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एक करोड़ रुपए के इनामी भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बाद बुधवार को उसके पैतृक गांव गिरिडीह स्थित पीरटांड़ प्रखंड के हरलाडीह ओपी क्षेत्र में दिनभर चर्चा का माहौल रहा। गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद मीडिया गांव पहुंची और मिसिर बेसरा के परिजनों से बातचीत की।मिसिर बेसरा के छोटे भाई देवीलाल बेसरा पेशे से पारा शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि उनका भाई लगभग 40 साल पहले ही गांव छोड़ चुका था। इसके बाद से उसका परिवार से कोई संपर्क नहीं रहा। देवीलाल ने कहा कि उन्होंने कई वर्षों से मिसिर को देखा तक नहीं है और उन्हें गिरफ्तारी की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली। कुछ वर्ष पहले बेटी का हुआ था निधन
देवीलाल ने बताया कि मिसिर बेसरा का एक बेटा है, जो दूसरे राज्य में काम करता है। उसकी एक बेटी थी, जिसका कुछ वर्ष पहले निधन हो गया। उन्होंने कहा कि मिसिर के नक्सली संगठन से जुड़े रहने के कारण पूरा परिवार वर्षों तक परेशान रहा। पुलिस समय-समय पर घर पहुंचती थी, पूछताछ करती थी और फरारी से संबंधित इश्तिहार चिपकाकर चली जाती थी। इससे परिवार को लगातार मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। मिसिर ने कभी परिवार की बात नहीं सुनी: भाई
देवीलाल ने बताया कि परिवार की ओर से कई बार मिसिर से आत्मसमर्पण करने की अपील की गई थी। वे चाहते थे कि वह हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौट आए, लेकिन उसने कभी उनकी बात नहीं मानी। वहीं, मिसिर बेसरा के भतीजे सुशील कुमार बेसरा सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने चाचा को कभी देखा ही नहीं। उनके बारे में केवल अपने पिता से ही सुना है। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से यही जानकारी थी कि उनके चाचा पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित है और वे माओवादी संगठन के बड़े नेता हैं। सुशील ने कहा कि उनका परिवार कानून का सम्मान करता है और वे स्वयं देश की सेवा में सीआरपीएफ में कार्यरत हैं। ग्रामीणों ने भी उसे दशकों से नहीं देखा था
इधर, गांव के लोगों का कहना है कि मिसिर बेसरा के वर्षों पहले गांव छोड़ने के बाद उसका यहां आना-जाना लगभग समाप्त हो गया था। अधिकांश ग्रामीणों ने भी उसे दशकों से नहीं देखा था। हालांकि, उसके नाम के कारण गांव अक्सर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों का केंद्र बना रहता था। गौरतलब है कि सोमवार देर रात धनबाद-गिरिडीह सीमा स्थित मनियाडीह क्षेत्र में धनबाद पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने विशेष अभियान चलाकर मिसिर बेसरा सहित उसके पांच अन्य साथियों को गिरफ्तार किया। सुरक्षा एजेंसियां इस कार्रवाई को माओवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मान रही हैं। लंबे समय से फरार चल रहे मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। अब सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर संगठन के नेटवर्क, गतिविधियों और अन्य सहयोगियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में लगी हैं। जानिए…कौन है मिसिर बेसरा
गिरिडीह के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनडीह निवासी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य है। उस पर सरकार ने एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। उस पर हत्या, आईईडी ब्लास्ट, पुलिस पर हमला और आर्म्स एक्ट के 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। सारंडा, कोल्हान, पारसनाथ और ट्राइजंक्शन (झारखंड-ओडिशा-बंगाल) उसका मुख्य कार्य क्षेत्र था। 2003-04 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में आईईडी ब्लास्ट की साजिश उसी ने रची थी, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर से सशस्त्र नक्सलियों ने पुलिस पर हमला कर उसे छुड़ा लिया था, इसके बाद से ही वह फरार था।

