा.

यदि मामला अंतरधार्मिक विवाह का भी है, तब भी इस अदालत को इसमें कोई बाधा नहीं दिखती, क्योंकि याचिकाकर्ता इस देश के वयस्क नागरिक हैं और उन्हें अपने जीवनसाथी का चयन करने का अधिकार है. -जस्टिस सौगत भट्टाचार्य, कलकत्ता हाईकोर्ट

याचिकाकर्ताओं के वकील ने जतायी है विरोध की आशंका

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने हाईकोर्ट को बताया कि विवाह के फैसले को लेकर इलाके में विरोध का माहौल बन गया है. इसलिए आशंका है कि युवक-युवती को विवाह करने से रोका जा सकता है.

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पुलिस ने शांति बनाये रखने के लिए उठाये हैं कदम

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत में उलुबेड़िया थाने के प्रभारी निरीक्षक की एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि इलाके में शांति बनाये रखने के लिए प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाये हैं.

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